नई दिल्ली, 27 जून 2022: अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस की पूर्व संध्या पर विश्वव्यापी गैर-आर्थिक लाभ संगठन वाधवानी फाउंडेशन और एसएमई पर केंद्रित इसकी इनीशिएटिव वाधवानी एडवांटेज ने एमएसएमई के लिए सुव्यवस्थित सहयोग की मांग की है। महामारी के बाद के कठिन दौर में छोटे व्यवसायों को बाजार की बदलती जरूरतों के अनुकूल बनने, प्रोडक्ट लाइनों के प्रति आश्वस्त रहने और मूल्य की प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए इस मांग को पूरा करना जरूरी है।
आज कम लागत पर वित्तीयन प्राप्त करने का मुख्य स्रोत डिजिटल माध्यम है। इसलिए एसएमई को डिजिटल कौशल प्राप्त करना होगा जिसके बिना कारोबार बढ़ाने की संभावना समाप्त हो जाएगी। एमएसएमई को डिजिटल होने की दिशा में कार्मिकों का कौशल बढ़ाना और नया कौशल सीखने का अवसर देना जरूरी है ताकि वे अधिक से अधिक सप्लायरों और ग्राहकों से आसानी से संपर्क करें, आसानी से भुगतान सुनिश्चित करें और बाजार में पहुंच और पहचान बढ़ाएं। इस तरह मैन्युअल कार्य की अक्षमताओं को दूर कर वे बड़े पैमाने पर कारोबार कर पाएंगे।
यह भी आवश्यक है कि अति लघु उद्यम (63 मिलियन एसएमई में लगभग 95 प्रतिशत के साथ बहुत बड़ी हिस्सेदारी) छोटे उद्यम में विकसित हों और फिर छोटे से मध्यम एसएमई बनें। वाधवानी फाउंडेशन के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर – इंडिया/एसई एशिया संजय शाह ने बताया, “भारत में एमएसएमई सर्वाधिक (111 मिलियन) रोजगार और देश के सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इनकी संख्या 63 मिलियन है। महामारी के बाद के कठिन दौर में एमएसएमई को सुव्यवस्थित सहयोग को बढ़ावा मोटे तौर पर डिजिटलीकरण से ही मिलेगा। इस तरह सहयोग का बड़ा इकोसिस्टम, सप्लायरों और ग्राहकों का बड़ा आधार तैयार होगा। भुगतान व्यवस्था भी बेहतर होगी जिससे कारोबार के तीव्र विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। वाधवानी एडवांटेज छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) को अहम् सहयोग दे रहा है। यह बड़े एसएमई के लिए विकास पर केंद्रित प्रोग्राम और छोटे एसएमई को बड़े पैमाने पर काम करने योग्य बनाने के लिए डीआईवाई (डू-इट-योरसेल्फ) प्रोग्राम पेश करता है। दोनों प्रोग्राम को अधिक कारगर बनाने के उद्देश्य से एसएमई के लिए वर्चुअल हेल्पडेस्क सहायता दी जाती है। इसके अलावा हम वाधवानी एडवांटेज कम्युनिटी प्लेटफॉर्म भी लॉन्च कर रहे हैं जिसका मकसद पीयर-टू-पीयर नेटवर्किंग के लिए एक एसएमई सोशल नेटवर्क देना है और यह उन्हें सलाहकारों और ग्राहकों से जोड़ेगा।’’
एमएसएमई के विकास में बाधक कई चुनौतियां है जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी, पूंजी सुलभतया नहीं मिलना, उत्पादन क्षमता में कमी और इनोवेशन की कमी। परिणामस्वरूप 99 प्रतिशत व्यवसाय सही विकास नहीं कर पाते हैं और अपने जीवन चक्र में अति लघु उद्यम बने रहते हैं जबकि उनमें विकास की बड़ी क्षमता है।
अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 2022 की पूर्व संध्या पर वाधवानी फाउंडेशन के तहत कार्यरत वाधवानी एडवांटेज के कार्यकारी वीपी समीर साठे कहते हैं, “भारतीय एमएसएमई उड़ान भरने के लिए तैयार हैं। उनमें 2 गुना-10 गुना तक बढ़ने की क्षमता है। वाधवानी फाउंडेशन में हम उनकी तीव्र प्रगति के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए हमारे यूनिक मॉडल में बाहर से उपयुक्त सलाह देने, पीएमओ और सब्सिडी के साथ वित्तीयन में सहयोग, प्रोडक्टाइज्ड आईपी और एक प्रस्तावित सामुदायिक प्लैटफॉर्म का प्रावधान है। इस तरह एसएमई अपने इकोसिस्टम से जुड़ने में सक्षम होंगे जिससे उनकी पूरी व्यवस्था में बदलाव आएगा।’’
एसोचैम-क्रिसिल के शोध के अनुसार भारतीय एमएसएमई 2022 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में 15 प्रतिशत से 17 प्रतिशत की वृद्धि के साथ अच्छी वापसी करेंगे यह उम्मीद है। इसलिए यह जरूरी है कि एमएसएमई क्षेत्र को मजबूती से समर्थन मिले और स्थिरता बनी रहे।