✍️✍️ *लॉक डाउन के चलते चोपड़ा कॉम्प्लेक्स के मालिक अजय चौधरी ने स्वेच्छा से किया किराया माफ*
मित्रों इस वैश्विक महामारी के दौरान हम सबको कई लोगों के असली चेहरे देखने को मिल रहे हैं।कल तक जो अपने आपको बड़े दानवीर कहलवाते थे।आज वो मैदान छोड़कर घरों में बैठे हैं।क्योंकि अभी चुनाव नहीं है।उन्हें पता है आज जो पैसे बिगाड़ेंगे लोग चुनाव तक भूल जाएंगे।तो वो समझदारी से काम कर रहे हैं।उन्हें सारा सिस्टम पता है।जनता को कैसे बेवकूफ बनाना है।मीडिया को कैसे मैनेज करना है।उन्हें सब आता है।इस माहौल में वो सब लोग गायब हैं।जो दिख रहे हैं मैदान में,वो ही असली हीरो हैं।जो इंसान सच्चा समाजसेवी है वो इस मौके पर दिल लगाकर काम कर रहा है जो कोरोना वायरस है वो भी पूरी शिद्दत से गंदगी फैलाने की कोशिश कर रहा है।इसी दौरान एक अच्छा और वास्तविक दिलदार आदमी निकलकर आया है।जो वास्तव में समाजसेवी भी है,धनवान भी है।और धनवान सिर्फ पैसों से नहीं दिल से धनवान है।पैसों से धनवान तो इनसे ज्यादा भी है लेकिन भगवान ने दिल उनका बनाया ही नहीं।दिल के स्थान पर भी उनको एक और दिमाग दे दिया जो डब्बल तरह से कमाई करने की ही सोचते हैं सिर्फ।उनकी गलती भी नहीं है।गलती भगवान की है।भगवान ने ही इस लायक नहीं बनाया तो वो बेचारे करें भी तो क्या? खैर मैं बात कर रहा था सोसायटी के रियल हीरो की।अजय चौधरी की जो मेरे गांव के चोपड़ा कॉम्प्लेक्स के मालिक हैं।मालिक तो वैसे सरपंच साहब के नाम से विख्यात नाथू जी चोपड़ा रूपपुरा वाले सरपंच साहब हैं।लेकिन अस्वस्थता के चलते आजकल लोगों के टच में कम है और उनके ये सुपुत्र सबके टच में हैं इसलिए इन दोनों ही की बात कर रहा हूं मैं यहां।इन्होंने अपने कॉम्प्लेक्स के 14 दुकानदारों में से सिर्फ 2 दुकानदारों से किराया लिया जिनमें से एक मेडिकल स्टोर की दुकान है और एक किराने की।बाकी 12 दुकानदारों से स्वेच्छा से किराया लेने से इंकार कर दिया।ऐसा नहीं है कि किसी दुकानदार ने इनको कहा हो।दुकानदारों ने तो किराया इकठ्ठा करके इन्हें देना चाहा तो इन्होंने सिर्फ दो दुकानदार से किराया लिया।बाकी सबको वापस लौटा दिया।यहां मैं आपको बता दूं कि इसी कॉम्प्लेक्स में मेरा भी ऑफिस है।मैंने इन्हें कहा कि मैंने लॉक डाउन के दौरान यदा कदा ऑफिस में बैठकर मेरा काम किया था इसलिए मेरा किराया तो आप स्वीकार करो तो इन्होंने कहा कि आपने चाइना के खिलाफ याचिका पेश की उस दौरान ही आपका ऑफिस खुला था।आपसे तो मैं किसी भी सूरत में किराया नहीं लूंगा।तो दोस्तों ये होती है वास्तविकता में इंसानियत।आज हमारे देश का जो सिस्टम सही चल रहा है वो ऐसे अच्छे लोगों की वजह से ही चल रहा है।किसी भी दुकानदार को 4-5 हजार रुपये से कोई विशेष फर्क नहीं पड़ने वाला है।ना ही 50 हजार रुपये से कोई सेठ आदमी गरीब हो जाएगा।ये सोच की बात होती है।इंसानियत की बात होती है।मुझे बहुत अच्छा लगा इसलिए आप सभी मित्रों को शेयर कर रहा हूं।और फिर हो सकता है इसको पढ़कर किसी अमीर आदमी का ज़मीर जाग जाए।वो भी अपने किराएदार को किराए की रकम से मुक्ति दे दे।आप चाहें तो ऐसे अच्छे इंसान को इस नम्बर 9414610679 पर कॉल करके धन्यवाद दे सकते हैं।
*डॉ.मनोज आहूजा एडवोकेट एवं पत्रकार।9413300227*