
देवनानी ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा, ऊर्जा मंत्री बी.डी.कल्ला का यह कहना सरासर गलत है कि पिछली सरकार डिस्काॅम पर 20 हजार करोड़ पए का बकाया छोड़ गई थी और कांग्रेस सरकार तो उसका ब्याज ही चुका रही है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय बिजली उत्पादन कंपनियां डिस्काॅम से केवल 12 हजार करोड़ रूपए ही मांग रही थीं लेकिन अब प्राइवेट और सरकारी कंपनियों पर बकाया 36 हजार करोड़ तक पहुंच गया है। देवनानी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने कोल इंडिया कंपनी को समय पर कोयले की खरीद का चुकारा नहीं किया, जिससे कोल इंडिया ने कोयले की सप्लाई रोक दी, लेकिन कल्ला इसका भी दोष पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर गलत तरीके से थोप रहे हैं। यदि प्रदेश सरकार ने कोल इंडिया कंपनी को समय पर चुकारा कर दिया होता, तो आज कोयले की कमी नहीं आती और प्रदेश की जनता को बिजली कटौती की मार नहीं झेलनी पड़ती।
देवनानी ने कहा, हर सरकार को यह पता होता है कि गर्मी के दिनों में बिजली की खपत और मांग बढ़ती है। इसे देखते हुए पूर्ववर्ती भाजपा सरकार समय पर समुचित कदम उठा लेती थी, लेकिन कांग्रेस सरकार ने कोई कदम नहीं उठाए। ना सरकार ने कोयला का स्टाॅक रखवाया और ना ही बिजली संकट की भयावहता का अंदाजा लगाया। यदि सरकार ने सब-कुछ पहले से अपने कुप्रबंधन में सुधार कर लिया होता, तो प्रदेश में चारों तरफ बिजली का संकट पैदा नहीं होता। जहां ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में सिंचाई के लिए बिजली नहीं मिल पा रही है, वहीं शहरी क्षेत्रों में कई-कई घंटे कटौती की मार जनता पर पड़ रही है। देवनानी ने कहा कि पूर्ववर्ती भाजपा शासनकाल में 7 हजार मेगावाट के प्लांट लगाए गए थे, जिसमें 4 हजार मेगावाट के सोलर ओर विंड प्लांट थे। भाजपा शासनकाल में कभी भी बिजली की समस्या पैदा नहीं हुई और ही हमारी सरकार को कभी महंगी बिजली खरीदनी पड़ी। उन्होंने कहा कि जब-जब कांग्रेस सत्ता में आती है, तब-तब बिजली सहित अन्य सभी क्षेत्रों में ऐसे ही हालात पैदा हो जाते हैं। इससे जाहिर होता है कि कांग्रेस सरकार को प्रबंधन बिल्कुल ठीक नहीं है। इन सबके बावजूद कांग्रेस सरकार के नुमाइंदे और नेता पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर झूठा दोषारोपण करते हैं, लेकिन जनता सब जानती है। देवनानी ने सवाल उठाया है कि जब भाजपा शासनकाल में किसी तरह की दिक्कत नहीं आती है, तो कांग्रेस शासनकाल में ही क्यों आती है। भाजपा शासनकाल में बिजली कंपनियों के घाटे पर नियंत्रण पा लिया गया था, लेकिन कांग्रेस के आते ही इसमें लगातार इजाफा होता चला गया। उन्होंने ऊर्जा मंत्री बी.डी.कल्ला को सलाह दी है कि वे बिजली संकट के लिए पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर दोषारोपण करने की बजाय अपने विभाग के कुप्रबंधन को सुधार कर जनता को बिजली संकट से राहत दिलाएं।