*गुरु प्रियदर्शन का यह संदेश व्यसन मुक्त हो सारा देश*

परवाधीराज पर्युषण की पावन बेला में धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुजनों को संबोधित करते हुए संघनायक गुरुदेव श्री प्रियदर्शन मुनि जी महारासा ने फरमाया कि जीवन की पवित्रता के लिए पापों का और दुर्व्यस्नों का त्याग होना नितांत आवश्यक है पापो में फसना आसान होता है,मगर उन से बाहर निकल पाना बड़ा मुश्किल होता है ।
एक बाल रोटी में फंसा हुआ है और दूसरा मक्खन में ,तो बताइए दोनों बालों में से किसको निकालना आसान रहेगा? सीधी सी बात है मक्खन में फसे बाल आसानी से निकल जाएगा मगर रोटी में फसे बालो का निकलना मुश्किल रहेगा।पाप कर्मों को करने के बाद व्यक्ति की स्थिति भी उस रोटी में फंसे बालों की तरह होती है।
संसार में जालि आदि कुमारो की तरह कुछ आत्माएं इतनी हलुकर्मी होती है जो मक्खन में फंसे बाल की तरह अपने आप को जल्दी से पापों से अलग कर लेती है। साधक को भी हरपल यही चिंतन करना चाहिए की वह धन्य दिवस मेरा कब होगा जब मैं भी इस संसार से निर्वित होकर संयम जीवन स्वीकार करूंगा।स्वयं तीन खंड के नाथ श्री कृष्ण महाराज के मन में भी यही भाव आए थे।
मगर आज के भौतिकतावादी युग में मनुष्य की भावना खाओ, पियो और मौज करो की है ।आज कोई भी ऐसा समाज नहीं मिलेगा जिसको गलत व्यसनों और पापों ने अपनी गिरफ्त में नहीं ले रखा हो ।शराब का व्यसन द्वारिका नगरी के विनाश का कारण बनता है। शराब शब्द ही कहता है कि जो शत प्रतिशत राक्षस बना दे। मदिरा यानी जो मरघट का रास्ता दिखा दे। यह व्यसन कौन सी अनैतिकता नहीं पैदा करता ?जुआ खेलने का व्यसन चाहे वह ताश पत्ती हो, आईपीएल हो, चुनाव आदि किसी के सट्टे क्यों ना हो ,यह व्यसन व्यक्ति और समाज को खोखला करता है ।
इसी के साथ ही वेश्यागमन और परस्त्रगमन ,मांस भक्षण ,शिकार और चोरी के जो गलत व्यसन है यह व्यक्ति के इस भव और पर भाव दोनों को बिगाड़ने वाले हैं। अतः एक संत के दिल की भावना उसके निवेदन को समझने का प्रयास करें और आपके जीवन में अगर यह दुर्व्यसन चल रहे हो तो उनका त्याग करने का प्रयास करें ।आज की धर्म सभा में गुरुदेव श्री जी की पावन प्रेरणा से बड़ी अच्छी संख्या में लोगों ने सप्त कुव्यसन के त्याग के प्रत्याखान को ग्रहण किया।
पर्वाधिराज पर्युषन का चतुर्थ दिवस आज नीवी दिवस के रूप में मनाया गया ।बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाओं द्वारा नीवी तप की आराधना की गई ।इसी के साथ उपवास,आयंबिल,तेला,पंच आठ एवं नो की तपस्या के प्रत्याखान किए गए ।
धर्म सभा को पूज्य श्री सौम्यदर्शन एवं पूज्य श्री विरागदर्शन मुनि ने भी संबोधित किया ।
धर्म सभा में पदमचंद खटोड़ ने दान की महत्ता के बारे में बताते हुए सभी को जीव दया एवं मानव सेवा हेतु दान देने की प्रेरणा प्रदान की।
धर्म सभा का संचालन बलवीर पीपाड़ा एवं हंसराज नाबेड़ा ने किया।
पदमचंद जैन
* मनीष पाटनी,अजमेर*

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