dr. j k gargउनकी मौत के बाद, नई दिल्ली के साथ साथ भारत के अनेकों अन्य शहरों में भी सांप्रदायिक अशांती हो गई, बेकाबू भीड़ ने निरपराध लोगों को विशेष कर सिक्खों को मार डाला , यह अत्यन्तं अमानवीय कृत्य था और अवश्य ही इन्दिराजी की आत्मा इसे देख बिलख बिलख कर रोई होगी | इन्दिराजी का अंतिम संस्कार 3 नवंबर को राज घाट के समीप शक्ति स्थल पर कर दिया गया। इंदिराजी के बलिदान के साथ ही एक युग का अंत हो गया | आज सभी देशवासियों को इंदिराजी के वो शब्द याद आ रहें हैं “यदि मैं इस देश की सेवा करते हुए मर भी जाऊं, मुझे इसका गर्व होगा| मेरे खून की हरएक बूँद …..इस देश की तरक्की में और इसे मजबूत और गतिशील बनाने में योगदान देगी “ | आतंकवाद से लड़ते हुए अपनी जान की बली देने वाली देश की बेटी इंदिराजी को उनके 103 वें जन्मदिन पर हम सभी उन्हें शत् शत् नमन करते हैं। लोगों ने सही ही कहा था “आसमान में जब तक सूरज चाँद रहेगा,इंदिरा तेरा नाम रहेगा” |
प्रस्तुत कर्ता—–डा.जे.के.गर्ग
सन्दर्भ— केपी माथुर की किताब,वेदप्रताप वैद्यी का लेख, विभिन्न पत्र-पत्रिकायें,मेरी डायरी के पन्ने आदि |