पशुपालकों के लिये बजट दिशाहीन, आंकड़ों और शब्दों का मायाजाल- रामचंद्र चौधरी

* पशुपालकों के लिये बजट दिशाहीन, आंकड़ों और शब्दों का मायाजाल*,
* डेयरी क्षेत्र को झुनझुना, किसानों को ठोस राहत नहीं*,
** बजट में पशुपालकों की अनदेखी, सरकार सपनों की खेती कर रही है

अजमेर।  राजस्थान सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 को अजमेर डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने पशुपालकों के लिए “दिशाहीन, दिग्भ्रमित एवं आंकड़ों और शब्दों का मायाजाल” करार दिया है। चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस बजट में डेयरी एवं पशुपालकों को केवल झुनझुना पकड़ाया गया है, वास्तविक राहत का कोई प्रावधान नहीं किया गया।
रामचंद्र चौधरी ने कहा कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए प्रदेश के पशुपालकों को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के तहत 7 वर्ष पूर्व घोषित 5 रुपये प्रति लीटर की प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर कम से कम 7 रुपये प्रति लीटर किया जाएगा, लेकिन सरकार ने इस दिशा में कोई निर्णय नहीं लिया। उन्होंने कहा, “जब लागत आसमान छू रही है तो सहायता ज़मीन पर क्यों पड़ी है?”
चौधरी ने यह भी कहा कि जिला दुग्ध संघों एवं आरसीडीएफ में कार्यरत लगभग 2500 ठेका श्रमिक, जो पिछले 15-20 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें स्थायी करने का कोई प्रावधान बजट में नहीं किया गया। अन्य विभागों की भांति संविदा कर्मियों को नियमित करने की घोषणा भी नहीं की गई और ना ही 2500 रिक्त पदों पर भर्ती की बात कही गई। उन्होंने कहा, “जो लोग वर्षों से पसीना बहा रहे हैं, उनके भविष्य पर सरकार ने ताला लगा दिया है।”
उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मिड-डे-मील योजना के तहत जिला संघों पर बकाया 300 करोड़ रुपये का बजट में कोई उल्लेख नहीं किया गया।इससे जिला दुग्ध संघ आर्थिक तंगी में फंसते जा रहे हैं। “आर्थिक ऑक्सीजन के बिना संस्थाएं कैसे जीवित रहेंगी?” – चौधरी ने सवाल उठाया।
रामचंद्र चौधरी ने कहा कि सरस डेयरी क्षेत्र के पशुपालकों को उम्मीद थी कि महाराष्ट्र की तर्ज पर डेयरी एवं पशुपालन को कृषि क्षेत्र घोषित किया जाएगा, लेकिन यह मांग भी अधूरी रह गई। बेसहारा पशुओं की समस्या के नियंत्रण के लिए भी कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया और न ही निःशुल्क सेक्स सॉर्टेड सीमन युद्ध स्तर पर देने की घोषणा की गई।
उन्होंने सहकारी लोकतंत्र की अनदेखी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिन दुग्ध समितियों एवं जिला संघों में चुनाव लंबित हैं, उनके समयबद्ध चुनाव कराने की कोई घोषणा नहीं की गई। “लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होंगी तो सहकार कैसे मजबूत होगा?”
रामचंद्र चौधरी ने बजट में जिला संघों के लिए घोषित 2000 करोड़ रुपये के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रावधान को “मुंगेरी लाल के हसीन सपने” के समान बताया। उन्होंने याद दिलाया कि गत वर्ष भी 1000 करोड़ रुपये के रिफार्मिंग की घोषणा हुई थी, जो आज तक धरातल पर नहीं उतरी। “कागज़ी पुल बनाकर विकास नहीं होता” उन्होंने कहा।
सरस ब्रांड के विस्तार के नाम पर मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और NCR में आउटलेट खोलने के लिए घोषित 100 करोड़ रुपये को भी चौधरी ने “मृगतृष्णा” करार दिया और कहा कि जब प्रदेश के दुग्ध संघ आर्थिक संकट में हैं तो बाहरी विस्तार केवल दिखावा है।
उन्होंने गंभीर चिंता जताई कि वर्ष 2022-23 में राजस्थान दुग्ध उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर था, लेकिन सरकार की शिथिलता के कारण अब राज्य दूसरे स्थान पर खिसक गया है। पंचायत स्तर के पशु चिकित्सालयों में स्टाफ भर्ती की प्रक्रिया को उन्होंने “ऊंट के मुंह में जीरा” बताया।
अंत में रामचंद्र चौधरी ने कहा,
“यह बजट पशुपालकों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। अगर समय रहते सरकार ने सुधारात्मक कदम नहीं उठाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कमजोर हो जाएगी। आंकड़ों की बाजीगरी से पेट नहीं भरता, ज़मीन पर निर्णय चाहिए।”

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