आचार्य तुलसी की 23वीं पुण्यतिथि पर आयोजित हुआ “तुलसी मेरी दृष्टि में”

बीकानेर । जैन, सिख, हिन्दू, मुस्लिम इत्यादि सभी धर्मों की उपासना पद्धति अलग है परन्तु मूल एक ही है सभी धर्म प्रेम, करूणा व अहिंसा की बात करते है। यह विचार गंगाशहर स्थित आशीर्वाद भवन में आचार्य तुलसी की 23वीं पुण्यतिथि पर आयोजित संगोष्ठी ‘‘तुलसी मेरी दृष्टि में’’ कार्यक्रम में शासनश्री मुनिश्री मणिलाल जी ने कही। उन्होंने जैन धर्म के पांचों महाव्रत सत्य, अहिंसा, अचौर्य, अनेकान्त व अपरिग्रह की चर्चा करते हुए कहा कि वेदों में सभी का उल्लेख है।
मुनिश्री सुमतिकुमार जी ने कहा कि आचार्यश्री तुलसी हमेशा अनुशासन पसंद करते थे और इसी अनुशासन के कारण वे जैन समाज को अनुशासित कर पाए। मुनिश्री ने कहा कि तुलसी एक महान व्यक्तित्व व कर्तृत्व के धनी थे।मुनिश्री ने बताया कि आचार्यश्री तुलसी ने जन-जन को उपदेश दिया कि अपने स्वयं पर अनुशासन करो फिर दूसरे अनुशासित होंगे।
मुनिश्री देवार्य कुमार जी ने आचार्यश्री तुलसी के प्रति अपने भाव प्रकट करते हुए कहा कि आचार्यश्री सशक्त शासन और अनुशासन के प्रति हमेशा जागरूक रहते थे। आचार्यश्री नियमों के प्रति कठोर तो थे ही लेकिन ममत्व वात्सल्य के धनी भी थे। कार्यक्रम में मुनिश्री कुशलकुमार जी ने कहा कि आचार्यश्री हमेशा सभी के दिलों को जीत लेते थे। उन्होंने प्रेक्षाध्यान, मर्यादा महोत्सव आदि कार्यक्रमों द्वारा जन-जन के दिलों पर अपनी छाप छोड़ी है। मुनिश्री आदित्य कुमार जी ने कहा कि आचार्यश्री ने लाखों लोगों के जीवन में उजियारा किया है। मुनिश्री ने कार्यक्रम में “धैर्य जीवन का मेला जी, उसे ही संत कहते हैं। ।
कार्यक्रम में अणुव्रत महासमिति के संगठन मंत्री प्रकाश भंसाली ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आचार्यश्री में सभी गुणों का समन्वय था। वे एक पहरेदार थे जो हमेशा जीवन में जोश भरते रहते थे। आचार्यश्री हमेशा वक्ता की जगह कार्य करने की बात कहते थे। अणुव्रत समिति, गंगाशहर के अध्यक्ष राजेन्द्र बोथरा ने कहा कि कहा कि आचार्य तुलसी के सिद्धान्तों और विचारों को प्रदर्शित किया जाना उनके अवदानों को पुनः स्मरण करवाने के साथ-साथ जीवन में आत्मसात् का माध्यम बनेगा।
महापौर नारायण चौपड़ा ने कहा कि आचार्यश्री ने सभी धर्म के लोगांे को जीवन जीने का माध्यम बताया। आचार्यश्री तुलसी पूरे विश्व के संत थे उन्होंने हमेशा जन-जन को अहिंसा का पाठ पढ़ाया।
आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष जैन लूणकरण छाजेड़ ने कहा कि आचार्य तुलसी ने अपने जीवनकाल में व्यसन मुक्ति, अणुव्रत आंदोलन, प्रेक्षाध्यान आदि अनेक उपक्रमों माध्यम से समाज सुधार के कार्य किये। अध्यक्ष छाजेड़ जी ने कहा कि आचार्यश्री तुलसी 21वीं शताब्दी के सूत्रधार थे। अध्यक्ष छाजेड़ ने आगामी आयोज्य कार्यक्रमों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री आगम के ज्ञाता, वाणी सिद्ध महानायक, नशामुक्ति के प्रचारक, पर्दा प्रथा के विरोधी तथा महिला सशक्तिकरण के प्रबल सहभागी थे। अध्यक्ष ने कहा कि आचार्यश्री तुलसी को अलौकिक व्यक्तित्व के धनी, अद्भूत संगायक, महान साहित्यकार, तेरापंथ धर्म संघ के कल्पवृक्ष बताया।
कार्यक्रम में प्रोफेसर सुमेरचन्द जैन, पुष्पा देवी लोढ़ा, तेरापंथ युवक परिषद् गंगाशहर के मंत्री देवेन्द्र डागा, तेमम बीकानेर की उपाध्यक्ष प्रेम नवलखा, अणुव्रत समिति बीकानेर के अध्यक्ष इन्द्रचन्द सेठिया, सुमन मेघवाल, माणकचन्द सेठिया, भारती सेठिया, हंसराज डागा आदि ने विचार रखे। कार्यक्रम की विधिवत् शुरूआत तेरापंथ कन्या मण्डल, गंगाशहर द्वारा मंगलाचरण से हुई। तेरापंथ महिला मण्डल, गंगाशहर द्वारा गीतिका का संगान किया गया।

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