27 दिसम्बर- राष्ट्र रक्षा में बलिदान हुये सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन का जीवन राष्ट्रभक्ति के लिये प्रेरणा है जिसे युवाओं का अलग अलग कार्यक्रमों व वेबीनार से ज्ञान कराना है और सिन्ध पर हुये विदेशी आक्रमणों का महाराजा दाहरसेन ने मुकाबला कर सीमायें बढाई। ऐसे विचार राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद व भारतीय सिन्धु सभा, अमरावती की ओर से ’सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन का बलिदान’ विषय पर आयोजित वेबीनार में वक्ता राष्ट्रीय मंत्री महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने प्रकट किये। सभा की ओर से दाहरसेन स्मारक पर 1997 से हो रहे अलग अलग आयोजन पर चर्चा की गई और मांग की गई कि भारत सरकार पाठय पुस्तक में जीवन परिचय का प्रकाशन करवाया जाये।
सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लधाराम नागवाणी ने कहा कि महाराजा दाहरसेन के बलिदान दिवस, जयंती के कार्यक्रमों के अलावा देशभक्ति आधारित कार्यक्रम देश भर में किये जा रहे हैं और दाहरसेन स्मारक पवित्र तीर्थस्थान है जहां हिंगलाज माता पूजन व जगद्गुरू श्रीचन्द्र भगवान के दर्शन भी होते हैं और राष्ट्रीय सम्मान के कार्यक्रमों से संस्थाओं को जोडा जा रहा है। उन्होने मांग की कि देश की राजधानी दिल्ली व अन्य राज्यों की राजधानी में भी मुख्य सडकों का नाम सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन के नाम रखा जाये जिससे महापुरूषों का याद रखा जाये।
वेबीनार में डाॅ. पीताम्बर पीटर डलवाणी, डाॅ. सुरेश बबलाणी ने भी विचार प्रकट किये। सभा की ओर से पण्डित दीपक शर्मा ने स्वागत भाषण व डाॅ. रोमा बजाज ने आभार प्रकट किया। वेबीनार का सचंालन साहित्यकार व रंगकर्मी तुलसी सेतिया ने किया।
वेबीनार की शुरूआत एनसीपीएसएल गीत व सिन्धु सभा गीत से की गई व सभा की प्रदेश उपाध्यक्ष दिवंगत श्रीमति जयश्री श्याम आहूजा को मौन श्रृद्धांजलि दी गई।