
आनासागर झील में मछलियों के मरने से उठ रही भंयकर दुर्गन्ध एवं उससे लोगो को हो रही परेशानी का मामला विधान सभा तक पहुंच गया। विधायक वासुदेव देवनानी ने सोमवार को विधान सभा में स्थगन प्रस्ताव के जरिये मामला उठाते हुए कहा कि गर्मी का मौसम प्रारम्भ होने के साथ ही आनासागर झील के पानी में घुले प्रदूषण व आक्सीजन की कमी के चलते रोजाना हजारों की संख्या में मछलियां मर रही है।
देवनानी ने कहा कि मरी हुई मछलियों के कारण फैल रही भयंकर दुर्गन्ध से झील के किनारे बसे आवासीय क्षेत्रों के निवासियों का जीना मुश्किल हो रहा है साथ ही राहगीरों का सड़कों पर गुजरना मुश्किल हो गया है। इसके अतिरिक्त एस्केप चैनल में छोड़े जा रही पानी को बन्द किये जाने पर पानी की कमी से चैनल के कुण्ड में एकत्रित मछलियों के मरने से उनकी दुर्गन्ध सर्किट हाउस तथा जेएलएन अस्पताल तक पहुंच रही है।
उन्होंने कहा कि आनासागर झील में बरसाती पानी के अलावा कई नालों का पानी भी पहुंच रहा है। नालों का पानी मिलने से झील का पानी प्रदूषित होता रहता है जो कि गर्मी बढ़ने के साथ ही बढ़ने लगता है तथा प्रदूषण व पानी में आक्सीजन की कमी के कारण मछलियां मरने लगती है। पूर्व में झील के पानी में मछलियां को मरने से बचाने के लिए पानी में आक्सीजन का स्तर बढ़ाने के लिए एरिएटर सिस्टम लगाया गया था जिससे मछलियों के मरने का क्रम घटा था परन्तु प्रशासनिक लापरवाही के चलते देखरेख के अभाव में एरिएटर सिस्टम के फव्वारें खराब होकर पिछले लम्बे समय से बंद पड़े है जिन्हें वापिस सुधरवाने या उनकी जगह नए लगाने के कोई प्रयास नहीं किये गये।
देवनानी ने विधान सभा में सरकार के समक्ष मांग रखी कि आनासागर झील में मछलियों के मरने व उससे उठने वाली दुर्गन्ध से निजात दिलाने के लिए झील में तत्काल एरिएटर सिस्टम के फव्वारें चालू कराए जाए व झील के किनारे मरी पड़ी मछलियों को तत्काल उठाने की व्यवस्था कराई जाए साथ ही केमिकल का छिड़काव कराकर झील के पानी से प्रदूषण को समाप्त किया जाए । उन्होंने कहा कि यह भी आवश्यक है कि झील में मिलने वाले नालों के पानी को ट्रीटमेंट प्लाण्ट में प्रदूषणमुक्त करने के बाद ही झील में छोड़ा जाना चाहिए। वर्तमान में स्मार्ट सिटी योजना के तहत आनासागर के चारों ओर पाथ-वे का निर्माण कराया जा रहा है परन्तु इससे पहले झील के पानी के शुद्धिकरण व प्रदूषणमुक्त करने के लिए कोई पुख्ता व स्थाई समाधान निकालकर जरूरी बंदोबस्त किये जाने की आवश्यकता है जिससे भविष्य में मछलियों के मरने से होने वाले प्रदूषण व उससे क्षेत्रवासियों को होने वाली परेशानी से छुटकारा मिल सके।