मोदी तुम बहुत याद आये

मोदी तुम कितने बहादुर थे जब तुमने कहा था की एक पिद्दी सा देश हमें आँखें दिखाता है और हम ओबामा ओबामा कहते हैं,लव लेटर लिखते हैं कितना दम देखा था भोली जनता ने तुम्हारी बातों में, और आज तुम्हारे होते हुए उस पिद्दी से देश के प्रधानमंत्री ने कह दिया की पाकिस्तान उस दिन … Read more

जैसे किसी जादूगर का सम्मोहन का शो चल रहा है

किसी भी टाउन हॉल की कहानी किसी भी पुराने व्यक्ति से छिपी नहीं होगी ? हम भी उसके विषय में क्या कहें की अंग्रेजों ने ही प्रत्येक जिले में इन बिल्डिंगों का निर्माण कराया था जो सरकारी और गैरसरकारी सामाजिक कार्यों का प्रोमिनेन्ट स्थान हुआ करते थे town hall नाम शायद इसलिए हुआ होगा की … Read more

एक म्यान और दो तलवारें

यह एक गंभीर प्रश्न ही नहीं है संवैधानिक धोका धडी का एक बहुत बड़ा घोटाला है , जब संविधान की इच्छा के अनुसार दिल्ली को अन्य राज्यों के सामान एक विधान सभा दी है तो उसको कार्य करने और अपने कानून बनाने की आजादी क्यों न हो । माना की केंद्रीय सरकार को अपने कुछ … Read more

मीडिया बदनाम हुई ‘दौलत तेरे लिये’

देश के चैथे स्तम्भ के रूप में स्थापित मीडिया की स्वतन्त्रता पर लगातार हमले बढ़ने की घटनायें आये दिन सामने आ रही हैं। जिसमें कहीं पत्रकारों की हत्यायें की जा रही हैं तो कहीं उन्हें जेल भेजा जा रहा है। केन्द्र में भाजपा की सरकार हो या फिर दिल्ली में केजरीवाल अथवा यूपी में सपा … Read more

विवादों की बाढ़ में इंसान…!!

तारकेश कुमार ओझा मैं जिस शहर में रहता हूं वहां कोई नदी नहीं है इसलिए हम बाढ़ की विभीषिका को जानने – समझने से हमेशा बचे रहे। कहते हैं अंग्रेजों ने इस शहर में रेलवे का कारखाना बसाया ही इसलिए था कि यह हमेशा बाढ़ के खतरे से सुरक्षित रहेगा। हालांकि मेरे शहर से करीब … Read more

…तो ऊबने लगे है, नेता अपने कार्यकर्ताओं से

किसी गजलकार ने ठीक ही कहा है, — “टूट जाते हैं कभी मेरे किनारे मुझमें, डूब जाता है कभी मुझमें समन्दर मेरा। जयपुर। राज कर रही पार्टी के नेता अब कार्यकर्ताओं से ऊब रहे हैं। राजधानी में ताजा ताजा मंत्रियों के बयान और कार्य कुछ ऐसा ही संकेत देते मिले है। वन मंत्री राजकुमार रिणवा … Read more

बुलन्दशहर से जुड़े सवालों के जबाव चाहिए

उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में नेशनल हाइवे पर गैंगरेप का बेहद ही शर्मनाक मामला सामने आया है। कार में सवार परिवार को बंधक बनाकर वहशी दरिंदो ने मां और बेटी को हवश का शिकार बनाया है। सामूहिक दुष्कर्म की यह खौफनाक घटना कानून के शासन को कलंकित करने और सभ्य समाज को लज्जित करने वाली हैं। … Read more

पानी ही पानीं !

लगता तो ऐसा है कि जिस प्रकार से भक्तों को छोड़ कर पूरा देश अपने प्रधान सेवक से संतुष्ठ नहीं दिखता है , उससे अधिक प्रकृति भी नाराज है ,क्योंकि दो वर्ष तक पानी के देवता इन्दर भी रुष्ट रहने के बाद वह जब बरसते हैं तो ये नहीं मालूम होता हैं कि वह खुशि … Read more

सरकार का अनावश्यक हस्तक्षेप ?

लगता तो ऐसा है की बचे हुए 34 महीने में मोदी जी 60 वर्षो से अधिक समय से केंद्रीय कार्यालयों लगे जंग को जल्दी से जल्दी साफ़ करना चाहते है लेकिन इसमें कितना हानिकारक होगा उसका अंदाज शायद उनको नहीं है क्योंकि अब तक की स्थापित परम्परा के अनुसार केंद्रीय कार्यालयों में किसी मंत्री, सांसद … Read more

अधिकारियों को हिटलर वाले अधिकार

यानी अब सरकार के नए फरमान से अधिकारियों को हिटलरशाही दिखा कर मातहत कर्मचारियों और दूसरी पंक्ति के अधिकारियों का शोषण करने का अधिकार खुले आम मिल गया है। वैसे ही सरकारी विभागों और सरकार समर्थित विभागों (निगम या बोर्ड आदि) में अधिकारी ना केवल जनता को चूस रहे हैं, या कमीशन और रिश्वत के … Read more

राजनेता या पॉलिटिकल सेल्समैन…!!

तारकेश कुमार ओझा ​सचमुच मैं अवाक था। क्योंकि मंच पर अप्रत्याशित रूप से उन महानुभाव का अवतरण हुआ जो कुछ समय से परिदृश्य से गायब थे। श्रीमान कोई पेशेवर राजनेता तो नहीं लेकिन अपने क्षेत्र के एक स्थापित शख्सियत हैं। ताकतवर राजनेता की बदौलत एक बार उन्हें माननीय बनने का मौका भी मिल चुका है … Read more

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