कार्तिक में बौछार : किसान और बाजार जार-जार

बीकानेर । दो दिन पूर्व ही वर्षाकाल की विदाई का प्रतीक शरद पूर्णिमा महोत्सव मना चुके मरुधरावासी व्यापारी और कृषक कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की द्वितीया की सुबह हुई बूंदाबांदी से चिंतित हो उठे हैं। शुक्रवार को सुबह पश्चिमी राजस्थान के इस क्षेत्र में हुई बूंदाबांदी की पूर्व संध्या पर दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान के कुछ इलाके भी भीगे जिसके चलते किसान वर्ग आशंकित हो उठा है कि इसका असर जमाने पर पड़ेगा।
यहां के किसान आज भी परंपरागत खेती के नुस्खों में यकीन रखते हैं। हालांकि आधुनिक कृषि उपकरणों उपलब्धता और कृषि वैज्ञानिकों की सलाहों के चलते मरूस्थलीय कृषि पैदावार में बढ़ोतरी दर्ज होती रही है मगर बेमौसम की बारिश अथवा बूंदाबांदी को आज भी भावी फसल के लिए ठीक नहीं माना जाता ।
दरअसल कार्तिक मास का आरंभ वर्षाकाल का पूरी तरह से समापन मान लिया जाता है। बावजूद इसके इन दिनों न केवल उमस हुई वरन गर्मी भी पड़ रही है। यही वजह है कि किसानों में आशंका का वातावरण बन गया है।
किसानों का मानना है कि अभी बादल छाए हुए हैं। गर्मी भी है, उससे और भी बारिश आ सकती है। कार्तिक में होने वाली बारिश को किसान खरीफ फसलों के लिए हानिकारक मानते हैं।

व्यापारी भी चिंतित
दीपावली के 12-13 दिन शेष रहते मौसम में हुए बदलाव को देखते हुए व्यापारियों में भी चिंता व्याप्त दिखी। व्यापारियों ने स्टॉक एकत्रित कर रखा है। ऐसे में मौसम के रंग बदलने से व्यापारी भी आशंकाओं से ग्रसित होने लगे हैं। यूं भी लंबे समय से चल रही बाजार की सुस्ती से परेशान व्यापारियों को उम्मीद है कि दीपावली पर बिक्री बढ़ेगी। लेकिन कार्तिक की इस बूंदाबांदी ने किसानों के साथ-साथ व्यापारियों को भी चिंतित कर दिया है। व्यापारियों के अनुसार नुकसान सीधा किसान का ही होता है। इस तथ्य को किसान भी भली-भांति समझते है। इस कारण किसान वर्ग का पूरा ध्यान मौसम के साथ अपने खेत-खलिहानों की ओर है।

-✍️ मोहन थानवी

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