एक वर्ष में परिवर्तन से उत्कृष्टता की ओर : महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा, शोध एवं सुशासन का नया मॉडल किया स्थापित
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, शोध सुधार, रोजगारोन्मुख शिक्षा, डिजिटल प्रशासन एवं गुणवत्ता आधारित अकादमिक संस्कृति से विश्वविद्यालय ने रचा नया इतिहास
कुलगुरु प्रो. (डॉ.) सुरेश कुमार अग्रवाल के एक वर्ष के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियाँ
अजमेर, 23 जुलाई। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर ने कुलगुरु प्रो. (डॉ.) सुरेश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में अपने एक वर्ष के कार्यकाल के दौरान शिक्षा, शोध, प्रशासन, परीक्षा, आधारभूत संरचना, पर्यावरण संरक्षण, वित्तीय अनुशासन तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय के माध्यम से व्यापक एवं ऐतिहासिक परिवर्तन स्थापित किए हैं। विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, शोध की गुणवत्ता में सुधार, डिजिटल प्रशासन, छात्र कल्याण, उद्योग-शिक्षा समन्वय तथा सुशासन की दिशा में अनेक ऐसी पहलें की हैं, जिन्होंने विश्वविद्यालय को राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
कुलगुरु प्रो. (डॉ.) सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे उत्तरदायी, कुशल, नवाचारी एवं राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित नागरिक तैयार करना है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक विज्ञान तथा वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप समाज का नेतृत्व कर सकें। इसी दृष्टि से विश्वविद्यालय में शिक्षा, शोध, प्रशासन एवं विद्यार्थी सेवाओं के प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक सुधार किए गए हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में राजस्थान का अग्रणी विश्वविद्यालय
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्नातक स्तर पर पूर्ण रूप से सेमेस्टर प्रणाली, क्रेडिट आधारित शिक्षा प्रणाली तथा परिवर्तित परीक्षा प्रणाली लागू कर दी गई है। विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप संपूर्ण पाठ्यक्रमों का पुनर्गठन किया है तथा आगामी सत्र से विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का पूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।
विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों को वैश्विक रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से अनेक रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम प्रारम्भ किए हैं। इनमें एमसीए इन डेटा एनालिसिस, इंटर्नशिप आधारित क्रेडिट प्रणाली, एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स (AEC), स्किल एन्हांसमेंट कोर्स (SEC) तथा वैल्यू एडेड कोर्स (VAC) सम्मिलित हैं। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगारपरक कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।
भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों को शिक्षा से जोड़ते हुए विश्वविद्यालय ने तीर्थराज पुष्कर, कर्मयोग, मतदाता साक्षरता, पर्यावरण शिक्षा तथा महर्षि दयानन्द सरस्वती विषयों पर विशेष वैल्यू एडेड पाठ्यक्रम विकसित किए हैं, जिससे विद्यार्थियों में भारतीय सांस्कृतिक चेतना, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व तथा लोकतांत्रिक मूल्यों का विकास हो सके।
उच्च शिक्षा में बहुविषयक अध्ययन को बढ़ावा देने हेतु विश्वविद्यालय ने मल्टीडिसिप्लिनरी पाठ्यक्रम तैयार किए हैं तथा स्नातकोत्तर स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने का प्रारूप भी तैयार कर लिया है। साथ ही विश्वविद्यालय ने SWAYAM पाठ्यक्रमों को अपनाते हुए डिजिटल शिक्षण को प्रोत्साहित किया है, ड्यूल डिग्री प्रणाली लागू की है तथा एक शैक्षणिक वर्ष में दो बार प्रवेश (Biannual Admission) की व्यवस्था को सक्षम निकायों से अनुमोदित कर शीघ्र लागू करने की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के व्यापक क्रियान्वयन हेतु विश्वविद्यालय ने प्रदेश स्तरीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें राजस्थान के माननीय उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री सहित अनेक शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों ने सहभागिता कर नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर मार्गदर्शन प्रदान किया।
शोध एवं नवाचार में ऐतिहासिक सुधार
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने शोध क्षेत्र में भी अनेक अभिनव सुधार लागू किए हैं। विश्वविद्यालय राजस्थान का पहला विश्वविद्यालय बन गया है जिसने SHODHCHAKRA Research Management System को अपनाकर शोध प्रबंधन को पूर्णतः डिजिटल एवं पारदर्शी बनाया है। इससे शोध कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता एवं निगरानी सुनिश्चित होगी।
शोध को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने Enhance Studies Enhance Development (ESED) योजना प्रारम्भ की है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक शिक्षक को शोध परियोजना के लिए दो लाख रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। इससे विश्वविद्यालय में नवाचार आधारित शोध संस्कृति को नई गति मिलेगी।
भारतीय ज्ञान परंपरा को शोध का अभिन्न अंग बनाते हुए विश्वविद्यालय ने प्रत्येक शोध प्रबंध के प्रथम अध्याय में भारतीय ज्ञान परंपरा को अनिवार्य किया है। साथ ही भारतीयकरण आधारित शोध प्रणाली विकसित की गई है तथा शास्त्रार्थ परंपरा को भी शोध प्रक्रिया में समाहित किया गया है, जिससे भारतीय चिंतन एवं आधुनिक अनुसंधान का समन्वय स्थापित हो सके।
शोध की गुणवत्ता बढ़ाने हेतु सिनॉप्सिस प्रारूप, शोध दिशा-निर्देश एवं शोध प्रक्रिया को अद्यतन किया गया है। प्रत्येक शोधार्थी के शोधग्रंथ में लगभग दस नीति-आधारित सुझाव (Policy Implications) सम्मिलित करना अनिवार्य किया गया है ताकि शोध केवल पुस्तकालयों तक सीमित न रहकर नीति निर्माण एवं समाजोपयोगी विकास में भी उपयोगी सिद्ध हो सके।
विश्वविद्यालय ने संबद्ध महाविद्यालयों में पीएच.डी. शुल्क का समानीकरण करते हुए निजी महाविद्यालयों द्वारा अतिरिक्त शुल्क वसूली पर रोक लगाई है। साथ ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ तथा APEX स्वायत्तशासी महाविद्यालय की स्थापना की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग का विस्तार
विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा दी है। गुजरात, जम्मू, हिमाचल प्रदेश तथा पंजाब के केंद्रीय विश्वविद्यालयों के साथ शैक्षणिक सहयोग हेतु एमओयू प्रस्तावित किए गए हैं। साथ ही विश्वविद्यालय में विदेशी विद्यार्थियों के अध्ययन तथा परिसर में Student Diversity बढ़ाने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
इसी अवधि में विश्वविद्यालय ने लगभग 15 प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) संपादित किए हैं, जिनमें बीकानेर टेक्निकल यूनिवर्सिटी, संगम विश्वविद्यालय, एमिटी विश्वविद्यालय, डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थान सम्मिलित हैं। इन समझौतों के माध्यम से संयुक्त शोध, छात्र एवं शिक्षक आदान-प्रदान तथा नवाचार आधारित अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
राष्ट्रीय संगोष्ठियों एवं अकादमिक आयोजनों से मिला नई बौद्धिक संस्कृति को विस्तार
विश्वविद्यालय ने एक वर्ष के दौरान 15 से अधिक राष्ट्रीय संगोष्ठियों, संविधान विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला, सिंधी भाषा पर राष्ट्रीय कार्यशाला तथा विभिन्न समसामयिक विषयों पर अनेक राष्ट्रीय एवं अकादमिक कार्यशालाओं का सफल आयोजन किया। इन आयोजनों ने विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय अकादमिक विमर्श का महत्वपूर्ण केन्द्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिक्षक विकास, विद्यार्थी कल्याण, डिजिटल प्रशासन, आधारभूत संरचना एवं हरित परिसर विकास में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने स्थापित किए नए मानक
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर ने कुलगुरु प्रो. (डॉ.) सुरेश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में केवल शैक्षणिक एवं शोध सुधारों तक ही अपने प्रयासों को सीमित नहीं रखा, बल्कि शिक्षक विकास, कर्मचारी कल्याण, विद्यार्थी हित, डिजिटल प्रशासन, उद्योग-शिक्षा समन्वय, आधारभूत संरचना विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्रों में भी अनेक ऐतिहासिक पहल करते हुए विश्वविद्यालय को आधुनिक, पारदर्शी एवं विद्यार्थी-केंद्रित संस्थान के रूप में विकसित करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
मालवीय मिशन के माध्यम से शिक्षक विकास को मिली नई दिशा
विश्वविद्यालय के मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर (MMTTC) ने एक वर्ष के दौरान शिक्षक क्षमता विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। लगभग 2,500 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप ओरिएंटेशन एवं सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP), शॉर्ट टर्म कोर्स तथा रिफ्रेशर कोर्स के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने प्रदेश ही नहीं, देशभर के शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, डिजिटल शिक्षण, शोध एवं अकादमिक गुणवत्ता के नवीन आयामों से परिचित कराया।
शिक्षकों के कैरियर उन्नयन को गति प्रदान करते हुए विश्वविद्यालय ने Career Advancement Scheme (CAS) के अंतर्गत पदोन्नति की प्रक्रिया को अंतिम चरण तक पहुँचाया है, जिससे लंबे समय से लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
कर्मचारी कल्याण एवं प्रशासनिक संवेदनशीलता को मिली प्राथमिकता
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कर्मचारियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पेंशन फंड में लगभग 50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त योगदान सुनिश्चित किया। इसके अतिरिक्त विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया को अंतिम चरण में पहुँचाया गया तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित मामलों का निराकरण किया गया। राज्य सरकार से संबंधित विभिन्न प्रकरणों को आवश्यक मार्गदर्शन हेतु प्रेषित किया गया तथा दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपात्मक नियुक्ति प्रदान करने की दिशा में भी संवेदनशील पहल की गई।
विद्यार्थी हित सर्वोपरि : रोजगार, सुरक्षा एवं समग्र विकास पर विशेष बल
विद्यार्थियों के समग्र विकास एवं आर्थिक सशक्तीकरण के उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने Learn Earn and Perform Scheme प्रारम्भ की। इस अभिनव योजना के माध्यम से अध्ययनरत विद्यार्थियों को कार्य करते हुए आर्थिक सहयोग प्राप्त होगा। विशेष बात यह है कि नालंदा विश्वविद्यालय के बाद इस प्रकार की योजना लागू करने वाला देश का दूसरा विश्वविद्यालय महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय बना है।
विद्यार्थियों को रोजगार एवं व्यक्तित्व विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने हेतु विश्वविद्यालय में Finishing School, Placement Cell तथा Student Facilitation Centre की स्थापना की गई। परिसर में NCC इकाई की स्थापना अंतिम चरण में है, जबकि Rover-Ranger/Scout व्यवस्था को पुनर्सक्रिय किया गया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की तीन नई इकाइयाँ स्थापित कर विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व एवं नेतृत्व क्षमता के विकास को प्रोत्साहित किया गया है।
उद्योग-शिक्षा समन्वय एवं कौशल विकास को मिला नया आयाम
विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से विभिन्न संस्थाओं के साथ महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन किए हैं। नगर निगम, NASSCOM तथा इंजीनियरिंग कॉलेज के साथ किए गए सहयोग से कौशल विकास, गुणवत्ता आश्वासन तथा व्यवहारिक प्रशिक्षण को नई दिशा मिली है।
रोजगारोन्मुख नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत
नई शिक्षा नीति एवं उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने अनेक आधुनिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रम प्रारम्भ किए हैं। इनमें Certificate in Artificial Intelligence, Certificate in Cyber Security, Diploma in Digital Marketing, एम.ए. संस्कृत वैदिक वाङ्मय तथा एम.ए. अंग्रेजी जैसे पाठ्यक्रम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को उभरते हुए वैश्विक क्षेत्रों में रोजगार की बेहतर संभावनाएँ उपलब्ध होंगी।
डिजिटल प्रशासन एवं ई-गवर्नेंस की दिशा में व्यापक सुधार
विश्वविद्यालय ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, दक्षता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने हेतु व्यापक डिजिटल सुधार लागू किए हैं। राजकाज पोर्टल को अपनाते हुए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को ऑनलाइन प्रणाली से जोड़ा गया है।
विद्यार्थियों को बेहतर सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए ऑनलाइन प्रवेश, ऑनलाइन परीक्षा, ऑन स्क्रीन मूल्यांकन (On Screen Marking), ऑनलाइन पीएच.डी. वाइवा, ऑनलाइन माइग्रेशन, ऑनलाइन अंकतालिका सेवाएँ प्रारम्भ की गई हैं। इसके साथ ही प्रत्येक विभाग एवं अनुभाग के लिए वार्षिक कार्य कैलेंडर, लीव फॉर्मेट, इंचार्ज अधिकारी व्यवस्था, तथा शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कैलेंडर जारी कर कार्य संस्कृति को अधिक उत्तरदायी एवं समयबद्ध बनाया गया है।
आधारभूत संरचना विकास को मिली नई गति
विश्वविद्यालय ने आधारभूत सुविधाओं के विस्तार एवं प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़े स्तर पर कार्य प्रारम्भ किए हैं। RUSA योजना के अंतर्गत लगभग 70 लाख रुपये के वैज्ञानिक उपकरणों की खरीद हेतु निविदा जारी की गई है, जबकि वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, सूक्ष्मजीव विज्ञान एवं रसायन विज्ञान विभागों के लिए लगभग 1.80 करोड़ रुपये की अत्याधुनिक प्रयोगशाला उपकरण खरीद प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गई है।
इसी क्रम में विश्वविद्यालय परिसर में फर्नीचर क्रय, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष, तथा स्मार्ट बोर्ड की स्थापना के प्रस्ताव भी तैयार किए गए हैं, जिससे शिक्षण एवं प्रशासन दोनों अधिक आधुनिक एवं प्रभावी बन सकेंगे।
हरित परिसर एवं पर्यावरण संरक्षण में बना राज्य का अग्रणी विश्वविद्यालय
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए परिसर को ग्रीन, स्मार्ट एवं जीरो कार्बन कैंपस के रूप में विकसित करने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की हैं।
विश्वविद्यालय में बायोफ्यूल कैंपस, स्मार्ट कैंपस, पेट्रोल एवं डीजल वाहनों पर प्रतिबंध, बायोडायवर्सिटी संरक्षण, रूफटॉप सोलर सिस्टम, कम्पोस्ट यूनिट, इलेक्ट्रिक वाहन संचालन, बायो रिसोर्स सेंटर, वृहद वृक्षारोपण अभियान, ग्रीन कैंपस विकास, तथा जीरो कार्बन कैंपस की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।
पर्यावरणीय तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हुए विश्वविद्यालय ने पौधों की QR Code Tagging प्रारम्भ की है तथा भविष्य में IoT आधारित Plant Monitoring System लागू करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अतिरिक्त Solid Waste Management तथा स्वच्छ परिसर अभियान को नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है, जिससे विश्वविद्यालय परिसर पर्यावरण संरक्षण का आदर्श मॉडल बनता जा रहा है।
परीक्षा सुधार, सुशासन, भारतीय संस्कृति, वित्तीय अनुशासन एवं आधारभूत विकास के माध्यम से महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने गढ़ी उत्कृष्टता की नई पहचान
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर ने कुलगुरु प्रो. (डॉ.) सुरेश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में गत एक वर्ष के दौरान शिक्षा एवं शोध सुधारों के साथ-साथ गुणवत्ता आश्वासन, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, उद्योग-शिक्षा समन्वय, भारतीय ज्ञान परंपरा, वित्तीय अनुशासन, आधारभूत संरचना विकास तथा सुशासन के क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। इन पहलों ने विश्वविद्यालय को आधुनिक, पारदर्शी, उत्तरदायी एवं मूल्यपरक उच्च शिक्षा संस्थान के रूप में नई पहचान प्रदान की है।
गुणवत्ता आश्वासन एवं सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ
विश्वविद्यालय ने गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाते हुए संस्थागत गुणवत्ता संवर्धन की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। कुलगुरु के कार्यकाल में विश्वविद्यालय का प्रथम दीक्षांत समारोह अत्यंत गरिमामय एवं सफलतापूर्वक आयोजित किया गया, जिसमें माननीय प्रधानमंत्री का संदेश प्राप्त हुआ तथा माननीय कुलाधिपति सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
विश्वविद्यालय में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) को सुदृढ़ किया गया तथा आगामी NAAC प्रत्यायन (Accreditation) की व्यापक तैयारियाँ प्रारम्भ कर दी गई हैं। यह पहल विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
राष्ट्रीय स्तर पर कुलगुरु का नेतृत्व एवं विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा में अभूतपूर्व वृद्धि
कुलगुरु प्रो. (डॉ.) सुरेश कुमार अग्रवाल की राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न महत्वपूर्ण संस्थाओं में सक्रिय भूमिका के कारण विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वे रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन (RIE) के अध्यक्ष, CBSE गवर्निंग बॉडी के सदस्य तथा देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों की सिंडिकेट, बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट एवं चयन समितियों के सदस्य के रूप में उच्च शिक्षा के नीति निर्धारण में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
उद्योग-शिक्षा समन्वय को मिला नया आयाम
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विश्वविद्यालय ने उद्योग एवं शिक्षा के मध्य सशक्त समन्वय स्थापित करने की दिशा में उल्लेखनीय पहल की है। स्वदेशी, CHARGE तथा लगभग 15 शैक्षणिक संस्थानों के साथ उद्योग-अकादमिक सहयोग विकसित किया गया है। विभिन्न सिविक बॉडीज़ के साथ भी समझौता ज्ञापन संपादित किए गए हैं।
विश्वविद्यालय ने राजस्थान का प्रथम Swadeshi Consortium स्थापित करने का गौरव प्राप्त किया है। इसके माध्यम से उद्योग आधारित Skill Training Programmes संचालित किए जाएंगे। साथ ही विश्वविद्यालय में Professor of Practice (Honorary) की नियुक्ति की व्यवस्था प्रारम्भ कर उद्योग जगत के विशेषज्ञों को सीधे शिक्षण एवं प्रशिक्षण प्रक्रिया से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
सोशल मीडिया एवं जनसंपर्क को मिली नई पहचान
विश्वविद्यालय ने अपनी जनसंपर्क प्रणाली को आधुनिक स्वरूप प्रदान करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अत्यंत सक्रिय बनाया। विश्वविद्यालय की विभिन्न उपलब्धियों को डिजिटल माध्यमों से व्यापक स्तर पर प्रचारित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय को लाखों व्यूअरशिप प्राप्त हुई।
विश्वविद्यालय का WhatsApp Channel प्रारम्भ किया गया तथा विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट को पूर्णतः अद्यतन एवं आधुनिक स्वरूप प्रदान किया गया। इस नवीन वेबसाइट का लोकार्पण स्वयं माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति द्वारा किया गया।
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता एवं समयबद्धता की ऐतिहासिक पहल
विश्वविद्यालय ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करते हुए नकल पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया। शिक्षकों, प्रशासन, पुलिस तथा विद्यार्थी संगठनों के सहयोग से निष्पक्ष एवं पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
निजी महाविद्यालयों से परीक्षा केन्द्र हटाकर उन्हें सरकारी महाविद्यालयों में स्थानांतरित किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में Centralized Examination Centres की स्थापना की दिशा में कार्य प्रारम्भ किया गया। परीक्षा परिणामों की समयबद्ध घोषणा, शैक्षणिक सत्र का नियमितीकरण, संबद्ध महाविद्यालयों के साथ नियमित ऑनलाइन बैठकें तथा Online Screen Marking प्रणाली प्रारम्भ कर मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं तेज बनाया गया। साथ ही अंकतालिका, माइग्रेशन सहित विभिन्न सेवाओं को पूर्णतः डिजिटल किया गया।
खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में रचा नया इतिहास
विश्वविद्यालय के 39 वर्षों के इतिहास में पहली बार विश्वविद्यालय परिसर में अंतर महाविद्यालय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इसी प्रकार भव्य Inter College Cultural Competition आयोजित कर विद्यार्थियों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया गया।
विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय एवं पश्चिम क्षेत्रीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित कीं। वाग्मिता प्रतियोगिता में छात्रा परी कोठारी ने राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय स्थान प्राप्त किया, जबकि संगीत एवं साहित्यिक प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय ने पश्चिम क्षेत्र में अनेक पदक अर्जित कर अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ किया।
भारतीय संस्कृति एवं गुरुकुल परंपरा का पुनर्स्थापन
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने अपनी पहचान भारतीय संस्कृति एवं वैदिक परंपराओं पर आधारित विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करने की दिशा में विशेष प्रयास किए हैं।
विश्वविद्यालय परिसर में प्रतिदिन गायत्री मंत्र का प्रसारण, सभी विभागों एवं अनुभागों में दैनिक प्रार्थना, प्रत्येक सोमवार सामूहिक प्रार्थना तथा प्रत्येक शुभ कार्य से पूर्व हवन की परंपरा प्रारम्भ की गई। इन पहलों के माध्यम से विश्वविद्यालय में गुरुकुल जैसा शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक वातावरण विकसित किया गया है।
राष्ट्रीय स्तर की विशिष्ट हस्तियों का विश्वविद्यालय आगमन
एक वर्ष की अवधि में विश्वविद्यालय में अनेक राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय विशिष्ट व्यक्तित्वों का आगमन हुआ। इनमें माननीय कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागड़े का चार बार आगमन, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष प्रो. वासुदेव देवनानी, उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी, सांसद दामोदर अग्रवाल, श्री ओंकार सिंह लखावत, विधायक श्रीमती अनीता भदेल, श्री ओमप्रकाश भड़ाना, प्रो. नारायण लाल गुप्ता, श्री महेंद्र कपूर, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, राष्ट्रीय शिक्षाविद्, उद्योग जगत एवं सामाजिक क्षेत्र की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ सम्मिलित हैं। इन आगंतुकों की उपस्थिति ने विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को और अधिक सुदृढ़ किया।
प्रशासनिक एवं संस्थागत सुधारों को मिली नई गति
विश्वविद्यालय ने डी.लिट. उपाधि प्रदान करने की प्रक्रिया प्रारम्भ की। परिसर विकास को गति देने के लिए दो अभियंताओं की प्रतिनियुक्ति पर नियुक्ति की गई। Rajasthan Common Admission Services (RCAS) का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया तथा Learning Management System (LMS) लागू करने की दिशा में तैयारी प्रारम्भ की गई।
विश्वविद्यालय परिसर को अतिक्रमण मुक्त बनाने हेतु प्रभावी कार्रवाई प्रारम्भ की गई। साथ ही शिक्षक एवं कर्मचारी भर्ती के लिए रोस्टर अनुमोदन एवं वित्तीय स्वीकृति हेतु राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजे गए। विश्वविद्यालय परिसर में स्वास्थ्य जांच शिविर, रक्तदान शिविर तथा चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ का सम्मान आयोजित कर सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया गया।
CSR आधारित विकास कार्यों को मिली गति
कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में अनेक विकास कार्य प्रारम्भ किए गए। परिसर में ई-ऑटो सेवा, हाई-मास्ट लाइट्स की स्थापना तथा वर्षों से जलभराव से प्रभावित दो भवनों की समस्या का समाधान प्रारम्भ किया गया। लगभग 12–13 वर्षों से जलभराव के कारण क्षतिग्रस्त हो रहे भवनों को जलमुक्त कराया गया तथा AU बैंक के CSR सहयोग से इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कार्य प्रारम्भ किया गया।
वित्तीय अनुशासन बना सुशासन का आधार
कुलगुरु के नेतृत्व में विश्वविद्यालय में वित्तीय अनुशासन स्थापित किया गया। आउटसोर्सिंग व्यय में लगभग 25 प्रतिशत की कमी लाई गई तथा UGC को 90 लाख रुपये की लंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्र (UC) प्रेषित किए गए। MMTTC का पुनः संचालन प्रारम्भ किया गया तथा Rate Contract System लागू कर खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई।
सरकारी वाहनों के उपयोग में मितव्ययिता अपनाई गई। कुलगुरु द्वारा निजी वाहन उपयोग के बदले प्राप्त राशि विश्वविद्यालय कोष में जमा कराने जैसी अनुकरणीय पहल की गई तथा अनावश्यक व्यय पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया।
आधारभूत संरचना के व्यापक नवीनीकरण एवं मरम्मत कार्य
विश्वविद्यालय परिसर में अनेक भवनों एवं आधारभूत सुविधाओं का व्यापक नवीनीकरण किया गया। इनमें नागार्जुन भवन, 11 केवी विद्युत प्रणाली का पुनर्स्थापन, 70 प्रतिशत सीमा दीवार निर्माण, वाल्मीकि भवन, चाणक्य भवन, महाराणा प्रताप भवन, सारस्वत भवन की रूफ वाटरप्रूफिंग, मोटर गैरेज, धन्वन्तरी भवन, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था, शिक्षा संकुल, मुख्य प्रवेश द्वार, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भवन, विश्वकर्मा भवन, गार्गी एवं नचिकेता छात्रावास, तथा नए ट्यूबवेल निर्माण जैसे अनेक कार्य प्रगति पर हैं अथवा पूर्ण किए जा चुके हैं।
अतिक्रमण हटाने की प्रभावी कार्रवाई
विश्वविद्यालय भूमि को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए व्यापक अभियान प्रारम्भ किया गया। रेलवे अतिक्रमण प्रकरण में SDM स्तर पर आदेश प्राप्त हुए तथा जिला प्रशासन द्वारा भूमि का चिन्हांकन कराया गया। अनधिकृत कब्जे हटाने की प्रक्रिया प्रारम्भ की गई है। कालबेलिया बस्ती के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार एवं संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया गया तथा अन्य अतिक्रमणों को हटाने के लिए भी संबंधित अधिकारियों को पत्र प्रेषित किए गए।
आगामी कार्ययोजना : उत्कृष्टता की ओर निरंतर अग्रसर विश्वविद्यालय
विश्वविद्यालय ने आगामी वर्षों के लिए व्यापक विकास रोडमैप तैयार किया है। इसमें LMS आधारित पूर्ण डिजिटल विश्वविद्यालय, NAAC प्रत्यायन, शिक्षक एवं कर्मचारी भर्ती, Campus Maintenance System, वित्तीय अनुशासन का और सुदृढ़ीकरण, अतिक्रमण मुक्त परिसर, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, CSR आधारित विकास कार्य, हरित एवं स्मार्ट परिसर का विस्तार, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन, उद्योग आधारित रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का विस्तार तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पूर्ण डिजिटलीकरण प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
कुलगुरु का संदेश
इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. (डॉ.) सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा—
“एक वर्ष की यह यात्रा केवल उपलब्धियों का विवरण नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में उत्तरदायी, पारदर्शी, शोधोन्मुख, विद्यार्थी-केंद्रित एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित उत्कृष्ट उच्च शिक्षा व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त शुरुआत है। हमारा लक्ष्य महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों की श्रेणी में स्थापित करना है। आने वाले वर्षों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध, नवाचार, सुशासन, डिजिटल परिवर्तन एवं वैश्विक सहयोग के माध्यम से विश्वविद्यालय नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा।”
एक वर्ष की अवधि में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, शोध एवं नवाचार, डिजिटल प्रशासन, परीक्षा सुधार, विद्यार्थी कल्याण, हरित परिसर विकास, वित्तीय अनुशासन, आधारभूत संरचना उन्नयन, भारतीय संस्कृति के पुनर्स्थापन तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे लगभग प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन स्थापित किए हैं। यह उपलब्धियाँ विश्वविद्यालय को केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के अग्रणी राज्य विश्वविद्यालयों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक सुदृढ़ आधार प्रदान करती हैं।
(प्रो. शिव प्रसाद )
मीडिया प्रभारी