मौलाना अबुल कलाम आज़ाद राष्ट्र नायक समृति दिवस में शामिल करे

मौलाना अब्दुल कलाम आज़ा महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात शिक्षाविद, पत्रकार और हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक थे। वे स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री (1947-1958) रहे, जिन्होंने IIT, UGC और शिक्षा के आधुनिकीकरण की नींव रखी।
उनकी जयंती (11 नवंबर) को ‘राष्ट्रीय शिक्षा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है ।
मौलाना अब्दुल कलाम का जन्म 11 नवंबर 1888,को मक्का, सऊदी अरब में हुआ। उनका मूल नाम अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन था । उन्होंने अपना
अपना उप नाम’आजाद’ (स्वतंत्र), जो उन्होंने अपनी स्वतंत्र सोच के कारण चुना।
उन्होंने पारंपरिक इस्लामी शिक्षा प्राप्त की।
उनका निधन 22 फरवरी 1958 हृदय गति रुकने से हुआ ।
1992 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किये गये ।
1912 में उर्दू साप्ताहिक ‘अल-हिलाल’ और बाद में ‘अल-बलाग’ के माध्यम से स्वतंत्रता के लिए अलख जगाई, जिस पर ब्रिटिश सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था।1923 में सबसे कम उम्र में कांग्रेस के अध्यक्ष बने और 1940-1946 तक, विशेष रूप से भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान, इस पद पर रहे। महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और कई बार जेल गए। सांप्रदायिकता के खिलाफ थे और देश के विभाजन का कड़ा विरोध किया। उन्होंने
14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा की वकालत की।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की स्थापना की।
अकादमियां: साहित्य अकादमी, संगीत नाटक अकादमी, और ललित कला अकादमी की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाई ।
उन्हें जवाहरलाल नेहरू ने “मीर-ए-कारवां”। कहा था और गांधीजी ने उनकी तुलना प्लेटो-अरस्तू से की थी। उनका पूरा जीवन धर्मनिरपेक्षता और शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रतीक है।