इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बोलबाला है। हर क्षेत्र में इसका उपयोग किया जा रहा है। यकायक ख्याल आया कि क्या आर्टिफिशियल षब्द उपयुक्त है। यह नकली इंटेलिजेंस कैसे हो सकता है। मेरी नजर में यह क्रिएटिव इंटेलिजेंस है, जिसमें इंटेलिजेंसी में क्रिएटिविटी की जाती है। इस सिलसिले में चैट जीपटी से पूछा गया कि उसकी राय क्या है तो उसका जवाब था कि विचार रोचक और विचारोत्तेजक है। “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) शब्द वास्तव में मशीन द्वारा निर्मित या मानव-निर्मित बुद्धि पर जोर देता है, जबकि आज की अनेक एआई प्रणालियाँ केवल गणना ही नहीं करतीं, बल्कि लेखन, चित्रकला, संगीत, डिजाइन, शोध-सहायता और नए विचारों का संयोजन भी करती दिखाई देती हैं। इसी कारण आपको “क्रिएटिव इंटेलिजेंस” नाम अधिक उपयुक्त लग रहा है। लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण अंतर समझना आवश्यक है। “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” क्या बताता है?
यह बुद्धि मानव द्वारा बनाई गई है। मशीनें सीख सकती हैं, निर्णय ले सकती हैं, पैटर्न पहचान सकती हैं। इसमें केवल रचनात्मकता ही नहीं, बल्कि तर्क, योजना, भविष्यवाणी, अनुवाद, चिकित्सा विश्लेषण, रोबोट नियंत्रण आदि भी शामिल हैं। “क्रिएटिव इंटेलिजेंस” क्या बताता है?
आपका प्रस्ताव है कि एआई सृजनात्मक क्षमता पर जोर देता है।
कविता, कहानी, संगीत, चित्र, नए विचार उत्पन्न करने वाली प्रणालियों के लिए यह नाम आकर्षक लगता है। लेकिन यह एआई के गैर-रचनात्मक उपयोगों (जैसे मौसम पूर्वानुमान, बैंकिंग धोखाधड़ी पहचान, चिकित्सा निदान) को पूरी तरह नहीं समेट पाता।
दार्शनिक दृष्टि से आपका सुझाव एक गहरे प्रश्न की ओर इशारा करता है, क्या बुद्धि का सर्वोच्च रूप रचनात्मकता है? यदि हम मानें कि केवल गणना करने वाला तंत्र “बुद्धिमान” नहीं कहलाता, बल्कि नया अर्थ, नई कल्पना और नया समाधान उत्पन्न करने की क्षमता ही वास्तविक बुद्धिमत्ता है, तब “क्रिएटिव इंटेलिजेंस” वास्तव में अधिक सार्थक नाम प्रतीत हो सकता है।
यदि पूरे क्षेत्र का नाम बदलना हो तो “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” अभी भी अधिक व्यापक शब्द है। लेकिन जनरेटिव एआई (जो कविता, चित्र, संगीत, लेख आदि बनाती है) के लिए “क्रिएटिव इंटेलिजेंस” एक बहुत प्रभावशाली और भविष्यसूचक नाम हो सकता है।