पुस्तक समीक्षा- अबोली की डायरी लेखिका- जुवि शर्मा
और चाहिए? बस? पेट भर गया । उसके बाद दोबारा मांगा नहीं गया, आधे पेट हाथ धोना जठराग्नि को और प्रबल कर देता है। स्त्री अस्तित्व ,अस्मिता, आत्मसम्मान के अनगिनत आघात पग पग पर उसे आत्महत्या के लिए प्रेरित करते हैं। मन के आंतरिक द्वंद, अवसाद, अंधकार से लेखिका धीरे-धीरे कैसे प्रकाश की ओर बढ़ती … Read more