*लोकतंत्र में चुनाव और मुफ़्तख़ोरी*

आजकल चुनावों में लुभाने के लिए मुफ्त योजनाओं की गारंटी दी जा रही है।
मुफ़्त दवा, मुफ़्त जाँच, लगभग मुफ़्त राशन, मुफ़्त शिक्षा, मुफ्त विवाह, मुफ्त जमीन के पट्टे, मुफ्त मकान बनाने के पैसे, बच्चा पैदा करने पर पैसे, बच्चा पैदा नहीं (नसबंदी) करने पर पैसे, स्कूल में खाना मुफ़्त, मुफ्त बिजली 1000-1500 रुपए महीना, मुफ्त तीर्थ यात्रा, मरने पर भी पैसे,

जन्म से लेकर मृत्यु तक सब मुफ्त । मुफ़्त बाँटने की होड़ मची है, फिर कोई काम क्यों करेगा ? देश का विकास मुफ्त में पड़े पड़े कैसे होगा?
पिछले दस सालों से ले कर आगे बीस सालों में एक एेसी पूरी पीढ़ी तैयार हो रही है या हमारे नेता बना रहे हैं, जो पूर्णतया मुफ़्त खोर होगी!

ये मुफ़्त खोरी की ख़ैरात कोई भी पार्टी अपने फ़ंड से नही देती। टैक्स दाताओं का पैसा इस्तेमाल करती है!

हम नागरिक नहीं परजीवी तैयार कर रहे हैं!
देश का अल्प संख्यक टैक्स दाता बहुसंख्यक मुफ़्त खोर समाज को कब तक पालेगा ?

जब ये आर्थिक समीकरण फ़ेल होगा तब ये मुफ़्त खोर पीढ़ी बीस तीस साल की हो चुकी होगी जिसने जीवन में कभी मेहनत की रोटी नही खाई होगी। हमेशा मुफ़्त की खायेगा! नहीं मिलने पर, ये पीढ़ी नक्सली बन जाएगी, उग्रवादी बन जाएगी, पर काम नही कर पाएगी!

*सोचने की बात है कि सरकारें कैसे समाज का, कैसे देश का निर्माण कर रही हैं ?*
राजनीति नहीं यह चिंतन का विषय है।

*स्कूलों में शिक्षकों की, अस्पतालों में चिकित्साकर्मियों की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। पटवारियों तथा अन्य विभागों कर्मचारियों की कमी नहीं रहेगी, बेरोजगारों को रोजगार देकर स्वाभिमान की, जिम्मेदारी की जिंदगी जीने के अवसर दिया जाएगा निर्बाध विद्युत सप्लाई, समुचितपेयजल सप्लाई होगी, दम तोड़ती रोडवेज को पुनः जीवित कर आम जनता को यातायात की सहूलियत के लिए बसों की व्यवस्था की जाएगी* ।
जनता से जुड़े इन चीजों की गारंटी देने वाले कोई राजनीतिक दल नज़र नहीं आते।
*बेहतर होता जनता के हाथों में मुफ्त का कटोरा पकड़ाने के बजाय उन्हें उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनने के, स्वाभिमान की जिंदगी जीने के लिए रोजगार केह अवसर दिऐ जाते।*

*हीरालाल नाहर पत्रकार*
*9929686902*

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