विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी अजमेर विभाग द्वारा अखंड भारत दिवस पर आभासी पटेल पर विमर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें भारतवर्ष के विभिन्न क्षेत्रों से लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए चिंतक, विचारक और लेखक हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि देश के विभाजन की विभीषिका में जितने लोग विस्थापित हुए उनसे कहीं अधिक लोग मारे गए थे। स्वामी विवेकानंद का जन्म और निर्वाण दोनों ही अखंड भारत में हुआ। अखंड भारत के स्वप्न का जो मार्ग स्वामी जी ने दिखाया उसको अपना कर कैसे उसे साकार कर सकते हैं इस पर गहन चिंतन और मंथन करने की आवश्यकता है। राठौड़ ने कहा कि अखंड भारत की कल्पना मात्र भू – भाग की ना होकर सांस्कृतिक कल्पना थी । केवल प्राणी मात्र के कल्याण के लिए ही नहीं अपितु सर्व कल्याण और सर्व हिताय के साथ-साथ जो समस्त संसार को श्रेष्ठ गुणों की आवश्यकता है उस शिक्षा को प्रदान करने का सामर्थ्य केवल मात्र धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर प्रबलता से खडे अखंड भारत में ही है। इसलिए अखंड भारत की संकल्पना ही विश्वगुरु का साकार स्वप्न है।
उन्होंने कहा कि विश्व गुरु अखंड भारत का प्रण स्वर यहां की संस्कृति, सभ्यता और अध्यात्म है। ये इतनी सत्य और प्राचीन है कि अनेकानेक आक्रमणों के उपरांत भी जहां विश्व की अनेक सभ्यताएं नष्ट हो गई वहां भारत की सभ्यता आज भी अपने मूल स्वरूप में प्रतिष्ठित है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अखंड भारत के लिए एक मंत्र दिया और वह था *उठो जागो, कर्म करो और तब तक मत रुको जब तक भारत एक नहीं हो जाता। जब भारत एक होगा तो विजयी होगा और विजयी होगा तो निश्चित ही अखंड होगा।
कार्यक्रम का प्रारंभ तीन ओंकार प्रार्थना से किया गया । कार्यक्रम व वक्त परिचय साहित्यकार उमेश चौरसिया ने दिया विवेकानंद केंद्र के नगर संचालक डॉ० श्याम भूतड़ा ने धन्यवाद दिया। संचालन नगर प्रमुख भारत भार्गव ने किया। विमर्श की श्रृंखला में आगामी कार्यक्रम शनिवार 21 अगस्त को साय 5:00 बजे से विवेकानंद केंद्र के स्वप्नद्रष्टा माननीय एकनाथजी विषय पर होगा, जिसमें मुख्य वक्ता विवेकानंद केंद्र वेदिक विजन फाउंडेशन कोटगुलूर, केरल की निदेशक डॉ० एम लक्ष्मी कुमारी दीदी होंगी।
भारत भार्गव नगर प्रमुख
विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा, अजमेर