भाग सोलह
श्री एस. पी. मित्तल
अजमेर की पत्रकारिता में श्री एस. पी. मित्तल किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। यदि यह कहा जाए कि वे एक ब्रांड हो गए हैं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इस शख्स में गजब की ऊर्जा है। संघर्ष के मुकाबले कभी न थकने वाले इस इंसान ने पत्रकारिता में कई नए आयाम स्थापित किए हैं। अजमेर में पहली बार व्यवस्थित तरीके से केबल नेटवर्क पर लोकल न्यूज चैनल चलाने का श्रेय श्री मित्तल के खाते में ही दर्ज है। यूं अजमेर में सर्वप्रथम 1997 में यूनाइटेड वीडियो चैनल के लाइसेंस पर अजमेर चैनल के नाम से न्यूज चैनल शुरू हुआ था, जिसका संचालन श्री नानक भाटिया ने किया। सांपद्रायिक उपद्रव के दौरान उत्पात को दिखाए जाने पर जिला प्रशासन इसे रुकवा दिया। हालांकि बाद में यह चैनल फिर शुरू हुआ, मगर केबर वार के चलते फिर बंद हो गया। बाद में सन् 2000 में श्री मित्तल ने अजमेर अब तक के नाम से व्यवस्थित न्यूज चैनल आरंभ किया। इसका प्रसारण ब्यावर, किशनगढ़, नसीराबाद आदि उप खण्डों पर भी किया जाता था। सीमित साधनों में केबल पर न्यूज चलाना चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन इस काम को उन्होंने अपने अंजाम तक पहुंचाया। अजमेर वासियों के लिए यह पहला अनुभव था, इस कारण लोग बहुत दिलचस्पी के साथ इसे देखते थे। बाद में केबल वार के चलते उन्हें प्रसारण बंद करना पड़ा। दिलचस्प बात ये है कि श्री मित्तल ने दैनिक भास्कर के मुख्य संवाददाता की अच्छी खासी नौकरी छोड़ कर अजमेर वासियों लोकल न्यूज चैनल से साक्षात्कार करवाया। यह अपने आप में एक बड़ी दुस्साहसपूर्ण उपलब्धि थी।

पत्रकारिता के साथ पत्रकारों के हितों के लिए भी उन्होंने कई काम किए हैं। वे जिला पत्रकार संघ के महासचिव रहे हैं और उनके कार्यकाल में ही जिले के पत्रकारों का पहला सफल सम्मेलन हुआ था। वे अजयमेरू प्रेस क्लब के अध्यक्ष भी रहे हैं। हर साल आयोजित होने वाले फागुन महोत्सव में उनकी अहम भूमिका होती है। वे विश्व संवाद केन्द्र अजयमेरू के अध्यक्ष हैं और हर साल उल्लेखनीय कार्य करने वाले पत्रकारों को सम्मानित करते हैं।
जहां तक लेखनी का सवाल है, उनकी भाषा सीधी सपाट होती है, उसमें अलंकारों का बहुत अधिक उपयोग नहीं होता, मगर सूचना के लिहाज से वह अपडेट होती है। तेवर तो उनके मिजाज में है ही। उनकी लेखनी की प्रशंसा भूतपूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय श्री ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने भी की। 17 नवम्बर, 2005 को राष्ट्रपति के रूप में अजमेर आए कलाम ने तब श्री मित्तल और उनके परिवार के सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए सर्किट हाउस आमंत्रित किया। इस मुलाकात की रिपोर्ट जब कलाम ने भभक समाचार पत्र में पढ़ी तो राष्ट्रपति ने शुभकामनाएं भिजवायीं।
पत्रकारिता में अनेक उतार-चढ़ाव आने के बावजूद विविधता व नवाचार में अपनी प्रतिभा झोंकने वाले वे इकलौते धुन के पक्के पत्रकार हैं। चंद शब्दों में कहा जाए तो वे डंके की चोट पर लिखने वाले निडर व जीवट वाले और कभी न थकने वाले पत्रकार हैं। नवोदित पत्रकारों को उनसे सीख लेनी चाहिए।
-तेजवानी गिरधर
7742067000