असली कोरोना वारियर मजदूर है

लॉकडाउन में असली कोरोना वारियर मजदूर है जिनके दम पर अनाज के गोदाम भरे है जबकि ऐसे लोग कोरोना वारियर बने हुए हैं जो इन्ही मजदूरो द्वारा उत्पादित अन्न व वस्तुएं बांटकर कैमरे में फोटो खिंचवाकर अपने मुंह से अपनी बखान करते हुए नहीं थकते अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर कमठा मजदूर यूनियन बाड़मेर के अध्यक्ष लक्ष्मण बडेरा ने कहां की मजदूर जिनके भरोसे पूरे देश की मिले उद्योग धंधे फैक्ट्रियां कंपनियां सब चलती है वही मजदूर लोक डाउन में बेरोजगार हो गया पिछले 40 दिन से जब से लॉकडाउन लगा हुआ है तब से मजदूर की रोजी-रोटी छिन गई और मजदूर के पास में जो जमा पूंजी थी वह भी खर्च हो गई सरकार ने मजदूरों को जो चिन्हित थे जिसमें बीपीएल है जिसमें पंजीकृत निर्माण श्रमिक है जिसमें स्ट्रीट वेंडर को ही मात्र ₹2500 की मामूली सहायता दी दूसरी तरफ प्रवासी जो मजदूर लाखों की संख्या में है वह घरों से दूर घर आने के लिए सरकार से निवेदन करते रहे लेकिन सरकार ने माना नहीं सरकार ने मजदूर को कोरोना वायरस फैलाने वाला बता दिया इसलिए मजदूर को घर पहुंचाने में किसी भी तरह की कोई दिलचस्पी नहीं है दूसरी तरफ अमीर लोग चाहे वह देश में थे चाहे वह विदेश में थे उन लोगों को सरकार ने हवाई जहाज की मदद से घर तक पहुंचाया और जो पूंजीपति लोग थे उनके जो बच्चे बड़े-बड़े कोचिंग संस्थानों में पढ़ते थे उनको सरकारी वाहनों से घर तक पहुंचाया और यह एक स्टेट की बात नहीं है पूरे हिंदुस्तान के सभी राज्यों में अमीरों के लिए और अमीरों के ओलादो के लिए सरकार के खजाने और दिल दोनों खुले रहे और दूसरी तरफ मजदूर अपने घर जाने के लिए बहुत प्रयास करता रहा लेकिन मजदूर को यह धमकाकर कि तुम गए तो तुम्हारी वजह से कोरोना वायरस फैल जाएगा परेशान मजदूर ने पैदल अपनी मंजिल तय की उसमें कई दर्जन लोग मर गए लेकिन सरकार ने उन लोगों को कोई सहायता नहीं दी एक तो सरकार पुलिसकर्मियों को स्वास्थ्य कर्मियों को 50 लाख का बीमा कवर दे रही है दूसरी तरफ मजदूर को एक रुपया भी नहीं दे रही यह सरकार का मजदूरों के साथ में सरासर विश्वासघात है अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर मजदूर नेता लक्ष्मण बडेरा ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार ने 10 लाख मजदूरों के सहायता आवेदन को अटका कर रखा है जिसमें साडा छै लाख छात्रवृत्ति के आवेदन है तीन लाख मजदूरों की पुत्रियों की शुभ शक्ति सहायता योजना के आवेदन है 30 हजार मजदूरों के प्रसूति सहायता का आवेदन इसी तरह मजदूरों की मृत्यु पर 10,हजार से अधिक सहायता के आवेदन पेंडिंग पड़े हैं राज्य सरकार मजदूरों की सहायता देने में किसी भी प्रकार की दिलचस्पी नहीं ले रही है पंजीकृत निर्माण श्रमिकों स्ट्रीट वेंडर इन सबको खाद्य सुरक्षा की श्रेणी में शामिल करने के बावजूद भी खाद्य सुरक्षा का लाभ नहीं मिल रहा है और इनको इसके वंचित रखने के लिए सरकार ने एसडीओ को अधिकृत किया एसडीओ और पटवारी मजदूरों को खाद्य सुरक्षा का लाभ देने में किसी भी प्रकार की दिलचस्पी राजस्थान में नहीं ली इस वजह से 30 लाख निर्माण श्रमिक खाद्य सुरक्षा योजना से वंचित है और इसी तरह एक लाख स्ट्रीट वेंडर खाद्य सुरक्षा से वंचित है और तो और इन मजदूरों को अभी तक कोरोना वायरस में दी जाने वाली सहायता पूरी नही हुई है एक महीना गुजर जाने के बावजूद भी सहायता नहीं मिली मजदूर देता लक्ष्मण बडेरा ने मजदूर दिवस पर सभी मजदूरों को बधाई देते हुए कहा कि हम सभी लोग मिलकर के संघर्ष करेंगे और उन सभी सरकारों को चेतावनी दी है कि जो मजदूरों के हितों में काम नहीं करेगी उन सरकारों के खिलाफ में मजदूरों को निर्णय करना होगा

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