
विधायक अजमेर उत्तर एवं पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि राज्य सरकार राजस्व संग्रह के लक्ष्य को हासिल करने में लगातार पिछड़ रही है इसलिए सरकार को अपना राजस्व संग्रह बढाने पर ध्यान देना चाहिए। देवनानी ने गुरूवार को विधान सभा में वित्त विधेयक पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि बिना आय के प्रदेश का विकास संभव नहीं है और ना ही सरकारी घोषणाओं का धरातल पर उतर पाना संभव है।
देवनानी ने कहा कि वर्ष 2019-20 में 73742 करोड का राजस्व अर्जित करना था परन्तु 59244 करोड ही हुआ। वर्ष 20-21 में भी ऐसी ही हालात रहे जबकि वर्ष 21-22 के लिए सरकार ने 90050 करोड का लक्ष्य रखा है जिसे हासिल कर पाना संभव नहीं लगता। देवनानी ने कहा सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन के कारण प्रदेश में राजस्व घाटा 134 प्रतिशत हो गया है। इसी के साथ राजकोषीय घाटा भी 33922 से बढ़कर 58608 करोड हो गया है। यह जीडीपी का 6.12 प्रतिशत है जो कि बहुत अधिक है। देवनानी ने कहा कि मुख्यमंत्री व अन्य मंत्री सहित कांग्रेस के लोग इसके लिए केन्द्र से मिलने वाले अनुदान में कटौति का आरोप लगाते है जबकि हकीकत यह है कि केन्द्र से मिलने वाला अनुदान 109 प्रतिशत बढा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के आर्थिक पिछड़ेपन का वास्तविक कारण राजस्व संग्रह में पिछड़ना है और इसके लिए दो बातें जिम्मैदार है। एक प्रशासनिक लचरता व दूसरा भ्रष्टाचार है। सरकार द्वारा योग्य व सक्षम अधिकारियों की जगह सिफारिशी व चेहते अधिकारियों को प्रमुख व जिम्मैदार पदों पर लगाया जाता है जबकि योग्य अधिकारियों को दूर-दराज लगाया जा रहा है। इसके अलावा अधिकारियों के बडी संख्या में पदों का खाली होना भी एक बड़ी वजह है।
आय से अधिक सम्पति हो जब्त –
देवनानी ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए यह जरूरी है कि जिसके पास आय से अधिक सम्पति हो उसे सरकार जब्त करे, फिर चाहे वो आईएएस, आरएसएस या अन्य अधिकारी हो अथवा कोई राजनेता या निवार्चित जनप्रतिनिधि हो। एसा करने पर सरकार का खजाना भी भर जाएगा, परन्तु इसके लिए सरकार में बड़ी हिम्मत होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त शासन की बात कहना आसान है परन्तु इसके लिए कड़े कदम उठाने पड़ते है। सरकार को ई गवर्नेंस की तरफ भी आगे बढना चाहिए। स्वंय को गांधीवादी बताने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री जब शराबबंदी की बात आती है तो पिछे हट जाते है जबकि सबको मालूम है कि शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
उद्योगों को दे रियायत – देवनानी ने कहा कि सरकार प्रदेश में उद्योग विकसित करने के लिए उन्हें सस्ती दर पर कर्ज एवं बिजली उपलब्ध कराए। प्रदेश की कानून व्यवस्था व वातावरण को सुधारे जिससे नये-नये उद्योग स्थापित हो तथा प्रदेशवासियों को रोजगार मिले व सरकार की भी आय बढे। इसी प्रकार प्रदेश की स्किल यूनिवर्सिटी पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए वहां के हाल खराब है। वहां पर ना तो छात्र है और ना ही फैकल्टी।
देवनानी ने कहा कि सरकार अपनी सम्पतियों की जानकारी करे और उनसे आय बढाए। देवस्थान विभाग की प्रदेश के बाहर भी 143 सम्पतियां है जिनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी आय बढ़ाने में नाकाम रहने पर महत्वपूर्ण योजनाओं के बजट में कमी कर रही है। रूरल डवलपमेंट व स्वच्छ भारत अभियान में 1200 करोड को वर्ष 2020-21 में घटाकर 795 करोड कर दिया गया। वाटर सेनिटाईजेशन का बजट भी 3891 करोड से घटाकर 3709 करोड कर दिया। सरकार खुद को एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग का हितैषी बताती है लेकिन उनके बजट को 1079 से घटाकर 1034 करोड कर दिया। निःशुल्क जांचों का दायरा बढाने की घोषणा करते है लेकिन बजट 318 करोड से घटाकर 242 करोड कर दिया। किसानों के हित की बड़ी-बडी बाते करते है लेकिन कृषि क्षेत्र का बजट भी 13782 करोड से घटाकर 11809 करोड कर दिया । शिक्षा व्यवस्था भी बजट कटौति से अछूती नहीं रही तथा साईकिल व लेपटाॅप योजना के 220 करोड पर कैंची चला दी। बजट में थोथी घोषणाएं व आंकड़ो का मायाजाल प्रस्तुत कर जनता को भ्रमित किया गया है।
आरएसएस से जुड़े लोगो के प्रति दुर्भावना – देवनानी ने सरकार पर आरएसएस से जुड़े लोगो के प्रति दुर्भावना रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में रिक्त पदों के चलते हालत खराब है किन्तु सरकार ने रूक्टा राष्ट्रीय से जुड़े व्याख्याताओं को दूर-दराज पदस्थापित कर प्रताड़ित किया है जो कि मुख्यमंत्री जी की जीरो हरेशमेंट की घोषणा का मखौल उडाना है। उच्च शिक्षा विभाग में योग्यता के स्थान पर राजीव गांधी स्टडी सर्किल से जुड़े शिक्षकों को महत्व दिया जा रहा है।