मुंबई। आर्थिक वृद्घि में गिरावट तथा ऊंची ब्याज दरों की वजह से बैंकों की कर्ज में फंसी राशि काफी तेजी से बढ़ी है। पिछले साल दिसंबर तक बैंकों की विभिन्न क्षेत्रों में फंसे कर्ज की राशि 42.6 फीसदी बढ़कर 1830 अरब रूपए तक पहुंच गई।
केयर रेटिंग के अनुसार, बैंकिंग प्रणाली की गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) 42.6 फीसदी बढ़कर 1.83 लाख करोड़ रूपए हो गया, जो एक साल पहले 1.28 लाख करोड़ रूपए पर थीं। केयर रेटिंग्स ने कहा कि ऊंची ब्याज दरों की वजह से कंपनियों की ऋण वापसी की क्षमता प्रभावित हुई है। इससे बैंकों की परिसंपत्ति की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई। बैंकिंग क्षेत्र में सकल गैर निष्पादित आस्तियों का अनुपात दिसंबर, 2012 में बढ़कर 3.53 फीसदी हो गया, जो दिसंबर, 2011 में 2.88 फीसदी पर था।
केयर के अनुसार, गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) में इजाफे में सबसे ज्यादा योगदान सरकारी बैंकों का रहा। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एनपीए 48 फीसदी बढ़ा। वहीं निजी क्षेत्र के बैंकों के एनपीए में 10 फीसदी का इजाफा हुआ। सरकारी बैंकों के ऋण पर सकल गैर निष्पादित आस्तियां 3.92 फीसदी रहीं, जो मार्च, 2012 के अंत तक 3.02 फीसदी थीं। निजी क्षेत्र के बैंकों के मामले में गैर निष्पादित आस्तियां मामूली घटकर 1.97 फीसदी रह गई, जो मार्च, 2012 के अंत तक 2 फीसदी थीं।
उम्मीद कम
इंडिया रेटिंग ने कहा है कि मार्च, 2012 के बाद से पुनगर्ठित परिसंपत्तियां 23 फीसदी बढ़कर 3.2 लाख करोड़ रूपए रही हैं। जो कुल ऋण का 6.1 फीसदी बैठता है। मार्च, 2011 के अंत तक पुनर्गठित ऋण कुल ऋण का 5.4 फीसदी था। हालांकि, इंडिया रेटिंग ने कहा है कि उसे ऋण वृद्घि उम्मीद से कम रहने की आशंका नहीं है।
मार्जिन स्थिर
निकट भविष्य में बैंकों का मार्जिन भी स्थिर रहेगा। हालांकि एजेंसी का कहना है कि शुरूआती तीन तिमाहियों में बैंकिंग क्षे˜ा में मार्जिन पर दबाव रह सकता है, क्योंकि इस दौरान जमा की ऊंची लागत, ऋण वृद्घि में गिरावट और ब्याज दरों में बदलाव के चलते यह स्थिति रह सकती है।