गुजरात के चुनाव में आदिवासियों की उपेक्षा क्यों?

गुजरात में 9 और 14 तारीख को होने वाले विधानसभा चुनाव पर पूरे देश की निगाहें लगी हुई हैं और जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, राजनीतिक दलों की आक्रामकता बढ़ती जा रही है। नोटबंदी और जीएसटी के नेगेटिव पक्ष को छोड़कर कांग्रेस के पास कोई मुद्दा ही नहीं है। भाजपा भी मुद्दाविहीन दिखाई … Read more

भंसाली जी! इतिहास प्रयोगधर्मी का सेट नहीं हो सकता

हाई बजट, ग्रेट स्‍ट्रैटजी, भव्‍य सेट और टॉप के कलाकारों के साथ अपनी फिल्‍म को ‘महान’ बताने के ‘आदी’ रहे संजय लीला भंसाली ने संभवत: रानी पद्मिनी के जौहर को हल्‍के में ले लिया। यूं आदतन उन्‍होंने बाजीराव-मस्‍तानी में भी वीरता को दरकिनार कर पेशवा बाजीराव को भी शराबी और महबूबा मस्‍तानी के प्रेम में … Read more

रॉफेल या फेल

यूँ तो हमारे देश में सत्ता परिवर्तन बहुत ही सुगमता और जनतांत्रिक तरीके से हो जाता है लेकिन सरकारें बदलने के बाद आरोप प्रत्यारोप और स्थापित नीतियों मे तक में बदलाव होने लगता है , जिसका फायदा और नुकसान सीधे जनता को झेलना पड़ता है ? लेकिन जब यही बदलाव रक्षा निति और हथियारों की … Read more

क्या हार्दिक मान सम्मान की परिभाषा भी जानते हैं?

मैं वो भारत हूँ जो समूचे विश्व के सामने अपने गौरवशाली अतीत पर इठलाता हूँ। गर्व करता हूँ अपनी सभ्यता और अपनी संस्कृति पर जो समूचे विश्व को अपनी ओर आकर्षित करती है। अभिमान होता है उन आदर्शों पर जो हमारे समाज के महानायक हमें विरासत में देकर गए हैं। कोशिश करता हूँ उन आदर्शों … Read more

खबर आई है कि उनका दम घुट रहा है…

सुना है कि धुंध ने दिल्‍ली में डेरा जमा लिया है। ये कैसी धुंध है जो एक कसमसाती ठंड के आगमन की सूचना लेकर नहीं आती बल्‍कि एक ज़हर की चादर हमारे अस्‍तित्‍व पर जमा करती चली आती है। इस धुंध ने आदमी की उस ख्‍वाइश को तिनका-तिनका कर दिया है जो अपने हर काम … Read more

महिलाओं की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की बदहाली क्यों?

देश में अस्तित्व एवं अस्मिता की दृष्टि से ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से महिलाओं के हालात बदतर एवं चिन्तनीय है। देखा जा रहा है कि किसी भी क्षेत्र में तमाम महिला जागृति के कार्यक्रमों एवं सरकार की योजनाओं के बावजूद महिलाओं का शोषण होता है, उनके अधिकारों का हनन होता है, इज्जज लूटी … Read more

संकीर्णता नहीं, स्वस्थ राजनीतिक मुद्दें हो

मुंबई में पिछले दो सप्ताह से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बाहर से आकर बसे और कारोबार कर रहे लोगों के खिलाफ हिंसक आंदोलन चला रही है, उन्हें खदेड़ रही है, उनके रोजी-रोटी को बाधित कर रही है, इस तरह अपनी राजनीति को मजबूत करने की सोच एवं रणनीति लोकतांत्रिक दृष्टि से कत्तई उचित नहीं है। देश … Read more

मानव रोजगार कम करते रोबोट

समय परिवर्तनशील है। समय के साथ इंसान बदल जाता है, इंसानी जीवन के तौर-तरीके बदल जाते है। यही कारण है जो इंसान एक समय में नंगा घूमा करता था, कन्द मूल खाकर अपना पेट भरता था। आज वही इंसान विज्ञान की प्रगति के कारण इतना सक्षम हो गया कि उसने अपने जैसीे हूबहू मशीन का … Read more

आधार को लेकर ममता के तेवर

एक बार फिर आधार की अनिवार्यता का प्रश्न चर्चा में हैं। यह इसलिये चर्चा में है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे चुनौती देने का दुस्साहस किया है। इसके लिये उन्होंने सरकारी योजनाओं को आधार से जोड़ने के खिलाफ सुप्रीम कोई में याचिका दाखिल कर दी। यह तो अच्छा हुआ कि उन्हें … Read more

गुजरात के भाल पर चुनावी महासंग्राम

गुजरात विधानसभा के चुनाव घोषित होते ही देश में उसके संभावित परिणामों को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। वैसे तो सभी चुनाव चुनौतीपूर्ण होते हैं, परंतु गुजरात चुनावों को लेकर कुछ ज्यादा ही उत्सुकता है, क्योंकि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृहराज्य है। इस बार के वहां के चुनाव परिणाम देश की भावी राजनीति की … Read more

सरकार की प्रथम जबाबदेही जनता के प्रति है लोकसेवकों के प्रति नहीं

वैसे तो भारत एक लोकतांत्रिक देश है। अगर परिभाषा की बात की जाए तो यहाँ जनता के द्वारा जनता के लिए और जनता का ही शासन है लेकिन राजस्थान सरकार के एक ताजा अध्यादेश ने लोकतंत्र की इस परिभाषा की धज्जियां उड़ाने की एक असफल कोशिश की। हालांकी जिस प्रकार विधानसभा में बहुमत होने के … Read more

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