आरपीएससीः- लोक सेवा आयोगों के राष्ट्रीय सम्मेलन की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक 7 जनवरी को

अजमेर, 4 जनवरी। राजस्थान लोक सेवा आयोग में संघ लोक सेवा आयोग सहित राज्य लोक सेवा आयोगों के राष्ट्रीय सम्मेलन की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक 7 जनवरी को आयोजित की जाएगी। बैठक में केरल में आयोजित होने वाली नेशनल कांफ्रेंस का एजेंडा निर्धारित किया जाएगा।
आयोग अध्यक्ष डॉ. शिव सिंह राठौड़ ने बताया कि नेशनल कांफ्रेंस के निर्णयों को लागू करने के लिए स्थाई समिति के बैठकों का आयोजन किया जाता है।
आयोग अध्यक्षों का राष्ट्रीय सम्मेलन राज्य लोक सेवा आयोगों को एक मंच प्रदान करता है। इसमें सम्मिलित होने वाले आयोग के प्रतिनिधियों के द्वारा भर्ती प्रक्रियाओं से संबंधित सुधारों के संबंध में अपने अनुभव साझा किए जाते है। वर्तमान में इस समिति में संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं 9 राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष सदस्य है।
डाॅ..राठौड़ ने बताया कि 7 जनवरी को आयोजित होने वाली इस बैठक में भर्ती परीक्षाओं के संचालन, आयोगों की कार्यप्रणाली तथा नवाचारों के संबंध में चर्चा की जाएगी। इस दौरान राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा किए गए विभिन्न नवाचारों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। ऑनलाइन परीक्षा के प्रावधान को कैसे लागू किया जाए इस पर भी बैठक में चर्चा कर संभावनाएं तलाशी जाएगी।
डाॅ.. राठौड ने बताया कि बैठक में ई-गर्वनेंस, सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ाने, आयोगों के कार्य व्यवहार में एकरूपता, समन्वय स्थापित करने तथा समयबद्ध, पारदर्शी व निष्पक्ष कार्य प्रणाली के संवर्धन पर भी चर्चा की जाएगी।

बैठक में सम्मिलित होंगे 10 राज्यों के आयोग
स्टैंडिंग कमेटी बैठक की मेजबानी राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा की जा रही है। बैठक में गुजरात, गोआ, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश व उत्तर प्रदेश के राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा केरल लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष विशिष्ट आमंत्रित सदस्य के तौर पर सम्मिलित होंगे।

ऑनलाइन परीक्षा समय की आवश्यकता
डाॅ.. राठौड ने कहा कि बदलते समय में ऑनलाइन परीक्षा की शुरुआत करनी ही होगी। इसके पहले चरण में ऑनलाइन आवेदन, ई-पेमेंट आदि की शुरुआत तो राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा पूर्व में ही की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि राजस्थान लोक सेवा आयोग तकनीकी नवाचारों में सदैव अग्रणी रहा है। वर्ष 2013 में आयोग द्वारा वर्णनात्मक उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन हेतु ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली का अभिनव नवाचार किया गया। इस प्रणाली से न केवल मूल्यांकन में लगने वाले समय में कमी आई अपितु मूल्यांकन प्रक्रिया की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।
डाॅ.. राठौड ने बताया कि वर्ष 2016 में आयोग द्वारा ऑनलाइन माध्यम से सर्वाधिक परीक्षाओं का आयोजन किया गया था। अब ऑनलाइन परीक्षा की दिशा में और आगे बढ़ने की बारी है। हालांकि, इसमें विभिन्न समस्याएं भी हैं। कंप्यूटर लैब की सुविधा, सिक्योरिटी, कम्प्यूटर आदि से युक्त कॉलेजों की उपलब्धता आदि पहलुओं को भी इसमें ध्यान में रखना होगा। इसके अतिरिक्त अभ्यर्थियों का ऑनलाइन माध्यम से परीक्षा में सहज होना भी आवश्यक है। इसलिए धीरे-धीरे इस दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। ऐसे में इसकी शुरुआत छोटी परीक्षाओं से ही करनी होगी। भविष्य में इसकी विस्तृत कार्य योजना बनाकर एवं अन्य भर्ती ऐजेंसीयों की कार्यप्रणाली के गहन अध्ययन के बाद ही इस पर विचार किया जा सकेगा।

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