आत्मा न जन्मती है न मरती है, आत्मा नित्य मुक्त है-संत रसायन

श्री मद्भागवत कथा के समापन पर प्रसादी का हुआ आयोजन
ब्यावर,(हेमन्त साहू)। शहर के अजमेरी गेट के बाहर स्थित रामद्वारा में भागवत कथा के समापन के पावन अवसर पर रामद्वारा में भागवत प्रसादी का भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें सैंकडो भक्तजनों ने बढ़ चढक़र भाग लिया एवं महा प्रसादी ग्रहण की। कथा के समापन पर बोल रहे कथा प्रवक्ता संतराम रसायन महाराज ने कहा राजा परीक्षित को भगवान सुखदेव जी ने कथा सुना करके राजा परीक्षित को मृत्यु के भय से निर्भय कर दिया और कहा कि राजन मृत्यु शरीर की होगी। क्योंकि जन्म शरीर का ही हुआ है। आत्मा न जन्मती है न मरती है, नित्य मुक्त है। मैं मर जाऊंगा यही सबसे बड़ी अज्ञानता है। भागवत के अंतिम श्लोक पर विवेचन देते हुए संत राम रसायन ने कहा कि भगवान का नाम लेने एवं कीर्तन से सर्वे दोषों का पापों का समन हो जाता है। भगवान के एवं गुरुदेव के चरणों में प्रणाम करने से दुखों का अंत हो जाता है। ऐसे भगवान एवं गुरुदेव के पावन चरणों में कोटि-कोटि बार वंदन कर राजा परीक्षित जीवन मुक्त हो गया।

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