वैदिक साक्षात्कार लेने नहीं बल्कि देने गए थे

-अंबरीश कुमार- नई दिल्ली। राजनैतिक जनसंपर्क के महारथी पत्रकार वेद प्रताप वैदिक सिर्फ मोदी की छवि बनाने के चक्कर में फंस गए है। अगर वे पकिस्तान सिर्फ हाफिज सईद का इंटरव्यू लेने गए होते तो इतना हंगामा नहीं मचता। पर वे मोदी सरकार के अघोषित ब्रांड अम्बेसडर बन कर पकिस्तान गए और जो किया वह … Read more

आई.एस.एस. प्रशिक्षु द्वारा प्रशिक्षण में कोताही

देश में प्रशासनिक अधिकारियों को सशक्त रूप से प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है। इस कारण से प्रशासनिक कार्यों में गिरावट आ रही है। देश के प्रत्येक क्षेत्र, चाहे वह शिक्षा, नौकरी, व्यापार-व्यवसाय हो। विशेषतः सरकारी विभागों की कार्य विधि में लगातार त्रुटि और कमियाँ दिखाई देती है। आये दिन सुर्खियों में खबर आती है … Read more

पहले गोडसे को नकारा, अब वैदिक को

-रणधीर सिंह सुमन– महात्मा गाँधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने नाथूराम गोडसे से अपने संबंधों से इनकार कर दिया था और तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को माफीनामा लिख कर अपने संगठन के ऊपर से प्रतिबन्ध हटवाया था कि वह सांस्कृतिक संगठन के रूप में काम करेगा राजनीति से … Read more

सईद का साक्षात्कार लेने के बाद बढा वैदिक का घमंड

टाइम्स नाउ चैनल के न्यूज़ ऑवर कार्यक्रम में हाफ़िज़ सईद का इंटरव्यू ले कर चर्चा में आये डॉ० वेद प्रताप वैदिक खुद अपने इंटरव्यू के बारे में बताने और उस पर चर्चा के लिए मौजूद थे लेकिन अर्नब गोस्वामी के किसी सवाल का जवाब देने से पहले ही वैदिक भड़क गए और अर्नब को नैतिकता … Read more

पत्रकार बिरादरी को नीचे दिखाया है वैदिक ने-ओम थानवी

पाकिस्तान में आतंकी सरगना हाफिज सईद से मुलाकात पर जनसत्ता के संपादक ओम थानवी ने भी गंभीर सवाल उठाये हैं। अपने फेसबुक पेज पर ओम थानवी ने दोनों की मुलाकात पर सवाल उठाते हुए लिखा है कि पत्रकार के भेष में वेद प्रताप वैदिक पता नहीं कौन सी राजनीति कर रहे हैं। ओम थानवी ने अपने … Read more

संघ की शह पर शहं’शाह’

-पुण्य प्रसून वाजपेयी– जिस खामोशी से अमित शाह बीजेपी हेडक्वार्टर में बतौर अध्यक्ष होकर घुसे हैं उसने पोटली और ब्रीफकेस के आसरे राजनीति करने वालो की नींद उडा दी है। अध्यक्ष बनने के बाद भी खामोशी और खामोशी के साथ राज्यवार बीजेपी अध्यक्षों को बदलने की कवायद अमित शाह का पहला सियासी मंत्र है। इतना ही … Read more

गरीब इस देश का नागरिक है भी या नहीं

-सुन्दर लोहिया- इन्दिरा गान्धी से लेकर नरेन्द्र मोदी तक की सरकारें इस देश के गरीब की जीवन रेखा तय नहीं कर पाई हैं। यह अकारण नहीं है। दोनों पार्टियों के लिए गरीबी उनकी सत्ता को बनाये रखने की आवश्यक शर्त जैसी बन गई है। गरीब के नाम पर हाउसिंग सोसायटी बनाकर सरकारी ज़मीन को लीज़ … Read more

नार्को टेस्ट होना चाहिए गिरिराज सिंह का

-भूपेन्द्र सिंह रावत- लोकसभा चुनाव के दौरान नरेन्द्र मोदी के विरोधियों और भाजपा को वोट न देने वालों को पाकिस्तान भेजने की धमकी भरे भड़काऊ भाषण के कारण चर्चा में रहने वाले भाजपा नेता गिरिराज सिंह सांसद बनने के बाद एक बार फिर चर्चा में हैं। लेकिन इस बार वे चर्चा में अपने भाषणों के कारण नहीं बल्कि उनके पटना … Read more

नए बजट से सोनिया-राहुल की बढ सकती है दिक्कत

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी की बहुमत हिस्सेदारी वाली कंपनी यंग इंडियन नैशनल हेरल्ड अखबार की मालिकाना कंपनी द असोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड का अधिग्रहण करने को लेकर बड़ी मुश्किल में फंस सकती है। इसकी वजह बजट में बनाया गया एक नया नियम है। बजट में इनकम टैक्स ऐक्ट में संशोधन के जरिए यह प्रस्ताव … Read more

कड़े फ़ैसलों से डर क्यों गये जेटली?

-क़मर वहीद नक़वी- बजट से हमें कुछ करिश्मे की उम्मीद थी कि कुछ बड़ा कमाल होगा, कोई नयी बात होगी, कोई नयी दृष्टि होगी, कोई नयी राह होगी, लेकिन जेटली जी ने बड़ी ‘डिफ़ेन्सिव’ बल्लेबाज़ी की। कुल मिला कर बजट सब साधने, सबको ख़ुश करने की कोशिश करता है। बजट में मैन्यूफ़ैक्चरिंग, इंफ़्रास्ट्रक्चर, कृषि, स्किल डेवलपमेंट … Read more

अच्छे दिन वाला विलाप भ्रमित करने वाला है

-कुमार सुशांत- बहुत सारे लोग ये पूछते हैं- ‘अच्छे दिन आएंगे, क्या हुआ, अच्छे दिन तो आए नहीं, महंगाई बढ़ गई, राजग सरकार द्वारा घोषित पहले रेल बजट में कोई राहत भी नहीं मिली’। ठीक है उनका सवाल जायज है। लेकिन सवाल है कि अच्छे दिन का मापदंड क्या हो ? केवल चीजों के दाम को … Read more

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