अन्याय दुराचार अहंकार क्रोध ईर्ष्या पर न्याय सदाचार विनम्रता स्नेह सद्दभाव की विजय का पर्व दिवाली पार्ट part 2

j k garg
अमावस्या का अँधेरा अज्ञानता और विकारों का प्रतीक है, इसी अंधकार को दूर करने के लिए घर-घर में अंदर और बाहर अधिकाधिक संख्याओं में दीपमालाएं आदि लगाने की होड़ लग जाती हैं | सच्चाई तो यही है कि भगवान की श्रेष्ट्म रचना मनुष्य ही है | अत आदमी ही इस संसार में अविनाशी निरंतर प्रकाशित होने वाला दीपक है | इसलिए सच्ची दीपावली मनाने के लिए घरों में मिट्टी के दिये जलाने के साथ मन के दीप को जलाना और उसके प्रकाश को चारों ओर फैलाना ज्यादा जरूरी है | अत आईये हम दीपावली पर स्थूल रोशनी करने के बजाय अज्ञान रुपी अंधकार को मिटाकर अंतर्मन में आत्मज्ञान की ज्योति जलाने की प्रतिज्ञा लेकर उसे मूर्तरूप भी दें |

दीपावली भारत के साथ अन्य देशों यानी ब्रिटेन नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, सूरीनाम, कनाडा, गुयाना, केन्या, मॉरीशस, फिजी, जापान, इंडोनेशिया, मलेशिया,म्यांमार, सिंगापुर, श्रीलंका, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, त्रिनिडाड, टोबैगो, जमैका, थाईलैंड, आस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात आदि में हर्षोल्लास एवं उत्साह से मनाया जाता है जिसमे जिसमें भारतीयों के साथ वहां के मूलनिवासी भी भाग लेते हैं | दीपावली का संदेश पूरी दुनिया से दारिद्र्य, अज्ञान, अनाचार, कुंठा एवं वैरभाव को मिटा कर उसकी जगह समृद्धि, सुख-सुविधा, ज्ञान, सदाचार,स्वास्थ्य, भ्रातृत्व एवं आनंद की स्थापना करने का ही है |

-डा. जे. के. गर्ग

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