
अजमेर की एतिहासिक आनासागर झील के किनारें पर मिट्टी डालकर अवैध रूप से किये जा रहे कब्जों की गूंज गुरूवार को विधान सभा में सुनाई दी। विधायक वासुदेव देवनानी ने विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन संबंधी नियम 295 के तहत यह मामला उठाते हुए सरकार से मांग की है कि झील के किनारों पर पानी में मिट्टी डालकर किये जा रहे कब्जें के प्रयासों पर तत्काल रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाए व अतिक्रमियों के विरूद्ध भी सख्त कार्यवाही कराई जाए। उन्होंने यह मांग भी रखी कि झील के शेष हिस्से पर प्रस्तावित पाथ-वे का निर्माण प्रारम्भ करने से पहले सभी कब्जों को हटवाया जाए।
देवनानी ने विधान सभा में कहा कि अजमेर शहर के मध्य में स्थित एतिहासिक आनासागर झील क्षेत्रवासियों के साथ ही पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का महत्वपूर्ण केन्द्र है। इस आनासागर झील के किनारे पर एक हिस्से पर प्राचीन बारादरी निर्मित है तथा गत वर्षो में कुछ हिस्सों पर पाथ-वे का निर्माण भी कराया गया है। झील के शेष हिस्सों में स्मार्ट सिटी योजना के तहत पाथ-वे का निर्माण कराया जाना प्रस्तावित है। झील के किनारे जहां पर अभी तक पाथ-वे का निर्माण नहीं हुआ है वहां पर पिछले लम्बे समय से अतिक्रमियों द्वारा डम्परों के माध्यम से पानी में बड़ी मात्रा में अवैध रूप से मिट्टी डलवाकर जमीन तैयार कर उस पर कब्जें किये जा रहे है। वैशाली नगर मार्ग पर जी माॅल के पास, देवनारायण मंदिर के पिछे व गौरव पथ पर तथा पुष्कर रोड पर भट्टे वाली गली सहित कई स्थानों पर झील के पानी में लगातार मिट्टी डालकर जो कृत्रिम जमीन तैयार की जा रही है उसे अपने कब्जें में लेने के लिए अतिक्रमी स्वंय को उस जमीन का खातेदार बताते है जबकि उक्त क्षेत्र स्पष्टतः झील के डूब क्षेत्र में आता है तथा जहां तक पानी भरा हुआ है वहां पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य अनुमत नहीं है।
देवनानी ने कहा कि झील में मिट्टी डालकर किये जा रहे कब्जें के प्रयासों को रोकने में ना तो नगर निगम और ना ही जिला प्रशासन द्वारा गंभीरतापूर्वक कोई प्रयास किये जा रहे है। रात्रि के समय झील के किनारे अवैध रूप से मिट्टी डालने वाले डम्परों के विरूद्ध पुलिस व परिवहन विभाग द्वारा भी कोई कार्यवाही नहीं की जाती है। जब कभी मिडिया में इसे लेकर कोई खबर सामने आती है तो प्रशासन अतिक्रमियों को नोटिस जारी कर खानापूर्ति कर देता है परन्तु आज तक एसी कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई जिससे झील में कब्जों के प्रयासों पर लगाम लगाई जा सके। प्रशासन द्वारा इस सम्बंध में बरती जा रही उदासीनता के कारण झील का स्वरूप बिगड़कर सिकुड़ता जा रहा है।