“महर्षि दयानंद सरस्वती स्वदेशी कंसोर्टियम” की स्थापना

स्वदेशी नवाचार एवं उद्यमिता को नई दिशा

MDSU स्वदेशी कन्सोर्टियम स्थापित करने वाला राजस्थान का पहला विश्वविद्यालय बना,
डॉ. राधेश्याम चोयल को बनाया “प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस (मानद)”

आर. एस. चोयल

अजमेर।
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर ने शिक्षा, उद्योग, नवाचार एवं स्वदेशी उद्यमिता के समन्वय की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी पहल करते हुए “महर्षि दयानंद सरस्वती स्वदेशी कंसोर्टियम” (Maharshi Dayanand Saraswati Swadeshi Consortium) की स्थापना की है। यह कंसोर्टियम MDSU दावारा CHARGE के सहयोग से स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य युवाओं को व्यवहारिक औद्योगिक शिक्षा, स्वदेशी नवाचार, कौशल विकास तथा आत्मनिर्भर उद्यमिता से जोड़ना है।

साथ ही विश्वविद्यालय ने प्रख्यात उद्यमी, नवाचार विशेषज्ञ एवं एग्रो-इंडस्ट्रियल क्षेत्र के अनुभवी व्यक्तित्व डॉ. राधेश्याम चोयल  को “Professor of Practice (Honorary)” नियुक्त किया गया है।  विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच मजबूत सेतु निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

कुलगुरु प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि  “महर्षि दयानंद सरस्वती स्वदेशी कंसोर्टियम” का उद्देश्य शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग एवं उद्यमिता के मध्य सशक्त समन्वय स्थापित करना है, ताकि विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक औद्योगिक अनुभव एवं उद्यमिता आधारित प्रशिक्षण भी प्राप्त हो सके। यह कंसोर्टियम विशेष रूप से कृषि-आधारित उद्योगों, एग्रो-प्रोसेसिंग, ग्रामीण नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति, FPOs तथा स्वदेशी उत्पादन आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देगा।  कुलगुरु प्रो.  अग्रवाल ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय सदैव शिक्षा को समाज, उद्योग एवं राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि उन्हें नवाचार, कौशल विकास एवं रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में विकसित होना होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि “महर्षि दयानंद सरस्वती स्वदेशी कंसोर्टियम” विश्वविद्यालय में उद्योग आधारित व्यवहारिक शिक्षा एवं नवाचार संस्कृति को नई दिशा देगा।

*डॉ. राधे श्याम चोयल का संक्षिप्त परिचय*

डॉ. राधेश्याम चोयल पिछले 34 वर्षों से उद्यमिता एवं औद्योगिक विकास के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दे रहे हैं। उन्होंने 26 वर्षों तक अनुसंधान, नवाचार एवं तकनीकी विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए कई व्यवहारिक औद्योगिक मॉडल विकसित किए हैं। कृषि-औद्योगिक क्षेत्र एवं एग्रो-प्रोसेसिंग सेक्टर में उनका अनुभव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। बीते एक दशक में उन्होंने हजारों युवाओं, किसानों एवं उद्यमियों को प्रशिक्षण प्रदान कर स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित किया है।

CSMT के माध्यम से डॉ. चोयल ने मिलिंग टेक्नोलॉजी, एग्रो-इंडस्ट्रियल शिक्षा एवं व्यवहारिक औद्योगिक प्रशिक्षण को नई दिशा प्रदान की है। उनका मानना है कि शिक्षा तभी प्रभावी हो सकती है जब उसे उद्योग, उत्पादन, विपणन, नवाचार एवं उद्यमिता की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ा जाए। इसी सोच के साथ वे अब विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष औद्योगिक अनुभव, व्यवहारिक प्रशिक्षण, स्टार्टअप संस्कृति एवं स्वदेशी उद्यमिता से जोड़ने का कार्य करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्य में यह कंसोर्टियम युवाओं, किसानों, स्टार्टअप्स एवं ग्रामीण उद्यमियों के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगा। इससे विश्वविद्यालय परिसर को केवल पारंपरिक शिक्षा केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि “Innovation & Entrepreneurship Launchpad” के रूप में विकसित करने की दिशा में नई गति मिलेगी। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि-आधारित उद्योगों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) तथा स्वदेशी औद्योगिक विकास को भी मजबूती प्रदान करेगी।

डॉ. राधेश्याम चोयल ने अपनी नियुक्ति पर विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक एवं उत्तरदायित्व पूर्ण है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य अपने दशकों के औद्योगिक अनुभव को विद्यार्थियों तक पहुँचाना तथा उन्हें रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजनकर्ता बनाना है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत एवं स्वदेशी उद्योग की अवधारणा तभी सशक्त होगी जब युवाओं को व्यवहारिक कौशल, नवाचार एवं उद्यमिता से जोड़ा जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय, उद्योग एवं समाज के संयुक्त प्रयासों से राजस्थान को एग्रो-इंडस्ट्रियल नवाचार एवं स्वदेशी उद्यमिता का अग्रणी केंद्र बनाया जा सकता है। यह कंसोर्टियम आने वाले समय में युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करते हुए उन्हें आत्मनिर्भर एवं राष्ट्रनिर्माण के लिए सक्षम बनाएगा।

प्रो अग्रवाल ने कहा कि “महर्षि दयानंद सरस्वती स्वदेशी कंसोर्टियम” की स्थापना को शिक्षा, उद्योग एवं स्वदेशी नवाचार के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो भविष्य में विश्वविद्यालय आधारित उद्यमिता मॉडल के रूप में नई पहचान स्थापित करेगा ।

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