-राजीव गांधी स्टडी सर्कल के सदस्यों को किसके आदेश से रीट में लगाया गया
-निलंबित अधिकारियों को भी गिरफ्तार कर पूछताछ की जाए
-जारौली से राजनीतिक संरक्षण के बारे में हो पूछताछ

रविवार को जारी बयान में देवनानी ने कहा कि राजीव गांधी स्टडी सर्कल से जुड़े काॅलेज शिक्षा आयुक्तालय, जयपुर में सहायक निदेशक सुभाष यादव, सहायक निदेशक बी.एस. बैरवा, निजी स्कूल के कार्मिक ध्यानचंद गोठवाल को को-आॅर्डिनेटर, सुनीता पचैरी अजमेर की, प्रदीप पाराशर जयपुर के, देवेंद्र परमार धौलपुर के और नदीम चिश्ती उदयपुर के को-आॅर्डिनेटर बनाए गए। यह तथ्य इस बात की ओर इंगित करते हैं कि राजीव गांधी स्टडी सर्कल के इन पदाधिकारियों व सदस्यों को तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री डाॅ. गर्ग के इशारे पर ही लगाया गया होगा, क्योंकि डाॅ. गर्ग और राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के बर्खास्त अध्यक्ष डाॅ. डी.पी. जारौली मित्र रहे हैं। जारौली भी राजीव गांधी स्टडी सर्कल से जुड़े हैं।
देवनानी ने कहा कि जिस तरह राजीव गांधी स्टडी सर्कल के लोगों को रीट में लगाया गया, उससे इस संस्था की भूमिका पेपर लीक के मामले में संदेह के दायरे में आ गई है। सरकार बोर्ड के सचिव अरविंद कुमार सेंगवा, काॅलेज शिक्षा के सहायक निदेशक सुभाष यादव और बी.एस. बैरवा को निलंबित कर चुकी है। इसलिए एसओजी को इन तीनों अधिकारियों के साथ प्रदीप पाराशर को गिरफ्तार करना चाहिए। साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि राजीव गांधी स्टडी सर्कल के इंचार्ज को-आॅर्डिनेटर ने किसके कहने पर सर्कल के सदस्यों को रीट में लगाने के लिए कहा।
देवनानी ने कहा, बोर्ड के बर्खास्त अध्यक्ष जारौली ने कहा है कि यह सब राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों ने किया है, तो उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि यह लोग कौन हैं और किस स्तर का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। देवनानी ने कहा, पूरे मामले में अभी तक जो बयान और तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे यह जाहिर होता है कि पेपर लीक के तार मंत्री तक जुड़े हुए हैं। इसलिए रीट पेपर लीक मामले की जांच एसओजी से लेकर तुरंत प्रभाव से सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इतना सब-कुछ होने के बाद भी सरकार द्वारा परीक्षा निरस्त कर दोबारा परीक्षा कराने से इंकार करना समझ से परे है। आखिर सरकार की मंशा क्या है और वह 16 लाख अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ क्यों करना चाहती है, यह उसे स्पष्ट करना चाहिए।