अजमेर को टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा

अजमेर को टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा, पर्यटक बसों का संचालन किया जाएगा व देश विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए ऐसी व्यवस्था की रहेंगी कि पर्यटक अल्प खर्च में अजमेर में भ्रमण कर सके व मात्र 1 दिन नहीं अपितु 2-3 अथवा अधिक दिन तक यहां रुके वह अजमेर के धार्मिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक, साहित्यिक व भौगोलिक सभी श्रेणी के पर्यटन का आनंद ले सकें।
उक्त विचार जिला कलेक्टर विश्व मोहन शर्मा ने अजमेर जिला प्रशासन, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग राजस्थान व अजमेर विकास प्राधिकरण की ओर से आयोजित कला उत्सव में अजमेर के 907 स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए ।
उन्होंने कहा कि कला व संस्कृति के विकास के साथ हमें मतदान का भी विकास करना है व सभी नागरिकों को वोट देकर अपने अधिकार का उपयोग कर एक कीर्तिमान कायम करना है ।
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी व श्री प्रभारी गजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि अजमेर शहर ही नहीं बल्कि अजमेर जिले में कई प्राचीन इमारतें व प्राकृतिक स्थल है जिन का जीर्णोद्धार कर योजनाबद्ध तरीके से अजमेर के पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।
अजमेर विकास प्राधिकरण के आयुक्त निशांत जैन ने कहा कि कला एवं संस्कृति से जुड़ी गतिविधियां अजमेर को अन्य शहरों से अलग पहचान देती हैं व इसी श्रंखला में नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा आयोजित होने जा रहा बुक फेयर भी अजमेर के लिए एक सुनहरा अवसर होगा ।
संगोष्ठी में वक्ता पर्यावरणविद के.के. शर्मा व अनंत भटनागर ने अजमेर में पर्यटन की अपार संभावनाओं को लेकर कई सुझाव दिए।

कला शिविर मैं कैनवस पर नजर आए इंद्रधनुषी रंग
जिला कलेक्टर विश्व मोहन शर्मा व समस्त अधिकारियों नए कला शिविर का दीप प्रज्वलन द्वारा उद्घाटन किया व राजस्थान के अनेक शहरों से आए ख्यातनाम कलाकारों से मिलते हुए उनकी कार्यशैली को देखा और सराहा। कला शिविर में डॉ अनुपम भटनागर, अशोक हाजरा, लक्ष्यपाल सिंह राठौड़, प्रहलाद शर्मा, शंभू सिंह, मनोज जोशी, मुकेश कुमावत, सचिन सकलकर, प्रजेष्ठ नागोरा, अलका शर्मा, पुष्पकांत मिश्रा, निहारिका , ऋतु शिल्पी, मृदुला चौरसिया, बनवारीलाल ओझा , राजेश बुंदेल, राकेश कुमावत, वह योगेश वर्मा अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं।

कला प्रदर्शनी देख दर्शक हुए अभिभूत
अजमेर फिलेटलिक ब्यूरो के सदस्यों धरोहरो पर जारी डाक टिकट वह प्रथम दिवस आवरण प्रदर्शित किए, राजेश कश्यप ने पूरा वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई जिसमें प्राचीन ताले, टॉर्च, लैंप घड़ियां अभी प्रदर्शित की । आर्ट कैंप में आए कलाकारों ने पूर्व में बनाई पेंटिंग प्रदर्शित की जिन्हें अतिथियों व दर्शकों ने देखा व अभिभूत हुए ।

आकर्षण का केंद्र बनी स्वीप प्रदर्शनी
जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा मतदान बढ़ाने हेतु जिले में चलाई जा रही स्वीप गतिविधियों की प्रदर्शनी कला उत्सव में आकर्षण का केंद्र बनी। इस प्रदर्शनी में जिले में आयोजित विभिन्न गतिविधियों की चित्र प्रदर्शनी लगाई गई साथ ही वीवीपैट मशीन द्वारा दिन भर आने वाले कला प्रेमियों व पर्यटकों ने जानकारी ली, इसी क्रम में संजय सेठी ने मतदान के लिए प्रेरित करती हुई चित आकर्षक रंगोली बनाई।

आर्ट वर्कशॉप में बच्चों ने सीखी बारीकियां
बुधवार को राजेश बुंदेल ने क्ले मॉडलिंग का प्रशिक्षण दिया व मुकेश कुमावत ने मिनिएचर पेंटिंग की बारीकियां सिखाई। कार्यशाला में मीनू स्कूल, सावित्री स्कूल व ब्लॉसम स्कूल के विद्यार्थियों व फ्लाइंग बर्ड्स संस्थान के सदस्यों ने भाग लिया।

नाटक हरदिलअज़ीज अजमेर का मंचन
‘‘ये माॅल, ये मार्ट ये मल्टीप्लेक्स तो जेब काटने का बहाना है, असली सूकून तो आनासागर की बारहदरी पर आना है…’’
‘‘शहर की गलियांें में कुछ बजुर्ग है जिनका कोई नहीं। खड़े है बादशाही बिल्डिंग की तरह अपनी बे-नूरी पर रोते हुए। लेटे है अब्दुला खां और बीबी के मकबरे की तरह हमें रास्ता दिये। कल का संस्कृत विद्यालय आज अढाई दिन का झौपड़ा परेशां है अपने उजाड़ आंगन से, सम्भाल लो मुझे देता ये पैगाम है फिर ना बन पाउंगा ये मेरा ऐलान है।’’
कुछ ऐसा ही दर्द उभर कर आया नाटक ‘‘हरदिल अजीज अजमेर’’ के मंचन में। कला उत्सव के दौरान अजमेर के स्थापना दिवस एवं विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में रंगकर्मी राजेन्द्र सिंह द्वारा यह प्रस्तुति दी गई। नाटक का निर्देशन और लेखक भी मुद्रा थियेटर के निदेशक राजेन्द्र सिंह ने ही किया।
‘‘हरदिल अजीज अजमेर’’ में अजमेर की पौराणिक महत्ता से लेकर, दरवाजे, गली मौहल्ले चैकों को सूत्र में पिरो कर दिवंगत शायर मजबूर और पद्मश्री सी.पी.देवल की कविता की पंक्तियां ‘‘कुदरत ने जो दिया दिल खोल कर सभी जीवों के लिए, उसमें सिवाए इस व्याख्या के तुमने किया ही क्या है कि गेहूं अपने लिए और भूसा जानवरों के लिए? दूध अण्डा, शहद खाकर, मुर्गी बकरे को उबाल कर, पानी से मछली को जुदा कर भी मर क्यों जाता है आदमज़ात, सवाल है?’’ जैसी पंक्तियों से इंसान के अपने स्वार्थ के वशीभूत होकर इच्छा आपूर्ति के लिए किये गये कृत्यों से हम किस दशा तक पंहुच गये है इसका आइना दर्शकों का आइना दिखाया। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षित राजेन्द्र सिंह ने इस नाटक के मंचन के दौरान अपनी हास्य, व्यंग्य, वीर और रौद्र रसों से परिपूर्ण भाव भंगिमाओं से दर्शकों को एक यात्रा पर ले गये और अंत में सभी के दिलों में एक सवाल और कसक छोड़ गये कि हमारी विरासत को क्यों हमें सम्भालना है। पूरे नाटक में सभी रंगमंचीय तथ्यों को मणकों की तरह बांधकर अजमेर के स्थापना दिवस पर एक खूबसूरत हार अपनी सशक्त अभिव्यक्ति के द्वारा पेश किया।
कार्यक्रम का संचालन पृथ्वीराज फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ पूनम पांडे ने किया पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीक्षक नीरज त्रिपाठी ने आभार व्यक्त किया।

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