रेलवे में सुरक्षा व ट्रैकिंग का नया तरीका
वर्तमान में ट्रैकमेन रेल दरार, वेल्ड फ्रैक्चर या गायब फिटिंग आदि जैसे ट्रैक पर असामान्यताओं का पता लगाने पैदल ट्रैक पर जाता है । वर्तमान में यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ भी नहीं है कि वह वास्तव में उसने पूरे ट्रैक की लंबाई पर जाँच की हैं या नहीं । इसी तरह ट्रैक का निरीक्षण करने के लिए ट्रॉलियों का उपयोग किया जाता है।
रेलवे में गश्त के वर्तमान तरीके का संक्षिप्त परिचय
रेलगाड़ियों के सुरक्षित ट्रेन संचालन के लिए रेलवे में सभी परिस्थितियों में ट्रैक के गश्त की व्यवस्था है।
1) सामान्य समय में कुंजीमैन द्वारा पेट्रोलिंग – नियमानुसार प्रत्येक कुंजीमैन को ट्रैक में किसी भी क्षति / कमी की पहचान करने के लिए उसके पूरे बीट अनुभाग का (लगभग 6 किलोमीटर तक) निरीक्षण करना चाहिए ताकि रेलवे या वेल्ड में फ्रैक्चर का पता लगाया जा सके इसके लिए कुंजीमैन सर्दियों में सुबह 5 बजे गश्त शुरू कर देते हैं।
2) असामान्य वर्षा या तूफान के दौरान गेंग द्वारा गश्ती – दिन या रात के दौरान असामान्य वर्षा या तूफान की स्थिति में, तूफान से प्रभावित क्षेत्र में ट्रैक पर गश्त का आयोजन किया जाता है।
3) सर्दियों के दौरान नाइट गश्त – सर्दियों के दौरान, रेल के अस्थायी रूप तापमान में भिन्नता के कारण रेल पटरी में संकुचन होता हैं, जिसके कारण रेल या वेल्ड में फ्रैक्चर की संभावना होती है। ऐसे में रात्रि गश्त दल नियुक्त किया जाता है जो डबल लाइन ट्रैक पर 1 किमी और सिंगल लाइन ट्रैक पर 2 किलोमीटर के दायरे में रेल या वेल्ड में फ्रैक्चर का पता लगाने के लिए गश्त करते है ।
4) गर्म मौसम में गश्त – रेल तापमान में वृद्धि के दौरान रेल पटरी में वृद्धि की संभावना होती है जिसके कारण कमजोर स्थानों पर रेल के बकलिंग की संभावनाएं हैं। रेल के बकलिंग का पता लगाने के लिए गर्म मौसम गश्ती दल को 1 या 2 किमी की हद में तैनात किया जाता है । पेज 1……….
रेलगाड़ियों के सुरक्षित चलने के लिए पूरे वर्ष के दौरान ट्रैक के गश्त की आवश्यकता होती है और बहुत महत्वपूर्ण है।
वर्तमान में गश्त की व्यवस्था पूरी तरह से गैगमेन पर निर्भर है और मानव भागीदारी के कारण, कर्तव्यों में ढिलाई की संभावना होती है।
पूर्व में देखा गया है की गश्त में सतर्कता के कारण दुर्घटनाओं में कमी आई तथा लापरवाही बरतने पर अधिकांश दुर्घटनाएं हुई ।
इसलिए गश्त के महत्व और तकनीक के साथ-साथ नवीनतम प्रौद्योगिकी की मदद से पैट्रोलमैन की निगरानी किया जाना समय की जरुरत भी है।
ट्रैक गश्त की निगरानी के लिए जीपीएस तकनीक के बारे में जानकारी देते हुए मंडल रेल प्रबंधक श्री पुनीत चावला के ने बताया कि अजमेर मंडल द्वारा अपने सम्पूर्ण ट्रेक पर “वास्तविक समय आधारित जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम” द्वारा ट्रेकमेन के वास्तविक स्थिति की निगरानी के लिए लागू करने जा रहा है।
जीपीएस तकनीक के बारे में संक्षिप्त परिचय
जीपीएस या ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम उपग्रह द्वारा प्रदत एक नेटवर्क है जो अंतरिक्ष में अपनी स्थिति का सटीक विवरण वापस पृथ्वी पर भेजता है। सिग्नल जीपीएस रिसीवर्स द्वारा प्राप्त किए जाते हैं, जैसे नेविगेशन डिवाइस, जो व्यक्ति या वाहनों की सटीक स्थिति, गति और समय की गणना करने के लिए उपयोग किया जाता है।
इस प्रणाली के फायदे निम्नानुसार हैं: –
• वास्तविक समय जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से ट्रेन दुर्घटनाओं से बचने के लिए ट्रैक निरीक्षणों की प्रभावी निगरानी हेतु लाभकारी है।
• रेल पथ की समय पर किसी प्रकार की बाधा की पहचान कर मरम्मत की जा सकेगी
• ट्रेन दुर्घटना से बचाव व आसान संचालन सुनिश्चित करना
• रियल-टाइम मॉनिटरिंग और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम को गूगल के साथ एकीकृत किया गया है और मोबाइल उपकरणों और कंप्यूटरों के माध्यम से एक्सेस किया जायेगा , जो ट्रैक मेन, होम गार्ड व पुश ट्रॉलियों की स्थिति व सटीक स्थान की जानकारी देंगे ।
• सर्वर की सहायता से संपूर्ण डेटा और सरल तरीके से उचित विश्लेषण उपलब्ध होगा ।
उन्होंने कहा की वर्तमान में, रेलवे ने मानव रहित समपार फाटकों पर होम गार्ड (गेट मित्र ) तैनात किये गए है। सड़क के वाहनों को रेल लाइन क्रॉसिंग पर पहुंचने से रोकने के लिए होम गार्ड की उपलब्धता महत्वपूर्ण है । इस सिस्टम द्वारा मंडल के मानव रहित समपार फाटकों पर तैनात होम गार्ड की वास्तविक स्थिति व समय द्वारा निगरानी सुनिश्चित हो सकेगी ।जीपीएस लगने के बाद अजमेर मंडल के अधिकारी अपने ऑफिस में बैठकर ट्रैक चैकिंग के लिए चल रही पुश ट्रॉली की निगरानी कर सकेंगे।अजमेर मंडल पर कुल 406 जीपीएस डिवाइस ऑपरेट की जाएँगी
वरिष्ठ जनसंपर्क निरीक्षक अजमेर