अजमेर मंडल द्वारा हेरिटेज वॉक का आयोजन

भारत सरकार के रेल मंत्रालय द्वारा रेलवे की ऐतिहासिक धरोहरों से सामान्य नागरिकों को अवगत करवाने के उद्देश्य से माह फरवरी 2019 को हेरिटेज माह के रूप में मनाया जा रहा है| इसी क्रम में आज दिनांक 24.2.2019 को सुबह 10:00 बजे से 12:00 बजे तक मंडल कार्यालय अजमेर में धरोहर पद यात्रा (हेरिटेज वॉक) का आयोजन किया गया | इस दौरान मंडल कार्यालय आमजन, रेल कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों एवं स्कूल के बच्चों के लिए अवलोकन हेतु खुला रखा गया, जिन्होंने इस अवसर का भरपूर लाभ उठाते हुए इस एतिहासिक इमारत का अवलोकन किया और महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की और फोटोग्राफ लिए | इस अवसर पर अपर मंडल रेल प्रबंधक श्री मनीष गुप्ता, वरिष्ठ मंडल पर्यावरण व गृहसज्जा प्रबन्धक श्री संतोष कुमार विजय सहित मंडल के अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे |
इसी प्रकार रेलवे स्टेशन अजमेर पर भी प्रातः 9.00 बजे से 9.30 बजे तक रेल यात्रिओं, रेल कर्मचारिओं व उनके परिजनों, कुली तथा वेंडर ने हेरिटेज वाक में भाग लिया |
उल्लेखनीय है की मंडल कार्यालय अजमेर लगभग 135 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत जिसका रेलवे के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान है |
मंडल कार्यालय, अजमेर का 134 वर्ष पुराना इतिहास
मंडल कार्यालय, अजमेर का विशाल भवन 1884 से इतिहास को अपने में समेटे हुए है। यह शहर की उन कुछ बड़ी इमारतों में शामिल है जिनका निर्माण यदि नहीं हुआ होता तो अजमेर पिछड़े शहरों में शुमार किया जाता। इसके निर्माण के पीछे अंग्रेजों की भूमिका बेशक सराहनीय है। इस मंडल कार्यालय की विशाल इमारत की योजना 1878 में तत्कालीन अंग्रेज अफसर एडवर्ड ब्रासफोर्ड ने बनाई थी। अजमेर में पहला ट्रैक रेवाड़ी से 01 अगस्त, 1875 में पहुचा और जल्द ही ततकालीन सरकार को अजमेर के महत्व का अंदाजा हो गया और इस तरह वर्तमान मंडल कार्यालय के निर्माण की कल्पना साकार होने लगी। वर्ष 1879 रेलवे वर्कशॉप आगरा से अजमेर लाया गया।
राजपूताना मालवा रेलवे के समय के बाद वर्तमान मंडल कार्यालय की इस भवन को पूर्व में इंजीनियर इन चीफ कार्यालय तथा बाद में जीएलओ (जनरल लाइजन आफिस) के नाम से पुकारा जाने लगा। इस विशाल काय भवन का निर्माण मई, 1881 में प्रारंभ हुआ तथा दिसम्बर, 1884 मे पूर्ण हुआ। इस भवन की भव्यता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इसकी लागत उस समय 3.5 लाख रूपये आई थी। राजपूताना मालवा रेलवे के समय कर्नल एफ एस स्पेंटन डायरेक्टर जनरल रेलवे तथा मेजर डब्ल्यू एस एस बिसेट, मैनेजर राजपूताना मालवा रेलवे की उपस्थिति में कर्नल ई आर सी ब्रासफोर्ड सीएसआई एजेन्ट के गर्वनल जनरल के द्वारा 08 मार्च, 1881 को इस भवन की नीव रखी गई। इस भवन की डिजाईन बीडब्ल्यू ब्लड एसक्वायर (सुपरिटेंडेंट ऑफ़ वे एंड वर्कस) तथा केप्टन एच एच कॉल के द्वारा तैयार की गई थी। पश्चिम रेलवे के अंतर्गत 15 अगस्त, 1956 को ततकालीन मुख्य मंत्री श्री हरिभाऊ उपाध्याय द्वारा अजमेर मंडल का शुभारंभ किया गया था। दिनांक 1.8.1956 से दिनांक 13.2.1979 तक इसे मंडल अधीक्षक कार्यालय और उसके पश्चात अर्थात दिनांक 14.2.1979 से अब तक यह भवन मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, अजमेर मंडल के रूप में संचालित है।
इस भवन की खासियत है कि सभी चीजों का सामान्य अनुपात की तुलना में काफी बड़ा होना। भवन के अंदर आते ही सबसे पहले बड़ी और चैड़ी सिढि़या इस तकनीक के बनाई गई है कि बार बार चढ़ने और उतरने पर भी थकान का आभास नहीं होता। भवन के अंदर कमरे भी इतने बड़े और उच्चे बनाये गये है कि सर्दी में गर्म व गर्मी में ठंडे रहते है। इस भवन पर अजमेर शहर वासियों को गर्व है क्योंकि इसका आर्कीटेक्ट बेजोड़ होने के साथ साथ विशाल भी है।
वरिष्ठ जनसंपर्क निरीक्षक, अजमेर

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