यूनिवर्सल डिजाइन ऑफ लर्निंग विशय पर राजकीय अध्यापकांे एवं प्रधानाध्यापकों की कार्यषालाएंे सम्पन्न

अजमेर दिनंाक 13 फरवरी 2020 को राजस्थान महिला कल्याण मण्डल चाचियावास के द्वारा अजीम प्रेमजी फिलेनथ्रेपी इनिसिएटीव के सहयोग से अजमेर जिले के श्रीनगर व पीसांगन ब्लॉक व अजमेर तथा पुश्कर षहर के 150 राजकीय विद्यालयों के अध्यापकों व प्रधानाध्यापकों के लिये दिनांक 4 से 12 फरवरी 2020 तक एक-एक दिवसीय ‘‘यूनिवर्सल डिजाइन ऑफ लर्निंग व दिव्यांगों के सामाजिक समावेषन’’ विशय पर आमुखीकरण कार्यषालाओं का आयोजन संस्था परिसर में किया गया।
कार्यषालाओं का उद्देष्य बताते हुये संस्था की मुख्य कार्यकारी श्रीमती क्षमा आर. कौषिक ने बताया कि इन कार्यषालाओं के माध्यम से संस्था जिन दिव्यांग बच्चों के साथ षिक्षण-प्रषिक्षण कर विद्यालयों में प्रवेष करवाती है उनके सामाजिक समावेषन के लिये पैरवी कर रही है तथा साथ ही षिक्षको और प्रधानाध्यापकों को यूनिवर्ससल डिजाइन ऑफ लर्निंग (यू.डी.एल.) के माध्यम से एक ऐसी षिक्षण पद्धति से परिचय करवा रही है जो दिव्यांग और गैर दिव्यांग बच्चों के लिये समान उपयोगी है इसके उपयोग से सभी बच्चों के एक साथ षिक्षण-प्रषिक्षण दिया जा सकता है।
प्रषिक्षण के बारे में बताते हुये संस्था निदेषक श्री राकेष कुमार कौषिक ने कहा कि प्रथम चरण में संस्था ने अजमेर जिले के 150 अध्यापक व 150 प्रधानाध्यापक में से 133 अध्यापकोें एवं 60प्रधानाध्यपकांे का अभिमुखीकरण पूर्ण कर लिया है षेश रहे लोगों के लिये द्वितीय चरण आयोजित किया जाएगा। इसके पष्चात् जवाजा व मसूदा ब्लॉक के 300 अध्यापकों एवं प्रधानाध्यापकों हेतु कार्यषालाएं आयोजित की जाएगी।
प्रषिक्षण के दौरान अतिरिक्त जिला कलक्टर (षहर) अजमेर श्री सुरेष सिन्धी ने मुख्य अतिथि के षिरकत करते हुये अपने सम्बोधन में बताया कि दिव्यांग बच्चों के भी अन्य बच्चों के समान अवसर उपलब्ध करवाएं। अतिरिक्ति जिला परियोजना समन्वयक श्री दीपचन्द बुनकर ने अपने वक्तव्य मंे कहा कि समावेषी षिक्षा दिव्यांग बच्चों के लिए बेहतर विकल्प है, इसी प्रकार अतिरिक्त जिला षिक्षा अधिकारी अजमेर (प्रारम्भिक) श्री अरूण कुमार षर्मा ने कहा की प्रत्येक दिव्यांग के विद्यालय में प्रवेष दे और उनके साथ संवेदनषील होकर उनकी आवष्यकता को समझते हुये उनके साथ कार्य करें।
संभागियों को प्रषिक्षण में श्री विनय कुमार ने आर.पी.डब्ल्यू.डी. एक्ट 2016 के अनुसार 21 प्रकार की दिव्यांगताओं, समावेषी षिक्षा की समझ व इसमें आ रही बाधाओं और चुनौनियों के बारे में बताया, इसी प्रकार श्री तरूण षर्मा ने बच्चो की अलग-अलग योग्यता और उनकी योग्यता के अनुसार षिक्षा के बारे में जानकारी दी । साथ ही सुश्री अंजली सेन ने दिव्यांगों और गैर दिव्यांगां के लिये समान उपयोगी पद्धति ‘‘यूनिवर्सल डिजाइन ऑफ लर्निंग के बारे में बताया।
इसके साथ ही कुछ पूर्व में मुख्यधारा से जुडे बच्चो के विडियों और उनके साथ कार्य कर रहे षिक्षको के साक्षात्कार साझा किये गये।
संभागियो में से ही श्री षिव षंकर गुप्ता, राज श्री षर्मा, दलीप चावला रष्मि रूनवाल आदि ने फीड बेक साझा करते हुये कहा कि ये प्रषिक्षण हमारे लिऐ उपयोगी रहें। हमें दिव्यागो को विद्यालय में प्रवेष देते समय परीक्षा परिणाम की चिन्ता नही करनी चाहिये और हम अपने विद्यालयो मे जाकर जरूर यू डी एल को उपयोग करते हुये दिव्यंागो के सामाजिक समावेषन हेतु प्रयास करेगें।

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