पर्युषण पर्व के चोथे दिवस तेरापंथ भवन सुन्दर विलास मैं प्रवचन

आज आज पर्युषण का चौथा दिवस वाणी संयम है, प्रातः कालीन प्रवचन में मुमुक्षु कनिष्का ने सागम स्वाध्याय में गौतम स्वामी और प्रभु महावीर का संवाद बताया जिसमें प्रभु कहते है कि जिसमे सरलता होती है, धर्म उसमे उहरता है जिसमें सरलता होती है, जो व्यक्ति धर्म करता है, उसका जीवन सफल हो जाता है। मुमुक्षु खुशी ने भगवान महावीर की जीवनी के दौरान कुमार वर्धमान की शिशुक्य की विनम्रता, मां पिता के प्रति भक्ति और संयमपूर्ण चेतना के विकास को भावपूर्ण शब्दों द्वारा अभिव्यक्त करने का प्रयास किया मुमुक्षु संयोजिका राजुल ने वाणी संयम पर संबोधित करते हुए कहा की शब्द अगर संभाल के ना बोले जाए तो अर्थ का अनर्थ हो सकता है।

सायं प्रतिक्रमण, अर्हत वेदना, ध्यान के पश्चात, मुमुक्षु भावना ने बताया की GST का Formula use
करने से जीवन कितना सरल बन जाता है, G = Greetings (जय जिनेन्द्र) आपस मे सद्‌भाव को बढाता है। S=smile (मुश्किल situation को आसान बनाती है | T= Thank You दूसरो का आभार व्यक्त करने से सामंजस्य और सह-अस्तित्व के साथ परिवार मे रहा जा सकता है।
संयोजिका मुमुक्षु राजुल ने” समता के सागर गजसुकु‌माल का आख्यान बांचा जिसमे आज देवकी और भगवान अरिष्टनेमी के साथ वार्तालाप होता है और माता देवकी को ज्ञात होता है कि जिन 6 मुनियों को उन्होंने आहार का व्रत निपजाया वे उनके ही पुत्र है, और उनकी ममता जागृत हो जाती है। अंत में रोचक आध्यात्मिक activines मे भी लोगो ने जोश के साथ भाग लिया।आचार्य महाश्रमण जी की शिष्या मुमुक्षु राजुल ,भावना व खुशी ने तेरापंथ भवन सुंदर विलास अजमेर प्रवचन किया।
अशोक छाजेड़

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