अपने अस्तित्व के स्थूल स्वरूप की वैश्वानर अवस्था को जानकर इसमें व्याप्त प्राण के तेजस को प्रकट करना और उसे विस्तार देकर बुद्धि की प्रज्ञा से आध्यात्मिक विकास करना ही योग है योग से स्वयं को जानने की प्रक्रिया श्वास पर अपने ध्यान को केंद्रित करने से शुरू होती है और फिर यह सजगता शारीरिक और मानसिक परिवर्तन के रूप में दृष्टिगोचर होती है। उक्त विचार विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी राजस्थान के प्रांत कार्यपद्धति प्रमुख डॉ. स्वतंत्र शर्मा ने अजमेर क्षेत्रीय माहेश्वरी सभा द्वारा विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा अजमेर के सहयोग से आनासागर लिंक रोड स्थित शिवाजी उद्यान में संचालित किए जा रहे योग एवं ध्यान सत्र के प्रथम दिन अभ्यास कराते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने बताया कि आज 15 साल से 70 साल तक का व्यक्ति पीठ एवं गर्दन दर्द से पीड़ित है जिसे आधुनिक विज्ञान टेक्स्ट नैक डिजीज कहा जाता है और इसका कारण गलत तरीके से बैठना और मोबाइल पर चैटिंग और गेमिंग है। इस रोग को अन्य तरीकों से दूर नहीं किया जा सकता है। केवल योगाभ्यास में सूक्ष्म व्यायाम एवं शिथिलीकरण इत्यादि के अभ्यास से ही हम शरीर की अनावश्यक जकड़न और कसावट को दूर कर सकते हैं। सत्र प्रतिदिन प्रातकाल 6.00 से 7.30 तक संचालित हो रहा है।
आज के अभ्यास में श्वसन अभ्यास, सूक्ष्म व्यायाम तथा क्रीडा योग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विवेकानंद केंद्र के नगर संचालक डॉ. श्याम भूतड़ा, रामकृष्ण विस्तार के संचालक दिनेश नवाल, योग शिक्षक शशांक बजाज, रामकृष्ण विस्तार प्रमुख कुशल उपाध्याय, नगर प्रमुख भारत भार्गव उपस्थित थे। सत्र की व्यवस्था में अजमेर क्षेत्रीय माहेश्वरी सभा के राकेश झंवर, मुरारी तोषनीवाल, गौरव मिलक आदि ने अपना सहयोग प्रदान किया।
नगर प्रमुख भारत भार्गव ने बताया कि सत्र का समापन 7 मई को किया जाएगा। सत्र के अंत में सभी प्रतिभागियों को संस्था की ओर से आंवले का जूस पिलाया गया।