अजमेर। मुल्क के मुख़तलिफ़ हिस्सों से बड़ी तादाद में आए ज़ायरीनों की मौजूदगी में शहनंशाह – ए-हिन्दुस्तान हज़रत ख़्वाजा मोइनूद्दीन हसन चिश्ती का 801वां उर्स मंगल के रोज़ दस्तूर के मुताबिक झंडा चढाने की रस्म के साथ शुरू हो गया। इस मौके पर दरगाह शरीफ के बुलंद दरवाज़े पर भीलवाड़ा से आए लाल मौहम्मद ग़ौरी के वारिस फख़रूद्दीन ग़ौरी ने हज़ारांे अक़ीदतमंदांे की मौजूदगी में झंडे की रस्म अदा की और झंडा चढ़ाया। झंडे का जुलूस दरगाह गैस्ट हाउस से होकर दरगाह के निजाम गेट पहुंचा।
इस जूलूस के साथ दरगाह के शाही कव्वाल असरार हुसैन सूफीयाना कलाम पेश करते हुए चल रहे थे। जुलूस में दोनो अंजुमनो के खुद्दाम हज़रात मौजूद थे। दरगाह शरीफ़ में होने वाली रोशनी से कब्ल जब बुलंद दरवाज़े पर झंडा चढ़ाया गया तो खुशी में बड़े पीर की पहाड़ी से 25 तोपें बतौर सलामी दाग़ी गई और दरगाह के नक्कार ख़ाने में शादियाने बजाये गये। साथ ही मौजूद लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर झंडा चढ़ने की मुबारकबाद दी।
झंडा चढ़ाने की रस्म के दौरान दरगाह में मौजूद भारी तादाद मे पुलिस महकमा इतजामात को नियंत्रीत कर रहा था। देश और दुनिया से लाखो की तादाद में अकिदतमंद ख्वाजा के उर्स में शरीक होंगें। इसी के साथ ख्वाजा साहब की होने वाली खिदमत का वक्त भी बदल जायेगा, ख्वाजा साहब के आस्ताने में 3 बजे होने वाली खिदमत उर्स के दौरान बंद हो जायेगी। अब से रात 8 बजे खिदमत होने लगेगी जो उर्स में छठी के कुल के 1 दिन पहले तक इसी समय पर होगी। इस दौरान आस्ताना मामुल होने का वक्त वही रहेगा। उर्स की ओपचारिक शुरूआत रजब माह का चांद दिखने के साथ 11 या 12 मई से होगी।