-निर्ममता से हुई हत्या को लोमहर्षक, दिल दहलाने वाली और नितांत बर्बरतापूर्ण घटना बताया
-धमकियां मिलने के बाद भी उसे समुचित सुरक्षा व्यवस्था मुहैया नहीं कराना पुलिस की नाकामी का प्रमाण
-हत्या का आरोपी पाकिस्तान से प्रशिक्षण लेकर आया, फिर भी प्रदेश का खुफिया तंत्र सोया रहा
-राजनेताओं की सीआईडी कराने वाले गहलोत को आखिर इस मामले में पूरी तरह फेल हो गए

देवनानी ने जारी बयान में कहा, उदयपुर की घटना से यह साफ हो गया है कि प्रदेश की पुलिस और इंटेलीजेंस पूरी तरह फेल रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब कन्हैयालाल ने धमकियां मिलने की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी, तो पुलिस ने उसे समुचित सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध क्यों नहीं कराई। इससे पुलिस की नाकामी साबित हो गई है।
देवनानी ने कहा कि अब तो यह भी जानकारियां सामने आ रही हैं कि कन्हैयालाल की हत्या करने वाला शख्स पाकिस्तान से प्रशिक्षण लेकर आया था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब वह पाकिस्तान से प्रशिक्षण लेकर आया, तो प्रदेश का खुफिया तंत्र क्या कर रहा था, क्या उसे इस बात की तनिक भी जानकारी नहीं मिली। यदि नहीं मिली, तो क्यों और इसके लिए जिम्मेदार कार्मिकों व अधिकारियों के खिलाफ सरकार ने अभी तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं की है।
देवनानी ने कहा कि वैसे तो मुख्यमंत्री गहलोत अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों और विपक्षी नेताओं की सीआईडी करवाते हैं, उनके पीछे खुफिया तंत्र को हमेशा सक्रिय रखते हैं। लेकिन वे प्रदेश की कानून-व्यवस्था बनाए रखने में खुफिया तंत्र को बिल्कुल भी उपयोग नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार वोटोें की राजनीति के चक्कर में हमेशा से तुष्टिकरण की नीति अपनाए रही है। उदयपुर की घटना भी इसी तुष्टिकरण की नीति का ही परिणाम है।
देवनानी ने कहा कि करौली, जोधपुर, भीलवाड़ा, अलवर आदि जगहों पर भी जो साम्प्रदायिक दंगे हुए, वह भी सरकार की तुष्टिकरण नीति के ही नतीजे थे। इसके बावजूद सरकार ने कोई सबक नहीं सीखा। देवनानी ने कहा कि सरकार को उदयपुर की घटना की गंभीरता और गहराई से जल्द से जांच कराकर आरोपियों को कोर्ट से कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।