अध्यापक ही विद्यार्थी के मस्तिष्क में सकारात्मक सोच पैदा कर सकता है

अजमेर 12 सितम्बर। शिक्षाविद एवं विचारक हनुमान सिंह राठौड ने शिक्षकों का आह्वान किया कि विद्यार्थी को उसके जीवन का उद्देश्य और स्पष्ट दिशा बताते हुए उसकी प्रतिभा को इस तरह तराशा जाये कि देश व समाज के लिए उपयोगी हो। अध्यापक ही विद्यार्थी के मस्तिष्क में सकारात्मक सोच, सृजनशीलता और सेवा का भाव पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि अर्न्तनिहित क्षमताओं का प्रगटीकरण ही शिक्षा है और प्रगटीकरण का विसर्जन का मतलब ज्ञान बांटना है। अर्न्तनिहित क्षमता व्यक्ति की स्वयं की है, जबकि कला के पारखी अर्थात् शिक्षक और वातावरण अर्न्तनिहित क्षमता निखारने का कार्य करते है। लक्ष्मी को एकत्रित करने मंे व्यक्ति को सुख का अनुभव होता है और इसे खर्च करने में व्यक्ति दुखी होता है, जबकि शिक्षा को ग्रहण करने और एकत्रित करने में खुशी मिलती है और इसको बांटने पर व्यक्ति को अतिरेक सुख का अहसाह होता है।

श्री राठौड बुधवार को सावित्री सीनियर सैकण्डरी स्कूल में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राज्यस्तरीय सृजनात्मक प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि जहाँ कला का अपमान होता है वहाँ आतंकवाद जन्म लेता है। कला निर्माण करती है और आतंकवाद विध्वंस करता है। उन्होंने कहा कि छोटी उम्र के स्कूली विद्यार्थी की अंकुरित हो रही विधा को इन सृजनात्मक प्रतियोगिताओं के माध्यम से उभारने के लिए राजस्थान बोर्ड ने इस दिशा में एक ठोस कदम बढाया है। प्रतिभाओं को जब आवरण और मंच नहीं मिल रहा हो तब बोर्ड ने ब्लॉक स्तर से लेकर राज्य स्तर तक एक विशाल मंच पर विभिन्न क्षेत्रों के नवअंकुरों को समाज के सामने लाने की जो महत्ती पहल की है वो अनुकरणीय है।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान बोर्ड की वित्तीय सलाहकार श्रीमती आनन्द आशुतोष ने कहा कि विद्यार्थी में छुपी प्रतिभा के लिए उसे छोटी उम्र में मंच मुहैया कराना जरूरी है। शिक्षक को ऐसे विद्यार्थियों को समाज के आगे लाना होगा जो मौके और मंच के अभाव में जिनकी प्रतिभायें दब गई हो। कर्मशील और सर्वगुण सम्पन्न युवाओं का निर्माण करना शिक्षकों का ही दायित्व है। भारत का टेक्नोलॉजी और संचार प्रौद्योगिकी में विश्व में डंका बज रहा है परन्तु बचपन पर भी टेक्नोलॉजी का प्रभाव हावी हो रही है। बच्चा छोटी उम्र से इन्टरनेट और मोबाइल के जाल में फंसकर गायन, चित्रकला और आउडोर गेम्स जैसी विधाओं से दूर हो गया है। राजस्थान बोर्ड बचपन की इन्हीं विधाओं को विद्यार्थियों में जीवन्त करने के लिए कटिबद्ध है। इसी दृष्टि से बोर्ड द्वारा अपने से संबद्ध लगभग 30 हजार विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर गायन, निबन्ध, चित्रकला, आशुभाषण और क्विज जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया।

निबन्ध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रा.बा.उ.मा.विद्यालय, हनुमानगढ जंक्शन की सुश्री मायारानी द्वितीय स्थान पर गुलाबचंद मेवाडी रा.उ.मा.विद्यालय छोटीसादडी (प्रतापगढ़) की सुश्री माया प्रजापत व तृतीय स्थान पर रा.आदर्श मोइनिया उ.मा.विद्यालय, अजमेर के लोकेन्द्र सिंह शेखावत रहे। आशुभाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर प्रेम पब्लिक मा.विद्यालय, भुसावर (भरतपुर) के अभिषेक शर्मा द्वितीय स्थान पर रा.बा.उ.मा.विद्यालय, छाबड़ा (बारां) की सुश्री शिवानी भार्गव और तृतीय स्थान पर रा.नूतन उ.मा.विद्यालय, बांसवाड़ा की सुश्री फुहार व्यास रही। क्विज प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रा.उ.मा.विद्यालय, अरनोद (प्रतापगढ़) के आशीष तेली द्वितीय स्थान पर आदर्श रा.महारावल उ.मा.विद्यालय, डूँगरपुर के शुभम् पांड्या तथा तृतीय स्थान पर रा.उ.मा.विद्यालय, मोयणा, मसूदा (अजमेर) के नरेन्द्र सिंह रावत रहे। चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रा.उ.मा.विद्यालय, गेटोर, जगतपुरा (जयपुर) के राहुल बैरवा द्वितीय स्थान पर श्री गांधी उ.मा.विद्यालय, गुलाबपुरा (भीलवाड़ा) की सुश्री अंजली शर्मा और तृतीय स्थान पर रा.उ.मा.विद्यालय, मोयणा, मसूदा (अजमेर) के संजय सिंह रहे। एकलगीत प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर सेठ मुरलीधर मानसिंह रा.बा.उ.मा.विद्यालय, भीलवाड़ा की सुश्री सेजल वर्मा द्वितीय स्थान पर सेठ संपतराम दुगड रा.उ.मा.विद्यालय, सरदारशहर (चुरू) के प्रियांश गौड और तृतीय स्थान पर रा.उ.मा.विद्यालय, वैशालीनगर, अजमेर के तनवीर रहे।

समारोह में बोर्ड के निदेशक (गोपनीय) जी.के. माथुर, निदेशक (शैक्षिक) डॉ. प्रताप भानु और उपनिदेशक (जनसम्पर्क) राजेन्द्र गुप्ता भी उपस्थित थे। शैक्षिक शाखा के सुनील तिवारी ने प्रतियोगिता का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। अन्त में सावित्री बालिका सीनियर सैकण्डरी स्कूल प्राचार्या श्रीमती लीलमणी गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
उप निदेशक (जनसम्पर्क)

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