अजमेर की नब्ज पर पकड रखती एक रचना हाल ही सोषल मीडिया पर नजर आई। अफसोस कि उसके नीचे लेखक का नाम नहीं था। ऐसा प्रतीत होता है, जिसने भी इसे फॉरवर्ड किया, नाम हटा दिया। अज्ञात अजमेरीलाल को साधुवाद देते हुए माजरत के साथ यह रचना आपसे साझा कर रहा हूंः-
हे राम!
अजमेर पर
यकायक इतनी कृपा
पहले…
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष
अजमेर से…
और अब…
केंद्र में…
कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री
अजमेर से…
रुलाएंगे क्या प्रभु..?!
ऐसे तो ये लोग
मिलकर
अजमेर की
सारी की सारी
समस्याएं
हल कर देंगे!
अगर अजमेर में
रोज
जल वितरण
होने लगा
तो शहर
जलमग्न
हो सकता है प्रभु!
हमारी कुशलक्षेम
और
हमारी भावनाओं
के साथ
ऐसा खिलवाड़
ना करें प्रभु!
इन्होंने
बुलंद सड़क
के नीचे की सड़क
अगर सुधार दी
तो हम तो
उस पर
संतुलन ही नहीं
बना पाएंगे
मदार गेट
नया बाजार
पुरानी मंडी
केसर गंज…
कहीं इन स्थानों के
अतिक्रमण
ना हट जाएं प्रभु!
शहर सूना-सूना लगेगा
दुकानों के आगे
खड़े वाहन ही
बाजारों की
शोभा बढ़ाते हैं
ये वाहन
किसी भी
कीमत पर
नहीं हटने चाहिए प्रभु
सुनने में आया है
कि नालों की सफाई
की भी साजिश
रची जा रही है
अरे…
कोई एक-आध
समस्या तो
बनी रहने दीजिए
प्रभु
अगर…
वाकई
विकास हो गया
या
अच्छे दिन
आ गए
तो हमारा तो
सामाजिक
और
मानसिक संतुलन
ही बिगड़ जाएगा
प्रभु!
हमारा खयाल रखें…
हे राम!