आजमगढ। दस साल से घर में कैद महिला व उसके पुत्र को रविवार को मायके वालों ने किसी तरह बाहर निकाला और साथ ले गए। वहां महिला ने जबर्दस्त हंगामा किया। वह वापस जाने की जिद पर अड़ी रही जिसपर मायके वाले उसे दोबारा वहीं छोड़ने पर राजी हो गए।
यह घटना जिले की फरिहां गांव की है। महिला शमा की शादी वर्ष 2000 में गांव के इसहाक से हुआ। दो साल बाद उसने एक पुत्र अरसलान को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के छह माह बाद इसहाक ने शमा को तलाक दे दिया, लेकिन शमा ने उसे कबूल नहीं किया और बच्चे के साथ घर में खुद को कैद कर लिया। इसके बाद उसके मायके तोवा गांव के लोगों ने कई बार पंचायत की लेकिन वह जिद पर अड़ी रही।
उसका पति दूसरी शादी कर फरहाबाद में रहने लगा। गांव की ही माजिदा उसे यदा-कदा भोजन आदि पहुंचा देती तो मां बेटे खा लेते थे। शमा के घर का बिजली कनेक्शन भी पांच साल पहले कट गया था। जागरण ने 19 अप्रैल 2012 के अंक में इस गली में रहते हैं दो उदास चेहरे शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। दूसरे दिन निजामाबाद एसडीएम व तहसीलदार ने काफी प्रयास किया, लेकिन वह घर से बाहर नहीं निकली।
रविवार को अपराह्न करीब 1.30 बजे शमा परवीन का भाई सलीम, रहमान और मां हदीशुननिशा फरिहां गांव पहुंचे और पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़कर मां-बेटे को बाहर निकाला गया। उसे किसी तरह निजामाबाद क्षेत्र के भटवा ले जाया गया। यहां भी वह जिद पर अड़ी थी कि वहां न रहकर अपने घर फरिहां वापस जाएगी। मजबूर होकर परिवार के लोग इसके लिए तैयार हो गए हैं।