भागवत भाव प्रधान और भक्ति प्रधान ग्रंथ

बीकानेर। समता नगर में मधुर काषनी मंडल संस्था के तत्वावधान में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन रजनीशानंद महाराज ने कथा वाचन करते हुए कहा कि भागवत अवरोध मिटाने वाली उत्तम अवसाद है। भागवत का आश्रय करने वाला कोई भी दुखी नहीं होता है। भगवान शिव ने सुखदेव बनकर सारे संसार को भागवत सुनाई है। कथाकार ने श्रोताओं को कर्मो का सार बताते हुए कहा कि अच्छे और बुरे कर्मो का फल भुगतना ही पड़ता है। उन्होंने भीष्म पितामह का उदाहरण देते हुए कहा कि भीष्म पितामह 6 महीने तक वाणों की शैय्या पर लेटे थे। जब भीष्म पितामह वाणों की शैय्या पर लेटे थे तब वे सोच रहे थे कि मैंने कौन सा पाप किया है जो मुझे इतने कष्ट सहन करना पड़ रहे है। भागवत भाव प्रधान और भक्ति प्रधान ग्रंथ है। भगवान पदार्थ से परे है, प्रेम के अधीन है। प्रभु को मात्र प्रेम ही चाहिए। अगर भगवान की कृपा दृष्टि चाहते है तो उसको सच्चाई की राह पर चलना चाहिए। भगवान का दूसरा नाम ही सत्य है। महाराज श्री ने कहा कि नीति के विरुद्ध कार्य करना भी मनुष्य के लिए जीवन जीना नरक समान है। ईर्ष्या करने वाला व्यक्ति सदैव पतन की और जाता है। क्योंकि ईष्र्या करते-करते मानव के शरीर में द्वेष रूपी ज्वाला अंदर से मनुष्य को खोखला बनाने में सिद्ध सहायक होती है। इस अवसर पर सोनू कंसल,रमेश पारीक,लालचंद भाटी,उमाशंकर माथुर,राजेश रावत,सुनील शर्मा सहित सैकड़ों कथा श्रमण में उपस्थित थे।

error: Content is protected !!