महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की भव्य ‘तिरंगा रैली’, कुलगुरु ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
अजमेर, 10 अगस्त।
स्वाधीनता दिवस के पावन अवसर से पूर्व राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता और देश के प्रति कर्तव्यबोध की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में सोमवार को विद्यार्थियों की भव्य ‘तिरंगा रैली’ का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस रैली में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं विश्वविद्यालय अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने तिरंगा रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर पूरा विश्वविद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति के वातावरण से ओत-प्रोत दिखाई दिया। हाथों में तिरंगा लेकर विद्यार्थियों ने देश की एकता, अखंडता और गौरव का संदेश दिया तथा स्वाधीनता दिवस के उत्सव को राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों से जोड़ने का संकल्प लिया।
‘तिरंगा केवल ध्वज नहीं, भारत की राष्ट्रीय एकता और विकास यात्रा का प्रतीक’
रैली को संबोधित करते हुए कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि तिरंगा हमारी राष्ट्रीय एकता, विरासत और निरंतर प्रगति का जीवंत प्रतीक है। तिरंगे के तीनों रंग भारत के जीवन-मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की दिशा को स्पष्ट करते हैं।
उन्होंने कहा कि तिरंगे का केसरिया रंग त्याग, समर्पण और बलिदान का प्रतीक है, सफेद रंग शांति, सहयोग, सौहार्द और सद्भाव का संदेश देता है, जबकि हरा रंग समृद्धि, विकास और निरंतर प्रगति का प्रतीक है।
‘तिरंगा हमारी आन, शान और दायित्व का स्मरण कराता है’
प्रो. अग्रवाल ने कहा कि “तिरंगा हमारी आन है, शान है और हमारे राष्ट्रीय दायित्वों का सतत स्मरण कराने वाला गौरव-चिह्न है।”
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होगा जब प्रत्येक नागरिक यह संकल्प ले कि वह राष्ट्र के लिए अपना सर्वोत्तम योगदान देगा।
तिरंगे के इतिहास से जुड़ी गौरवपूर्ण यात्रा का उल्लेख
प्रो. अग्रवाल ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का विकास स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि 1906 में ध्वज की प्रारंभिक अवधारणा, 1931 में तीन रंगों एवं चरखे के साथ स्वरूप निर्धारण तथा 22 जुलाई 1947 को वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज का अंतिम रूप स्वीकार किया गया।
उन्होंने कहा कि तिरंगे में स्थित अशोक चक्र भारत की प्राचीन विरासत और आधुनिक प्रगति के बीच निरंतरता का प्रतीक है, जो गतिशीलता और आगे बढ़ते रहने का संदेश देता है।
युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान
कुलगुरु ने कहा कि आज का युवा भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे शिक्षा, शोध, नवाचार, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि तिरंगे के तीन रंगों में निहित संदेश—त्याग, शांति और विकास—को जीवन में आत्मसात करना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है।
आगामी कार्यक्रमों की श्रृंखला घोषित—राष्ट्रभाव और वैचारिक चेतना पर केंद्रित आयोजन
कुलगुरु ने इस अवसर पर स्वाधीनता सप्ताह के अंतर्गत विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले आगामी कार्यक्रमों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में राष्ट्रभक्ति, वैचारिक चेतना और ऐतिहासिक स्मरण को केंद्र में रखते हुए निम्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे— 11 अगस्त, 2026 दोपहर 12:30 बजे राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ एवं राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का सामूहिक गायन संविधान पार्क में आयोजित किया जायेगा | 12 अगस्त, 2026 प्रातः ११ बजे से “महर्षि दयानंद सरस्वती का राष्ट्र चिंतन और स्वतंत्रता आन्दोलन की वैचारिक पृष्ठभूमि निर्माण में योगदान” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी स्वराज सभागार में आयोजित होगी | 13 अगस्त, 2026 को प्रातः ११ बजे से विभाजन विभीषिका दिवस पर ‘विभाजन की विभीषिका से विस्थापन की अमर गाथा तक’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जायेगा एवं भारतीय सेना द्वारा भारत के पराक्रम व सैन्य तैयारी पर आधारित फिल्म प्रदर्शन स्वराज सभागार में होगा
तिरंगा रैली का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) समन्वयक एवं अधिष्ठाता, छात्र कल्याण विभाग के समन्वय से किया गया। स्वाधीनता दिवस कार्यक्रमों के लिए विश्वविद्यालय सामान्य प्रशासन को नोडल अधिकारी बनाया गया है | रैली में शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे परिसर में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और एकता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।