सरकार द्वारा लैब निजी हाथों में सौंपे जाने से व्यवस्था लड़खड़ाई

जांच रिपोर्ट दो दिन बाद मिलने से मरीजों में आक्रोश
जांच रिपोर्ट की प्रमाणिकता पर भी संदेह
लैब में जिम्मेदार अधिकारी की नहीं की नियुक्ति
 जांच व्यवस्था अस्पताल में उपलब्ध कराने की दरकार
तैनात स्टाफ के पास पर्याप्त व्यवस्थाओ का अभाव
नसीराबाद( अजमेर ) प्रदेश की सरकार द्वारा प्रदेश भर के अस्पतालों की लैब पी पी मोड पर दिए जाने से अस्पताल की लैब का संचालन पूर्ण रूप से निजी हाथों में सौंप दिया गया । उक्त व्यवस्था मरीजो के लिए परेशानी का सबब बन गई है ।जहाँ मौसमी बीमारियों बढ़ते प्रकोप के कारण अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ वही नियमित जांच की रिपोर्ट भी तत्काल नहीं मिलने के कारण मरीज को इलाज नहीं मिल पाने से निजी संस्थानों में जाने को मजबूर होना पड़ रहा है जिसके कारण मरीजो को आर्थिक भार वहन करना पड़ रहा है ।
जानकारी के अनुसार जिस फर्म  को ठेका दिया गया है उसके द्वारा तीन श्रेणियां में लैब की व्यवस्था अस्पतालों में की गई है स्पोक लैब हब लैब व मदर लैब किंतु कस्बे के डेढ़ सौ पलंगों वाले अस्पताल में स्पोक लैब की व्यवस्था की गई ।उक्त स्पोक लैब में ठेका फर्म द्वारा एक कंप्यूटर ऑपरेटर व दो कार्मिक सैंपल लेने के लिए नियुक्त किए गए हैं ।लैब में मरीजो के सैंपल लेने की व्यवस्था की गई है सैंपल जांच हेतु केकड़ी भिजवाये जाएंगे जिसके कारण मरीज को उसकी जांच रिपोर्ट दो-तीन दिन बाद उपलब्ध कराई जा रही है जिसके कारण मरीजो को तत्काल उपचार नहीं मिल पाने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है  जबकि नसीराबाद में ही हब लैब स्थापित करनी चाहिए थी जिससे आस पास के स्वास्थ्य केंद्रों की जांच यही पर हो जाने से मरीजों को राहत मिलती। नियमित रूप से होने वाली जांच रिपोर्ट भी दो दिन बाद मिलने से मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ हो रहा है ।
माकूल व्यवस्था का अभाव- ठेका फर्म द्वारा अस्पताल में  मात्र
एक कंप्यूटर ऑपरेटर दो सैंपल लेने के लिए कार्मिक लगा रखे है जिसके चलते व्यवस्था लड़खड़ा गई है एक कंप्यूटर ऑपरेटर के द्वारा सैंपल के लिये बारकोड के आधार पर कंप्यूटर पर एंट्री की जाती है व जांच रिपोर्ट भी उक्त कार्मिक के द्वारा ही दी जाती व अस्पताल में रोजाना 200 से अधिक सैंपल आते है मात्र दो कार्मिकों के द्वारा ही सैंपल लेने के कारण भीड़ जमा हो जाती है व वरिष्ठ जनों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है वही तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर के पास नेट सुविधा व स्टेशनरी सहित अन्य व्यवस्थाओं का भी अभाव है जिसका खामियाजा भी मरीजों को झेलना पड़ रहा है
जिम्मेदार अधिकारी का अभाव-निजी लैब संचालक द्वारा लैब में मात्र तीन कार्मिकों को नियुक्त किया है किंतु कोई जिम्मेदार अधिकारी की नियुक्ति नहीं की है यदि सैंपल लेते समय कोई मरीज कोलैप्स हो जाता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी व दोपहर दो बजे बाद आपात कालीन जांच की भी कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं है ना हि कोई पीवीएफ एवं माइक्रोस्कोपी व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं है
लैब में तैनात सरकारी स्टाफ बना मूक दर्शक- अस्पताल में लैब में करीब आठ कार्मिक तैनात है व एक पैथोलॉजिस्ट नियुक्त है किंतु उक्त स्पोक लैब में मरीजो की नियमित जांच सहित 117 जांचे की जा रही है जिसके कारण लैब की पूर्ण व्यवस्था निजी संचालन में चले जाने से सरकारी स्टाफ मूक दर्शक बन गया है ।
जांच रिपोर्ट की प्रमाणिकता पर संदेह-निजी फर्म के द्वारा मात्र दो कार्मिकों की नियुक्ति सैंपल लेने के लिए कर रखी है  जब मरीजों की भीड़ पड़ती हैं तो व्यवस्था लड़खड़ा जाती है व यहां से सैंपल जांच हेतु केकड़ी भिजवाये जाते है रिपोर्ट दो तीन बाद आती है इस दौरान भी सैंपल रिपोर्ट में यदि कोई लापरवाही हो जाती है तो उसका खामियाजा भी मरीजों को उठाना पड़ेगा ।
क्षेत्र वासियों का कहना- सरकार के द्वारा अस्पताल में लैब का संचालन निजी फर्म को सौंपने से नियमित जांच की रिपोर्ट भी दो तीन दिन बाद मिल रही है जबकि पहले सैंपल देने बाद कुछ घंटों बाद ही मिल जाती थी किंतु अब जांच रिपोर्ट कब मिलेगी उसकी समय सीमा भी निर्धारित नहीं है । नसीराबाद में भी हब लैब लगानी चाहिए व यही पर जांच व्यवस्था करनी चाहिए जिससे मरीजों को तत्काल रिपोर्ट मिल जाए।
मॉनिटरिंग का अभाव- अस्पताल की लैब को निजी हाथों में सौंप देने के बाद चिकित्सा महकमे के अधिकारियों द्वारा मॉनिटरिंग भी नहीं की जा रही हैं जिसके कारण निजी संचालक के द्वारा की जा रही मनमानी का शिकार मरीज हो रहे हैं।
उक्त सन्दर्भ में अजमेर जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर ज्योत्सना रंगा से भी संपर्क करने का प्रयास किया किंतु उनके द्वारा मोबाइल रिसीव नहीं करने के कारण बात नहीं हो पाई।
error: Content is protected !!