श्रद्धा – सुमन : सुनील शर्मा ‘‘शिवानन्द’’
वैश्वीकरण और प्रौद्योगिकी की आंधी में जब राष्ट्रीय सीमा टूट रही हो, मूल्य अप्रांसंगिक बनते जा रहे हो और हमारे रिश्ते हम नहीं, कहीं दूर कोई और बना रहा हो, तो पत्रकारिता के किसी स्वतंत्र अस्तित्व के बारे में आशंकित होना स्वाभाविक है। अविश्वास अनास्था और मूल्य निरपेक्षता के इस संकट काल में पत्रकारिता से … Read more