युवा पीढ़ी के लिए संस्कृत : रोजगार, शोध और व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम

एम.डी.एस. विश्वविद्यालय में प्रारम्भ हुआ एम.ए. संस्कृत पाठ्यक्रम

30 जून तक ऑनलाइन आवेदन करके प्रवेश ले सकते हैं  

भारतीय ज्ञान-परम्परा और आधुनिक करियर का सशक्त संगम — कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल

प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल

महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में भारतीय ज्ञान-परम्परा, सांस्कृतिक चेतना एवं आधुनिक शिक्षा के समन्वय को नई दिशा देते हुए एम.ए. संस्कृत पाठ्यक्रम प्रारम्भ किया गया है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से इस पाठ्यक्रम में अधिकाधिक प्रवेश लेने का आह्वान करते हुए कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान-विज्ञान परम्परा, दर्शन, योग, आयुर्वेद, संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों की मूल आधारशिला है। वर्तमान समय में संस्कृत अध्ययन विद्यार्थियों के लिए रोजगार, शोध, तकनीकी अध्ययन एवं व्यक्तित्व विकास के व्यापक अवसर प्रदान कर रहा है।

कुलगुरु  प्रो. अग्रवाल ने कहा कि आज विश्व पुनः भारतीय ज्ञान परम्परा की ओर आकर्षित हो रहा है तथा संस्कृत भाषा उसकी मूल धुरी है। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, गीता, आयुर्वेद, ज्योतिष, योग एवं भारतीय दर्शन जैसे महान ग्रन्थ संस्कृत भाषा में रचित हैं। संस्कृत अध्ययन विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए उनमें तार्किक चिंतन, अनुशासन, सकारात्मक सोच एवं नैतिक जीवन मूल्यों का विकास करता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित व्याकरण विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति, भाषा कौशल, विश्लेषण क्षमता तथा अभिव्यक्ति को सशक्त बनाता है, जो आधुनिक प्रतिस्पर्धात्मक युग में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा है।

उन्होंने कहा कि संस्कृत का महत्व केवल पारम्परिक अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में भी इसकी उपयोगिता निरंतर बढ़ रही है। Artificial Intelligence, Computational Linguistics तथा Computer Science के क्षेत्र में संस्कृत की वैज्ञानिक संरचना एवं महर्षि पाणिनि के व्याकरण पर विश्व स्तर पर शोध किए जा रहे हैं। संस्कृत भाषा की तार्किक संरचना आधुनिक कम्प्यूटर विज्ञान एवं भाषा तकनीक के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जा रही है। यही कारण है कि आज संस्कृत अध्ययन विद्यार्थियों के लिए परम्परा और तकनीक के मध्य एक सशक्त सेतु बनकर उभर रहा है।

प्रो. अग्रवाल ने कहा कि एम.ए. संस्कृत पाठ्यक्रम विद्यार्थियों के लिए रोजगार एवं करियर निर्माण की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। संस्कृत विषय में अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी विद्यालयों में TGT एवं PGT शिक्षक, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में Assistant Professor, शोधकर्ता तथा NET/JRF के माध्यम से उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकते हैं। इसके अतिरिक्त UPSC एवं राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में संस्कृत एक प्रभावी Optional Subject के रूप में भी विद्यार्थियों को सफलता दिलाने में सहायक हो सकती है। अनुवाद, पांडुलिपि संरक्षण, भारतीय ज्ञान-परम्परा अध्ययन केन्द्रों, शोध संस्थानों एवं सांस्कृतिक संगठनों में भी संस्कृत विद्यार्थियों के लिए अनेक अवसर उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री ने भी अनेक अवसरों पर संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता एवं आधुनिक उपयोगिता को रेखांकित करते हुए संस्कृत को भारत की पहचान एवं प्रगति की भाषा बताया है। भारतीय ज्ञान-विज्ञान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए संस्कृत अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। ऐसे समय में महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय द्वारा प्रारम्भ किया गया एम.ए. संस्कृत पाठ्यक्रम विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन, समृद्ध पुस्तकालय सुविधा, शोधपरक वातावरण तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अकादमिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, संस्कृति एवं आधुनिक अवसरों से जोड़ने का कार्य करेगा।

उन्होंने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से आह्वान किया कि वे संस्कृत विषय को केवल एक पारम्परिक भाषा न मानकर इसे आधुनिक शिक्षा, करियर, व्यक्तित्व विकास एवं भारतीय संस्कृति के समग्र अध्ययन का सशक्त माध्यम समझें तथा महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के एम.ए. संस्कृत पाठ्यक्रम में प्रवेश लेकर अपने उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखें।

Leave a Comment

This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

error: Content is protected !!