गृहिणी राष्ट्रनिर्माता है तो हिंसा की शिकार क्यों?
भारतीय समाज में महिलाओं को सशक्त बनाने के दावे लंबे समय से किए जाते रहे हैं। उन्हें ‘आधी आबादी’ और विकास की समान भागीदार कहा जाता है। शिक्षा, रोजगार, राजनीति और नेतृत्व के क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं बनाई जाती हैं। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने … Read more