फायसागर में पानी की आवक के रास्ते व बांडी नदी से हटाए जाए अतिक्रमण

– विधान सभा में देवनानी ने सिंचाई विभाग की अनुदान मांगों पर रखे प्रस्ताव
– नागफणी पहाड़ी से बारिश के पानी के साथ आने वाले पत्थरों की रोकथाम के हो उपाय
– चैरसियावास तालाब की हो मरम्मत

प्रो. वासुदेव देवनानी
जयपुर/अजमेर, 26 जुलाई। पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री व विधायक अजमेर उत्तर वासुदेव देवनानी ने विधान सभा में में सिंचाई विभाग की अनुदान मांगों पर प्रस्ताव प्रस्तुत कर क्षेत्र की झीलों व तालाबों में पानी की आवक के रास्तों में हो रहे अतिक्रमण व अवरोधों को हटाने की मांग की।
उन्होंने बताया कि गत वर्षों में फायसागर झील में बहुत ही कम मात्रा में पानी आ रहा है। उन्होंने एक प्रस्ताव के माध्यम से झील में बारिश के पानी की आवक के जो रास्ते है उन पर जो अतिक्रमण व अवरोध स्थित है उन्हें हटाये जाने की मांग रखी। इसके साथ ही एक अन्य प्रस्ताव द्वारा आनासागर झील में मिलने वाली बांडी नदी के रास्तें में भी कई अतिक्रमण व अवरोध स्थित है उन्हें भी हटाये जाने की मांग रखी।
देवनानी ने बताया कि उन्होंने एक अन्य प्रस्ताव के माध्यम से नागफणी क्षेत्र की जो पहाड़ी है वहां से बारिश के पानी के साथ नीचे बहकर आने वाले पत्थरों की रोकथाम हेतु आवश्यक प्रबंध कराये जाने की मांग भी रखी है साथ ही अजमेर उत्तर विधान सभा क्षेत्र में स्थित चैरसियावास तालाब की भी मरम्मत कराये जाने की मांग सरकार से की है।
इसके अतिरिक्त उन्होंने पुष्कर क्षेत्र के नागौर जिले की सीमा से सटे क्षेत्र में वर्तमान में भूजल स्तर में हो रही कमी के कारण फसलों की सिंचाई व्यवस्था हेतु कोई योजना स्वीकृत कराये जाने के लिए भी एक प्रस्ताव सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया है।

नदी-नालों से बजरी खनन पर है नवंबर 17 से उच्चतम न्यायालय का प्रतिबंध, फिर कहां से आ रही है बजरी
– देवनानी ने बजरी खनन को लेकर पूछा था विधान सभा में प्रश्न
– वर्तमान में 4 जिलों में खातेदारी क्षेत्र के 72 खनन पट्टों से ही हो रहा है वैध खनन
– बजरी खनन पर प्रतिबंध व अवैध खनन बना प्रदेश में गंभीर मुद्दा, समाधान के लिए सरकार करे गंभीरतापूर्वक प्रयास

जयपुर/अजमेर, 26 जुलाई। पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री व विधायक अजमेर उत्तर वासुदेव देवनानी ने उनके द्वारा विधान सभा में बजरी खनन को लेकर पूछे गये एक तारांकित प्रश्न के हवाले से बताया कि प्रदेश में नदी-नालों में बजरी का खनन पर्यावरण क्लीरेंस एवं वैज्ञानिक रिप्लेनिशमेन्ट स्टडी के अभाव में माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश दिनांक 16 नवंबर 2017 से प्रतिबन्धित है।
देवनानी ने बताया कि सरकार द्वारा उनके प्रश्न का जो जवाब दिया गया है उसके अनुसार नदी-नालों के अतिरिक्त खोतेदारी/पेलियों चैनल क्षेत्रों में स्वीकृत 72 खनन पट्टों से वर्तमान में खनन जारी है। ये 72 खनन पट्टे प्रदेश के केवल 4 जिलों में स्थित है जिनमें से बीकानेर जिले में 46, नागौर में 21, बाडमेर में 4 तथा जोधपुर जिले में 1 खनन पट्टा जारी किया हुआ है।
देवनानी ने कहा कि एक स्वाभाविक प्रश्न खड़ा होता है कि जब इन 4 जिलों के अतिरिक्त प्रदेश के अन्य किसी भी जिलें में वर्तमान में बजरी खनन नहीं किया जा सकता है तो फिर बजरी कहां से आ रही है। इसका मतलब यह हुआ कि प्रदेश में अवैध बजरी खनन धड़ल्ले से चल रहा है जिस पर सरकार कोई नियंत्रण नहीं कर पा रही है तथा बजरी माफियाओें के हौसले बुलंद है।
उन्होंने बताया कि प्रश्न के जवाब में सरकार ने यह भी बताया है कि प्रदेश में स्ट्रेचवाईज बजरी की लीजों के आंवटन हेतु वर्ष 2012-13 में निविदाएं की गई थी। प्रदेश में की गई सभी निविदाओं की कुल आरक्षित राशि लगभग 67 करोड़ थी जिसके विरूद्ध लगभग 4 अरब 36 करोड़ से भी अधिक राशि की निविदाएं हुई थी।
देवनानी ने कहा कि आज प्रदेश में बजरी खनन पर प्रतिबन्ध एवं अवैध बजरी खनन एक अत्यन्त ही गंभीर मुद्दा बना हुआ है। सरकार को इसका समाधान निकालने के लिए शीघ्र ही गंभीरतापूर्वक प्रयास करने चाहिए।

error: Content is protected !!