अजमेर की ऐतिहासिक जीवनदायिनी आनासागर झील एवं फाईसागर वरुण सागर झील के अस्तित्व, पर्यावरण एवं जलचरों की सुरक्षा के लिए यह मूल वाद न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। झीलों की आर्द्रभूमि वेटलैंड के संरक्षण, वैज्ञानिक सीमांकन, भूजल पुनर्भरण, जैव विविधता की रक्षा, प्रवासी पक्षियों के प्राकृतिक आवास तथा पारिस्थितिकीय संतुलन को बनाए रखने के उद्देश्य से यह कानूनी कदम उठाया गया था। झीलों में बिना वैज्ञानिक मानकों, बाथीमीट्रिक सर्वेक्षण व विशेषज्ञों की राय के बिना अवैधानिक रूप से चलाई जा रही डी-सिल्टिंग गाद निकालने की प्रक्रिया सीधे तौर पर जल स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा रही है, जिसके चलते झीलों में भारी मात्रा में बेजुबान मछलियों की अकाल मौत हो रही है और गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो गया है। आम नागरिकों के सिविल अधिकारों, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा तथा इस लोक न्यूसेंस व पर्यावरणीय क्षति को रोकने हेतु ही वादी डॉ. राजकुमार जयपाल पूर्व विधायक एवं अन्य द्वारा न्यायालय की शरण ली गई थी।
यह प्रकरण श्रीमान सिविल न्यायाधीश उत्तर आशिका जैन की अदालत में विचाराधीन है। इस अति-संवेदनशील जनहितैषी मामले में अपनी प्रशासनिक नाकामियों, गैर-जिम्मेदाराना रवैये और बेजुबान मछलियों की मौत पर पर्दा डालने के लिए सरकारी तंत्र द्वारा तरह-तरह के पैंतरे अपनाए जा रहे हैं और प्रकरण की सुनवाई को टालने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों की ओर से न्यायालय में क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए जो प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है, वह केवल और केवल मामले की सुनवाई को टालने, अटकाने और अदालत की कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास है। इस मुद्दे की गंभीरता और प्रशासनिक उपेक्षा को लेकर जनआक्रोश चरम पर है, जिसके चलते दिनांक 23 जुलाई 2026 को इस मामले को लेकर अजमेर बंद भी हो रहा है।
अधिकारियों द्वारा उठाए गए इस प्रार्थना पत्र के संबंध में वादी की ओर से न्यायालय के समक्ष लिखित जवाब पेश कर पुरजोर बहस की जाएगी। प्रकरण की आगामी सुनवाई दिनांक 24 जुलाई 2026 को होगी, जिसमें वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं की टीम जिसमें विद्वान अधिवक्ता विवेक पाराशर, जितेश धनवानी, रोहन पाराशर, दीपक खत्री एवं तेजस्वी पाराशर द्वारा श्रीमान सिविल न्यायाधीश उत्तर आशिका जैन की अदालत में उपस्थित होकर इसका जवाब पेश कर बहस की जाएगी। अजमेर की ऐतिहासिक झीलों, पर्यावरण और बेजुबान जलचरों के हक की यह लड़ाई कानूनी व सामाजिक स्तर पर पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी।