संघनायक गुरुदेव श्री प्रियदर्शन मुनि जी महरासा ने फरमाया कि आप भगवान धर्मनाथ के जीवन से धर्म की मिली शिक्षाओं को सुन रहे थे। हमें भी अपने जीवन में धर्म को स्वीकार करना है। और पापों का त्याग करना है।
कांच का टुकड़ा धूप में रखने पर जल्दी गर्म हो जाता है मगर असली हीरे को अगर धूप में रखा जाए तो वह जल्दी गर्म नहीं होता है। उसी प्रकार परमात्मा भी हमें समझा रहे हैं कि आपका जीवन कांच के टुकड़े के समान है या असली हीरे जैसा।
अगर आप में बात-बात में उबल पड़ना, रोना धोना करना, मुंह को फूला लेना,आदि क्रोध के लक्षण है तो जीवन कांच के टुकड़े के समान कहा जाएगा।मगर आपमे समता,धैर्य,और सहनशीलता है तो उस समय आपका जीवन असली हीरे के समान कहा जायेगा।
18 पापों में छटा पाप है क्रोध। एक छोटा बच्चा भी क्रोध को अनुभव कर लेता है कि सामने वाला व्यक्ति को क्रोध आ रहा है। क्रोध के कारण तनाव, ब्लड प्रेशर, व ब्रेनहेमरेज जैसी बीमारियां उत्पन्न हो जाती है।
न्यूयॉर्क में एक प्रयोग हुआ उसमें एक अत्यंत क्रोधी व्यक्ति के खून का इंजेक्शन एक खरगोश को लगाया गया। कुछ देर बाद ही वह आवेग में आने लगा, पिंजरे से अपना सिर फोड़ने लगा, चक्कर काटने लगा और कुछ समय के अंदर तड़पते तड़पते उसने अपने प्राणों का त्याग कर दिया।पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में मालूम पड़ा कि वह खून उसके अंदर जाकर जहर में परिणत हो गया और उसकी दर्दनाक मृत्यु का कारण बन गया।
जिस प्रकार कितने ही मण दूध में नींबू के रस की दो-चार बूंद को डाल दो, तो वह दूध फट जाता है।कितने ही टन कचरे के ढेर में एक चिंगारी लगा दो, वह कचरा जलकर राख हो जाता है।वैसे ही यह कुछ समय का क्रोध है जो वर्षों से बने बनाए संबंधों को खराब कर देता है।
मैंने जेल के कुछ कैदियों के बारे में सुना था कि वह कैदी अपराध करने के बाद पछता रहे थे कि उस समय हमने अगर क्रोध नहीं किया होता या अपने आवेग पर नियंत्रण रख लिया होता,तो आज ऐसी नौबत नहीं आती।
क्रोध करने का परिणाम था कि संत के भाव में क्रोध की अवस्था में काल किया और गति बिगड़ते बिगड़ते चंदकौशिक सर्प के रूप में जन्म लेना पड़ गया।
अत:जो अपनी गति को बिगाड़ दे, ऐसे क्रोध रूपी पाप से हमें बचने का प्रयास करना है
।अगर ऐसा प्रयास वह पुरुषार्थ रहा तो यत्र तत्र सर्वत्र आनंद ही आनंद होगा।
श्रीमती शिल्पा जी खटोड़ ने 25 उपवास एवं जामोला से बंब परिवार ने 8 की तपस्या के प्रत्याखान किया ।
धर्म सभा को पूज्य श्री सौम्यदर्शन मुनि ने भी संबोधित किया ।
धर्म सभा का संचालन हंसराज नाबेड़ा ने किया।
पदमचंद जैन