
पर्वत दुनिया की 15% आबादी और दुनिया के भूमि जानवरों और पौधों का एक चौथाई हिस्सा हैं।
वर्ष के लिए थीम ‘माउंटेन मैटर फॉर यूथ’ है।
अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय दिवस का गठन 1992 में तब हुआ जब एजेंडा 21 के मूल दस्तावेज “मैनेजिंग फ्रेगाइल एसोसिस्टम्स: सस्टेनेबल माउंटेन डेवलपमेंट” को पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में अपनाया गया।
पहाड़ के महत्व की ओर बढ़ते हुए ध्यान को देखते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2002 को संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय वर्ष घोषित किया और 2003 से अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय दिवस के रूप में नामित किया।
पृथ्वी की सतह से ऊपर उठने वाले भाग को पर्वत या पहाड़ी कहा जाता है। उत्पत्ति या गठन की विधि के आधार पर, पहाड़ों को इस प्रकार वर्गीकृत किया जाता है:
1. संरचनात्मक या टेक्टोनिक पर्वत
2. अवशिष्ट या विच्छेदित पर्वत
3. ज्वालामुखी पर्वत
4. संरचनात्मक पर्वत
अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय दिवस का इतिहास
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यह दिन पर्यावरण में पहाड़ों की भूमिका और जीवन पर इसके प्रभाव को समझने के लिए लोगों को शिक्षित करता है। अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस का गठन 1992 में तब हुआ जब एजेंडा 21 के अध्याय 13 के “प्रबंधनीय पारिस्थितिक तंत्र: सतत पर्वत विकास” को पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में अपनाया गया. इसमें कोई शक नहीं, इसने पहाड़ों के विकास के इतिहास को एक नया रूप दिया है। पहाड़ के महत्व की ओर बढ़ते हुए ध्यान को देखते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2002 को संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय वर्ष घोषित किया और 11 दिसंबर को 2003 से अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस के रूप में नामित किया। पहली बार अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय दिवस 11 दिसंबर 2003 को मनाया गया था। तब से हर साल यह एक विशेष विषय के साथ मनाया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय दिवस का महत्व
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अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय दिवस महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक परिदृश्य को बचाने के लिए जागरूकता का आह्वान करता है। आबादी और जैव विविधता के अलावा पर्वत मानवता के आधे हिस्से को रोजमर्रा की जिंदगी के लिए ताजा पानी भी प्रदान करते हैं। जलवायु परिवर्तन से पहाड़ पर बसने वाले लोगों का बचना मुश्किल हो गया है। बढ़ते तापमान ने भी पर्वतीय ग्लेशियरों को अभूतपूर्व दरों पर पिघला दिया है जिससे लाखों लोगों के ताजे पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। वैश्विक स्तर पर ये समस्याएं लगभग सभी को प्रभावित कर रही हैं। इस प्रकार इन प्राकृतिक धरोहरों की देखभाल करना बहुत जरूरी है।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
मो. 9611312076